UGC Protest : UGC के नए विरोधी नियमों के खिलाफ देशव्यापी बवाल, छात्र सड़कों पर उतरे और BJP में इस्तीफों का सिलसिला जारी

नए UGC नियमों के खिलाफ सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी असंतोष बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में कई BJP पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया। नोएडा

By INA News Desk
Jan 29, 2026 - 00:34
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UGC Protest : UGC के नए विरोधी नियमों के खिलाफ देशव्यापी बवाल, छात्र सड़कों पर उतरे और BJP में इस्तीफों का सिलसिला जारी
UGC Protest : UGC के नए विरोधी नियमों के खिलाफ देशव्यापी बवाल, छात्र सड़कों पर उतरे और BJP में इस्तीफों का सिलसिला जारी

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी की गई नई समानता संबंधी नियमावली ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से पेश की गई है, लेकिन इन नियमों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और दिल्ली में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। विरोध करने वाले इन नियमों को एकतरफा और सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बता रहे हैं। कई जगहों पर पुलिस के साथ झड़पें हुईं, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने कफन पहनकर मार्च निकाला। राजनीतिक स्तर पर भी हलचल मची हुई है, जहां सत्ताधारी दल के कई कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा और किसी के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा।

UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्रों का व्यापक आंदोलन, सड़कों पर उतरे युवा

देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों ने UGC की नई नियमावली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए हैं। उत्तर प्रदेश में लखनऊ, मेरठ, देवरिया, गाजियाबाद और अन्य शहरों में छात्रों ने रैलियां निकालीं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों को प्राकृतिक आरोपी मान लिया जाएगा और साक्ष्य का बोझ उन पर डाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन नियमों से कैंपस में अशांति बढ़ेगी और झूठी शिकायतों का खतरा रहेगा। गाजियाबाद में छात्रों ने कफन पहनकर मार्च किया, जबकि मेरठ और देवरिया में पुलिस के साथ टकराव की खबरें आईं। दिल्ली, बिहार और राजस्थान में भी छात्रों ने विरोध जताया। छात्रों का कहना है कि समानता समितियों को असीमित शक्तियां दी गई हैं, जबकि आरोपी के बचाव के लिए कोई ठोस सुरक्षा नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नियमों को तत्काल वापस लिया जाए या उनमें संशोधन किया जाए।

BJP नेताओं और पदाधिकारियों के इस्तीफों का सिलसिला, UGC नियमों को बताया एकतरफा

नए UGC नियमों के खिलाफ सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी असंतोष बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में कई BJP पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया। नोएडा में BJP युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया और नए UGC नियमों के खिलाफ मजबूत विरोध जताया। काशी में जिला कार्य समिति सदस्य सत्यम चौबे ने UGC एक्ट के विरोध में इस्तीफा सौंपा। पीलीभीत में बूथ अध्यक्ष कृष्ण तिवारी ने इस्तीफा दिया। बुलंदशहर में 10 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दिया और पत्र में लिखा कि सरकार ने सवर्णों के हक मारकर उनके बच्चों का भविष्य खराब किया है। रायबरेली में किसान मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट श्याम सुंदर त्रिपाठी और अध्यक्ष रमेश सिंह ने इस्तीफा दिया। रमेश सिंह ने कहा कि इस कानून से जातीय विघटन बढ़ेगा, छात्रों का उत्पीड़न होगा, झूठी कार्रवाई बढ़ेगी और वैमनस्यता फैलेगी। बरेली में शहर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया और नियमों को "काला कानून" बताया, जिसमें कहा कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को हानि पहुंचा रहे हैं। आगरा के पूर्व उपसभापति ने प्रधानमंत्री को खून से लिखी चिट्ठी भेजी। कुल मिलाकर 11 BJP पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा दिया और पत्र में लिखा कि UGC कानून से बच्चों का भविष्य खतरे में है। पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ BJP नेता कलराज मिश्रा ने भी नए UGC कानून का विरोध किया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

केंद्र सरकार और अन्य नेताओं के बयान, नियमों का बचाव और चेतावनी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि नए UGC नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ अन्याय या उत्पीड़न नहीं किया जाएगा, कोई भेदभाव नहीं होगा और कानून का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियम निष्पक्ष तरीके से लागू किए जाएंगे। बसपा प्रमुख मायावती ने विरोध करने वालों पर जातिवादी मानसिकता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा UGC के समानता प्रावधानों के खिलाफ विरोध जातिवादी सोच से प्रेरित है। उन्होंने दलितों और पिछड़ों को चेतावनी दी कि स्वार्थी और भ्रष्ट नेता उन्हें गुमराह न करें। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने BJP पर समाज को बांटने का आरोप लगाया और कहा कि पहले भी BJP ने ऐसे तरीके अपनाए हैं। छात्रों ने कहा कि नियमों से कैंपस में अराजकता फैलेगी। सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श शुरू किया है ताकि भ्रम दूर हो सके। विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है।

विरोध के प्रमुख बिंदु और प्रभाव

विरोध करने वालों का मुख्य तर्क है कि UGC की नई नियमावली Promotion of Equity in Higher Education Institutions के नाम से जारी की गई है, जो SC, ST और OBC छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव रोकने के लिए है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह नियम एकतरफा हैं, जहां आरोपी को प्राकृतिक दोषी माना जाता है और साक्ष्य का बोझ आरोपी पर डाला जाता है। कोई अपील या सुरक्षा तंत्र नहीं है। इससे झूठी शिकायतों का खतरा बढ़ेगा और उच्च शिक्षा संस्थानों में वैमनस्यता फैलेगी। छात्रों ने कहा कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ "रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन" है। राजनीतिक इस्तीफों से साफ है कि मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ताधारी दल के अंदर भी पहुंच गया। इस्तीफे देने वालों ने पत्रों में लिखा कि नियमों से सवर्ण समाज के बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और पार्टी के सिद्धांतों से विचलन हो रहा है। केंद्र ने कहा कि शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए ये नियम जरूरी हैं, लेकिन विरोध में कोई समझौता नहीं दिख रहा। प्रदर्शन जारी हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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