Sambhal : AI से सजेगा क्लासरूम का भविष्य- मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन
सेमिनार का आयोजन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP-2020) के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न
Report : उवैस दानिश, सम्भल
शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका को लेकर मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, सम्भल में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “Teaching and Learning में Artificial Intelligence का Integration” रहा, जिसमें देशभर से शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और भावी शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
सेमिनार का आयोजन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP-2020) के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए व्यवहारिक, तकनीकी और कौशल-आधारित बनाना है।
AI अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है
सेमिनार को संबोधित करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर साजिद जमाल ने कहा कि आज के दौर में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आने वाले समय के शिक्षक जब क्लासरूम में जाएंगे, तो उन्हें यह समझना होगा कि किस तरह की टेक्नोलॉजी, कौन-से ऐप्स और डिजिटल टूल्स छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि शिक्षक धीरे-धीरे उपयोगी टेक्नोलॉजी को सीखें और उसका सकारात्मक इस्तेमाल करें, ताकि पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
पहले दिन छात्रों को किया गया ‘सेंसिटाइज़’
सेमिनार के पहले दिन भावी शिक्षकों को AI और आधुनिक तकनीकों के प्रति सेंसिटाइज़ किया गया। उन्हें बताया गया कि क्लासरूम में टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कैसे किया जाए और यह छात्रों के सीखने के अनुभव को किस तरह आसान और प्रभावी बना सकती है।
शिक्षा में समानता और समावेशन पर भी चर्चा
UGC के दिशा-निर्देशों को लेकर पूछे गए सवाल पर वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास रहेगा कि शिक्षा में समानता और समावेशिता (Inclusive Environment) को पूरी तरह लागू किया जाए, ताकि हर छात्र को बराबर अवसर मिल सके।
बच्चा जॉब सीकर नहीं, जॉब गिवर बने
NEP-2020 के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि बच्चों को समझ विकसित करना, अनुप्रयोग सिखाना और उनमें उद्यमिता (Entrepreneurship) की भावना पैदा करना है, ताकि वे भविष्य में जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बन सकें।
AI के दुष्परिणाम भी, लेकिन सही उपयोग ज़रूरी
कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर साहिल खान ने कहा कि AI के कुछ नकारात्मक पहलू ज़रूर हो सकते हैं, जैसे इसका दुरुपयोग, लेकिन शिक्षा जगत की जिम्मेदारी है कि इसका सही, सकारात्मक और नैतिक इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने बताया कि इस सेमिनार में देशभर से कई डेलिगेट्स ऑनलाइन जुड़े हैं और शिक्षा क्षेत्र के बड़े-बड़े विशेषज्ञों के विचार छात्रों तक पहुँचाए जा रहे हैं।
गेस्ट ऑफ ऑनर ने बढ़ाया सेमिनार का गौरव
सेमिनार में आगरा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गिरीराज किशोर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में मौजूद रहे। उनके विचारों से छात्रों और शिक्षकों को विशेष लाभ मिला। कुल मिलाकर, यह सेमिनार आने वाले शिक्षकों को तकनीक-समर्थ, नवाचार-प्रेरित और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
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