Sambhal: ईदगाह के इमाम मौलाना जहीरुल इस्लाम की अपील, सड़क पर नहीं मस्जिद और ईदगाह में ही अदा करें अलविदा व ईद की नमाज़।
सम्भल में ईदगाह के इमाम मौलाना जहीरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से एक वीडियो जारी कर मुस्लिम समाज से
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में ईदगाह के इमाम मौलाना जहीरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से एक वीडियो जारी कर मुस्लिम समाज से अलविदा जुमे और ईद की नमाज़ शांति और अनुशासन के साथ अदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस समय रमज़ानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है, जिसमें शब-ए-कद्र की रातें बेहद अहम होती हैं और इन रातों में की गई इबादत हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदक़ात और खैरात अदा करें।
मौलाना जहीरुल इस्लाम ने कहा कि जो लोग साहिब-ए-निसाब हैं, उन्हें अपने माल का हिसाब लगाकर ज़कात अदा करनी चाहिए। ज़कात साल में एक बार दी जाती है और अपने कुल माल का चालीसवां हिस्सा देना होता है। उन्होंने बताया कि एक हजार रुपये में 25 रुपये और एक लाख रुपये में 2500 रुपये ज़कात बनती है, उसी हिसाब से हर व्यक्ति अपनी ज़कात अदा करे। उन्होंने यह भी कहा कि सदक़ा-ए-फित्र अदा करना भी हर साहिब-ए-निसाब पर वाजिब है। इसकी मात्रा अलग-अलग रिवायतों के मुताबिक लगभग 2 किलो 45 ग्राम गेहूं या उसकी कीमत होती है, जिसे अपनी तरफ से और अपने बच्चों की तरफ से भी देना जरूरी है। बेहतर है कि इसे रमज़ान में ही अदा कर दिया जाए, वरना ईद की नमाज़ से पहले अदा करना मुस्तहब है। मौलाना ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ईद की नमाज़ ईदगाह या अपनी-अपनी मस्जिदों में अदा करें और किसी भी हाल में सड़क पर नमाज़ न पढ़ें। अगर किसी मस्जिद में जगह न हो तो दूसरी मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज़ पढ़ें, लेकिन सड़क पर नमाज़ अदा करने से बचें। उन्होंने कहा कि नमाज़ के लिए जाते समय तकबीर पढ़ते हुए जाएं और किसी तरह का नारा न लगाएं। नमाज़ के बाद मुल्क में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ करें और एक-दूसरे से मुसाफहा कर अपने घरों को लौटे।
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