UGC बना 'सवर्णों' के करियर पर 'ब्लैक स्पॉट', क्या अब बिना किसी अपराध के सजा पाएंगे निर्दोष छात्र? विरोध में इन अधिकारियों व नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा

लखनऊ में भाजपा के 11 जिला पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा दिया। इनमें बख्शी तालाब क्षेत्र के कुम्हारवां मंडल महामंत्री आलोक तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, शक्ति

Jan 28, 2026 - 23:49
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UGC बना 'सवर्णों' के करियर पर 'ब्लैक स्पॉट', क्या अब बिना किसी अपराध के सजा पाएंगे निर्दोष छात्र? विरोध में इन अधिकारियों व नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा
UGC बना 'सवर्णों' के करियर पर 'ब्लैक स्पॉट', क्या अब बिना किसी अपराध के सजा पाएंगे निर्दोष छात्र? विरोध में इन अधिकारियों व नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा
  • UGC के प्रमोशन ऑफ इक्विटी नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज में भड़का आक्रोश, नोएडा भाजपा युवा मोर्चा उपाध्यक्ष राजू पंडित ने दिया तत्काल इस्तीफा
  • भाजपा में बढ़ता असंतोष, उत्तर प्रदेश के कई जिलों से पदाधिकारियों ने UGC नियमों को 'काला कानून' बताकर दिए इस्तीफे
  • उच्च शिक्षा में समानता के नाम पर UGC के नए नियमों का विरोध तेज, सवर्ण छात्रों के भविष्य पर खतरे की आशंका से रोल बैक की मांग बढ़ी

UGC के नए इक्विटी नियमों ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से जारी होने के बावजूद सवर्ण समाज में व्यापक असंतोष पैदा किया है। नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं, जहां कई भाजपा पदाधिकारियों और एक अधिकारी ने इस्तीफा दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी 2026 को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' अधिसूचित किए। ये नियम सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होते हैं, जिनमें केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालय तथा स्वायत्त कॉलेज शामिल हैं। नियमों का मुख्य उद्देश्य SC, ST, OBC, EWS, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ जाति, जनजाति या अन्य आधार पर भेदभाव को रोकना है।

नियमों के तहत हर संस्थान में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर (EOC) स्थापित करना अनिवार्य है। EOC के अंतर्गत इक्विटी कमिटी का गठन होगा, जिसमें SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। कमिटी भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी, समानता बढ़ाने के उपाय सुझाएगी और रिपोर्ट तैयार करेगी। संस्थानों में इक्विटी स्क्वाड भी बनाई जाएगी, जो निगरानी करेगी। 24 घंटे इक्विटी हेल्पलाइन स्थापित करने का प्रावधान है। संस्थान प्रमुखों की जवाबदेही तय की गई है और गैर-अनुपालन पर फंडिंग रोकने, मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

विरोध मुख्य रूप से इस बात पर है कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल SC, ST और OBC तक सीमित है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई समान सुरक्षा या कमिटी में अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं है। विरोध करने वाले इसे एकपक्षीय मानते हैं और दावा करते हैं कि झूठी शिकायतों पर कोई दंड प्रावधान न होने से दुरुपयोग संभव है, जिससे उच्च शिक्षा में जातिगत तनाव बढ़ सकता है।

नोएडा में भाजपा युवा मोर्चा नेता का इस्तीफा

नोएडा महानगर जिला भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने नियमों के विरोध में तत्काल प्रभाव से पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नियमों को 'काला कानून' बताया और कहा कि यह सवर्ण जातियों के बच्चों के खिलाफ है। उनका इस्तीफा 26 जनवरी 2026 के आसपास सामने आया। राजू पंडित ने कहा कि ये नियम सवर्ण समाज के छात्रों को परेशान कर सकते हैं और सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं।

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा और निलंबन

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (2019 बैच PCS अधिकारी) ने 26 जनवरी को इस्तीफा दिया। उन्होंने नियमों को 'ब्लैक लॉ' करार दिया और कहा कि यह सवर्ण विरोधी है तथा समाज को बांटने वाला है। इस्तीफे में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर असहमति जताई। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया।

लखनऊ में भाजपा के 11 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा

लखनऊ में भाजपा के 11 जिला पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा दिया। इनमें बख्शी तालाब क्षेत्र के कुम्हारवां मंडल महामंत्री आलोक तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, शक्ति केंद्र संयोजक मोहित मिश्रा, वेद प्रकाश सिंह, नीरज पांडेय, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनूप सिंह, मंडल महामंत्री राज विक्रम सिंह, पूर्व मंडल मंत्री अभिषेक अवस्थी, बूथ अध्यक्ष विवेक सिंह और पूर्व सेक्टर संयोजक कल सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नियम सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और पार्टी के मूल सिद्धांतों से भटकाव है।

रायबरेली में भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष का इस्तीफा

रायबरेली की सलोन विधानसभा में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस्तीफा दिया। उन्होंने नियमों को 'काला कानून', 'अत्यंत हानिकारक' और 'विभाजनकारी' बताया। उन्होंने कहा कि यह सवर्ण बच्चों के खिलाफ है और समाज में तनाव बढ़ाएगा।

अन्य जिलों में भाजपा नेताओं के इस्तीफे

बलरामपुर में भाजपा नेता और पूर्व विस्तारक मृगेंद्र उपाध्याय ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया और नियमों को सवर्ण विरोधी तथा ब्राह्मण विरोधी बताया। बागपत में भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सुमित शर्मा ने इस्तीफा दिया और केंद्र सरकार के फैसले पर असंतोष जताया। फिरोजाबाद में भाजपा महिला मोर्चा पदाधिकारी शशि तोमर ने इस्तीफा दिया और कहा कि नियम जाति भेदभाव बढ़ाएंगे तथा सवर्ण छात्रों के जीवन से खिलवाड़ करेंगे। पीलीभीत में भाजपा बूथ अध्यक्ष कृष्ण तिवारी ने इस्तीफा दिया। अयोध्या में भाजपा युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह विक्की ने इस्तीफा दिया और नियमों को एकपक्षीय तथा सवर्ण समाज के खिलाफ बताया। मिश्रिख देहात में भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष आलोक कुमार मिश्रा ने सभी पदों से इस्तीफा दिया। भदोही में युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष आदर्श राय ने इस्तीफा दिया। सहारनपुर में भाजपा हकीकत मंडल उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोहन कालड़ा ने इस्तीफा दिया। बहराइच में भाजपा युवा मोर्चा नगर मंत्री उद्देश्य प्रताप सिंह ने इस्तीफा दिया।

विरोध प्रदर्शन और अन्य घटनाएं

विरोध उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, सोनभद्र, बहराइच, श्रावस्ती, आगरा, प्रयागराज, जौनपुर, शाहजहांपुर जैसे जिलों में फैला। छात्रों ने काले झंडे लेकर मार्च निकाले। दिल्ली में UGC कार्यालय के बाहर घेराव हुआ। आगरा में एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई, जिसमें नियमों को गैर-समावेशी बताया गया। सवर्ण आर्मी, करणी सेना जैसे संगठनों ने प्रदर्शन किए और रोल बैक की मांग की। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा और कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नियम कानून के दायरे में रहेंगे, किसी का उत्पीड़न नहीं होगा और भेदभाव के नाम पर दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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