उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर से यूपीएससी रैंक 113 का दावा फर्जी साबित, शिखा गौतम ने गलती मानी।

यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित होने के बाद रैंक 113 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया

Mar 12, 2026 - 17:53
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उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर से यूपीएससी रैंक 113 का दावा फर्जी साबित, शिखा गौतम ने गलती मानी।
उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर से यूपीएससी रैंक 113 का दावा फर्जी साबित, शिखा गौतम ने गलती मानी।
  • रोहतक की शिखा सेहरावत हैं असली टॉपर: बुलंदशहर की शिखा ने दावा वापस लिया
  • यूपीएससी रिजल्ट विवाद: आकांक्षा सिंह मामले के बाद अब शिखा रैंक पर स्पष्टता

यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित होने के बाद रैंक 113 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की शिखा गौतम और हरियाणा के रोहतक जिले की शिखा सेहरावत दोनों ने खुद को इस रैंक का हकदार बताया। बुलंदशहर की शिखा गौतम, जो एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रेमचंद की बेटी हैं और अम्बेडकर नगर भुड़ मोहल्ला की रहने वाली हैं, ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर दावा किया कि उन्होंने दूसरी कोशिश में यह उपलब्धि हासिल की है। उनके परिवार ने खुशी मनाई, दादाजी भावुक होकर रो पड़े और स्थानीय लोगों ने सेल्फी लेकर जश्न मनाया। शिखा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुखर्जी नगर में तैयारी की, रोज 16 घंटे पढ़ाई की और यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट तथा आईपी कॉलेज से बीएससी और बीटीसी किया। यह खबर वायरल होने के बाद लोगों में प्रेरणा फैली, क्योंकि यह एक साधारण पृष्ठभूमि से आई लड़की की सफलता की कहानी लग रही थी। हालांकि, जल्द ही रोहतक की शिखा ने भी दावा किया कि मेरिट लिस्ट में "शिखा" नाम वाली रैंक 113 उनकी है, जो वर्तमान में सम्पला, रोहतक में ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर (बीडीपीओ) के पद पर तैनात हैं। रोहतक की शिखा ने यूपीएससी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि उनकी पिछली सफलता हरियाणा सिविल सर्विसेज में एआईआर 14 रही है, लेकिन उन्होंने सीडीएस में 7वीं रैंक हासिल करने के बाद भी सेवा नहीं ली।

विवाद तब और गहरा गया जब सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट्स वायरल हुए, जिसमें दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने थे। बुलंदशहर की शिखा का दावा शुरू में काफी लोकप्रिय हुआ क्योंकि यह गरीबी से सफलता की प्रेरणादायक कहानी थी—उनके पिता गांधी कन्या इंटर कॉलेज सियाना में क्लास फोर एम्प्लॉयी हैं और दादाजी भी सेवानिवृत्त पीओन थे। परिवार के सदस्यों ने कहा कि शिखा ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत की। लेकिन रोहतक की शिखा ने रोल नंबर और अन्य डिटेल्स से दावा मजबूत किया, जिससे संदेह पैदा हुआ। यह मामला आकांक्षा सिंह के विवाद के तुरंत बाद आया, जहां बिहार के आरा और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की दो आकांक्षा सिंह ने रैंक 301 का दावा किया था। उस मामले में यूपीएससी और पीआईबी ने स्पष्ट किया कि रैंक गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है, जिनके पिता रंजीत सिंह और मां नीलम सिंह हैं, रोल नंबर 0856794। यह स्पष्टीकरण मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया और विवाद खत्म हो गया। शिखा मामले में भी इसी तरह की जांच शुरू हुई, जहां प्रशासन ने दोनों दावों की पड़ताल की।

बुलंदशहर सदर तहसील प्रशासन ने मामले की गहन जांच की, जिसमें तहसीलदार को भेजा गया और परिवार से दस्तावेज मांगे गए। जांच में पाया गया कि शिखा गौतम के दस्तावेजों में नाम "शिखा रानी" दर्ज है, न कि शिखा गौतम, और उन्होंने मुख्य परीक्षा भी पास नहीं की। परिजनों ने संतोषजनक प्रमाण नहीं दे सके, और अंततः उन्होंने दावा वापस ले लिया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, परिवार ने दुख जताते हुए रोहतक की शिखा की रैंक को सही माना और गलती स्वीकार की। शिखा गौतम ने प्रशासन के सामने अपनी भूल मान ली, जिससे मामला सुलझ गया। रोहतक की शिखा सेहरावत अब असली रैंक 113 की धारक हैं, जो दिल्ली निवासी हैं और हरियाणा सिविल सर्विसेज में पहले से सेवा दे रही हैं। उन्होंने पॉडकास्ट में अपनी तैयारी की रणनीति साझा की, जिसमें उन्होंने सकारात्मकता और सरलता पर जोर दिया। यह विवाद यूपीएससी रिजल्ट्स के बाद नामों की समानता से होने वाली भ्रम की स्थिति को दर्शाता है, जहां कई अभ्यर्थी एक ही नाम होने पर दावा कर देते हैं। बुलंदशहर मामले में शुरुआती उत्साह के बाद जांच ने सच्चाई सामने लाई। रोहतक की शिखा ने यूपीएससी मेरिट लिस्ट में अपना नाम और रोल नंबर मैच करके दावा मजबूत किया, जबकि बुलंदशहर की शिखा ने केवल नाम देखकर उत्साहित हो गईं। प्रशासन ने QR कोड और एडमिट कार्ड डिटेल्स से सत्यापन किया, जिससे स्पष्ट हुआ कि असली टॉपर हरियाणा की हैं। यह घटना अभ्यर्थियों को सलाह देती है कि रिजल्ट चेक करते समय रोल नंबर, फादर नेम और अन्य डिटेल्स जरूर देखें।

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