शेखपुरा में यूपीएससी फर्जी दावे का नया मामला: रंजीत कुमार ने रैंक 440 बताकर बटोरा सम्मान।

यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित होने के बाद बिहार से कई उम्मीदवारों ने राज्य का

Mar 12, 2026 - 17:58
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शेखपुरा में यूपीएससी फर्जी दावे का नया मामला: रंजीत कुमार ने रैंक 440 बताकर बटोरा सम्मान।
शेखपुरा में यूपीएससी फर्जी दावे का नया मामला: रंजीत कुमार ने रैंक 440 बताकर बटोरा सम्मान।
  • फतेहपुर गांव का युवक फरार: पूर्व विधायक और पुलिस ने बिना जांच के किया सम्मानित
  • बिहार के असली टॉपर्स पर गर्व के बीच फर्जीवाड़ा: कर्नाटक के रंजीथ को मिली थी असली रैंक

यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित होने के बाद बिहार से कई उम्मीदवारों ने राज्य का नाम रोशन किया, जिसमें मुजफ्फरपुर के राघव झुनझुनवाला ने एआईआर 4 हासिल की, वैशाली के उज्जवल प्रियांक ने एआईआर 10, यशस्वी राजवर्धन ने एआईआर 11 और मोनिका श्रीवास्तव ने एआईआर 16 प्राप्त किया। इन सफलताओं ने पूरे राज्य में उत्साह फैलाया और युवाओं को प्रेरित किया। बिहार से कुल 24 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की, जो राज्य की तैयारी की मजबूती को दर्शाता है। राघव झुनझुनवाला ने अपनी तीसरी कोशिश में यह उपलब्धि हासिल की, जबकि उज्जवल प्रियांक और यशस्वी राजवर्धन ने टॉप 15 में जगह बनाई। मोनिका श्रीवास्तव ने भी अपनी मेहनत से उच्च रैंक हासिल की। इन नामों ने बिहार के युवाओं में नई ऊर्जा भरी, लेकिन इसी बीच शेखपुरा जिले में एक फर्जी दावे ने सबको चौंका दिया। फतेहपुर गांव के रंजीत कुमार ने खुद को रैंक 440 का हकदार बताकर स्थानीय स्तर पर खूब प्रशंसा बटोरी, लेकिन जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ।

रंजीत कुमार, जो अर्जुन यादव के पुत्र हैं और माहुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव में रहते हैं, ने परिणाम आने के तुरंत बाद दावा किया कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल की है। गरीब किसान परिवार से होने के कारण उनकी कहानी जल्दी लोकप्रिय हो गई। उन्होंने मंचों पर मोटिवेशनल भाषण दिए, जहां वे युवाओं को लक्ष्य पर फोकस करने और मेहनत करने की सलाह देते थे। एक वीडियो में वे कहते दिखे कि "लक्ष्य दिखाई दे रहा है तो मंजिल जरूर आसान होगी"। इस दावे पर स्थानीय राजद के पूर्व विधायक विजय सम्राट ने उन्हें नगद राशि और एक सूटकेस गिफ्ट के रूप में दिए। पंचायत मुखिया सरफराज आलम और अन्य लोगों ने भी माला पहनाकर सम्मानित किया। महुली थाना पुलिस ने भी बिना किसी सत्यापन के उन्हें थाने बुलाकर बधाई दी और फोटो खिंचवाई। पूरे इलाके में लोग उनके घर बधाई देने पहुंचे और उन्हें प्रेरणा स्रोत बताया।

जांच शुरू होने पर सच्चाई सामने आई कि असली रैंक 440 कर्नाटक के चिकबल्लापुर के रंजीथ कुमार आर को मिली है, जिनका नाम "रंजीथ" है, जबकि शेखपुरा के युवक का नाम "रंजीत" है। नाम में "थ" और "त" के अंतर का फायदा उठाकर रंजीत ने रिजल्ट को अपना बता दिया। यूपीएससी मेरिट लिस्ट में नाम, रोल नंबर और अन्य डिटेल्स से सत्यापन होने पर यह स्पष्ट हो गया कि दावा फर्जी है। जब लोग और पत्रकारों ने पड़ताल शुरू की तो रंजीत कुमार गांव छोड़कर दिल्ली भाग गए। पूर्व विधायक विजय सम्राट ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दी, जहां उन्होंने उन्हें सम्मानित करने की तस्वीर शेयर की थी। थाना अध्यक्ष रामप्रवेश भारती ने उन्हें एडमिट कार्ड लेकर थाने बुलाया, लेकिन वे नहीं पहुंचे और फरार हो गए।

यह घटना बिहार में यूपीएससी रिजल्ट के बाद फर्जी दावों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा कुमारी के रैंक 301 के फर्जी दावे का मामला सामने आया था, जहां भी जांच में सच्चाई सामने आई। शेखपुरा मामले में भी बिना सत्यापन के सम्मान देने की जल्दबाजी पर सवाल उठे हैं। पुलिस अब रंजीत कुमार की तलाश में जुटी है और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय लोगों में गुस्सा है क्योंकि कई ने उन्हें प्रेरणा मानकर सम्मान दिया था। रंजीत कुमार का फर्जी दावा न केवल व्यक्तिगत स्तर पर धोखा था, बल्कि यह पूरे समाज में भ्रम फैलाने वाला कदम था। उन्होंने मोटिवेशनल स्पीकर बनकर युवाओं को गुमराह किया और अपनी कहानी से लाभ उठाया। असली सफल उम्मीदवारों की मेहनत पर यह सवाल खड़ा करता है कि फर्जी दावे कैसे आसानी से स्वीकार कर लिए जाते हैं। पुलिस और प्रशासन ने अब सख्ती बरतने का फैसला किया है ताकि ऐसे मामले दोबारा न हों।

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