Hardoi : क्षत्रिय महासभा ने UGC के इक्विटी नियम वापस लेने की मांग की
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने UGC द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ावा देने वाले नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। महासभा का कहना है कि ये नियम संविधान में दिए गए समान
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने UGC द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ावा देने वाले नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। महासभा का कहना है कि ये नियम संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा को पूरी तरह अनदेखा करते हैं।
ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं। इनमें SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की रक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को 90 दिनों के अंदर समानता समितियां बनाने का प्रावधान है, जो शिकायतों की जांच करेंगी। महासभा का मत है कि ये नियम समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करते हैं और संविधान की बुनियादी संरचना के विपरीत हैं। ये एक वर्ग के हक में असंतुलन पैदा करते हैं। शुरूआती मसौदे में OBC को शामिल न करने और झूठी शिकायतों पर कोई सजा न होने से विवाद हुआ था। अंतिम संस्करण में OBC को जोड़ा गया, लेकिन झूठी शिकायतों पर दंड न होने से दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है।
देश के कई राज्यों में ये नियम लागू हो चुके हैं, जिससे शिक्षा परिसरों में असंतोष और असमानता का माहौल बन रहा है। भारत की कुल जनसंख्या में सामान्य वर्ग का हिस्सा एक तिहाई है, और ये नियम उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। महासभा का कहना है कि सामान्य वर्ग का देश के विकास, शिक्षा और राजस्व में बड़ा योगदान है, फिर भी उनके हकों का हनन हो रहा है। महासभा ने सरकार से मांग की है कि ये नियम वापस लिए जाएं और सभी वर्गों के छात्रों के हकों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष नीति बनाई जाए। जब तक नियम वापस नहीं होते, महासभा लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से विरोध जारी रखेगी।
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