Special Article: हिन्दुओं को विभाजित करके अपनी राजनीति साधने के प्रयास में विपक्ष।

इन दिनों विपक्ष उत्तर प्रदेश में दो घटनाओं के माध्यम से अपनी राजनीति साधने के प्रयास में है। पहली घटना वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट के नवीनीकरण

Jan 28, 2026 - 23:34
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Special Article: हिन्दुओं को विभाजित करके अपनी राजनीति साधने के प्रयास में विपक्ष।
हिन्दुओं को विभाजित करके अपनी राजनीति साधने के प्रयास में विपक्ष।

लेखक:- मृत्युंजय दीक्षित 

इन दिनों विपक्ष उत्तर प्रदेश में दो घटनाओं के माध्यम से अपनी राजनीति साधने के प्रयास में है। पहली घटना वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट के नवीनीकरण के लिए पुरानी प्रतिमाओं तथा कुछ छोटे मंदिरो पर बुलडोजर चलाने की थी जो बाद में फर्जी निकली । इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के उपरान्त एआई वीडियो के आधार पर मंदिर तोड़े जाने की अफवाहें फैलाकर राजनैतिक रोटियां सेंकने वाले लोगों जिनमें आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह तथा  बिहार के सांसद पप्पू यादव शामिल हैं पर मुकदमा दर्ज  किया गया है। इसके बाद भी इस विषय पर स्थानीय स्तर पर राजनीति की जा रही है। समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर पाल समाज को भड़काकर धरना  प्रदर्शन इत्यादि का आयोजन कर रही है। इस मुद्दे पर सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा  भारतीय जनता पार्टी की छवि को आघात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का जमकर  प्रयोग कर रही है। 

दूसरी घटना  प्रयागराज में चल रहे माघ मेले की है जो विवादों में रहने वाले एक शंकराचार्य के तथाकथित अपमान से जुड़ी है। प्रयागराज में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला माघ मेला सफलतापूर्वक चल रहा था उसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मेला प्रशासन के नियमों को धता बताते हुए पालकी (बग्घी) में बैठकर अपने भक्तों  के साथ संगम नोज पर पहुँचने के लिए अड़ गए। पुलिस बल ने उनको बग्घी न ले जाने का निवेदन किया।  उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद हुआ और उन्होंने पुलिस के साथ हाथापाई शुरू कर दी । इसके बाद जमकर उपद्रव हो गया। अंततः शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ ओैर समाजवादी पार्टी और अन्य विरोधी दलों ने मामले को तुरंत ही अपनी राजनीति चमकाने के लिए लपक लिया। विभिन्न राजनैतिक दल इस मुद्दे को जिस तरह उठा रहे हैं उससे यह स्पष्ट है कि उनको शंकराचार्य या सनातन के सम्मान से कोई लेना देना नहीं है उनका एकमात्र उद्देश्य इस मुद्दे पर हिन्दू मतों का विभाजन करना है। यह भी संभव है कि इस प्रकरण की पटकथा किसी राजनैतिक दल ने ही लिखी हो जो आजकल अविमुक्तेश्वरानंद के निकट दिखाई दे रहा है।

राजनैतिक दल तो समय के अनुसार अपने रंग बदलते रहते हैं किन्तु क्या अविमुक्तेश्वरानंद भी यह भूल गए कि जो समाजवादी आज उनका समर्थन कर रहे हैं जिन्होंने ही कभी उनके ऊपर लाठियां बरसाई थीं और जमीन पर पटक -पटक कर मारा था। उस समय भाजपा ने ही उनकी सुरक्षा व बचाव किया था। आज अविमुक्तेश्वरानंद भाजपा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं । 

अविमुक्तेश्वरानंद प्रायः अपनी विवादित बयानबाजी के कारण चर्चा में रहते हैं। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर विवादित बयान दिया देकर इन्होंने बड़ा विवाद खड़ा करने का असफल प्रयास किया था । एक बार स्वामी अविमुकतेश्वरानंद ने कहा था कि राहुल गांधी हिंदू नही हैं उन्हें राम मंदिर नहीं जाने देना चाहिए। जब आपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने पाक के साथ सिंधु जल समझौता निलंबित किया तब उन्होंने कहा था कि यह काम  करने के लिए भारत को कम से कम 20 साल लग जाएंगे,  इन्होंने वक्फ संशोधन  बिल को सौगात -ए -मोदी कहा था । यह काशी कारिडोर का भी विरोध कर चुके हैं । यह शंकराचार्य अभी तक अयोध्या दर्शन  करने नहीं गए हैं। यह हिंदू समाज को विभाजित करने वाली  राजनैतिक ताकतों  के हाथों की कठपुतली बनकर उनके शिकार हो गए हैं। 

जिन लोगों के मुंह में तमिलनाडु  के द्रमुक नेता सनातन की तुलना डेंगू ,मलेरिया से तुलना  उसके उन्मूलन जैसी  बातों पर ताला लग जाता है वो भी शंकराचार्य के समर्थन में झंडा उठाए हैं। आज वो लोग अविमुक्तेश्वरानंद  के पक्ष में खड़े हैं जिन्होंने कुछ दिन पूर्व  मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग चलाने के प्रस्ताव का समर्थन कर दिया था क्योंकि उस जज ने हिन्दू पक्ष को दीपक जलाने की अनुमति दे दी थी। आज वो हिन्दू सनातन की दुहाई दे रहे हैं जिनहें गाय के गोबर से बदबू आती है। बांग्लादेश में निर्दोष हिन्दुओं की हत्याएं पर पूरा  इंडी गठबंधन मौन हो गया। सनातन को अपमानित करने में समाजवदियों  ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है। यह समाजवादी रामचिरत मानस व गीता को अपमानित करते हैं ,इनके विधायक व कार्यकर्ता पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस को फाड़ते और जलाते हैं। आज यही लोग शंकराचार्य की आड़  लेकर हिंदू समाज को बांटने की साजिश कर रहे हैं।

प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “बंटोंगे तो कटोगे“ का नारा दिया था जिससे समाजवादी व कांग्रेसी काफी परेशान थे कि अगर कहीं हिन्दू पूरी तरह से एकजुट हो गए तो उनकी राजनीति समाप्त हो जाएगी,  इसलिए प्रयागराज की धरती पर ही हिन्दू समाज को बांटने की रणनीति बनाई गई और पीडीए की राजनीति करने वाले लोगों ने माघ मेला के पवित्र अवसर को चुना। आम जनमानस की स्मृति  बहुत कमजोर होती है और उसे जातीय आधार पर विभाजित किया जा सकता है। इन सभी दलों को यह भी पता है कि जब तक ब्राह्मण समाज व समस्त सवर्ण समाज को विभाजित  और भाजपा के प्रति उनके मन में निराशा के भाव नही पनपा जाते  हैं तब तक भारतीय जनता पार्टी का विजय रथ उत्तर प्रदेश में रोकना असंभव है। 

समाजवादी पार्टी को पता है कि जब तक हिन्दू धर्म को किसी बड़े विवाद के माध्यम से विभाजित नहीं किया जाएगा तब तक उनका पीडीए शक्तिहीन रहेगा । यही कारण हैं कि जब  टीवी चैनलों पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर चर्चा हो रही थी तब  शंकराचार्य की आड़ हिन्दू धर्म में दरार डालने वाली बहस हो रही है। विपक्षी दलों के प्रवक्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना बाबर और औरंगजेब जैसे मुगल शासकों से कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जितना सम्मान संतो और शंकराचार्यों  का किया है उतना किसी ने नहीं किया है। मुख्यंमंत्री ने सनातन धर्म का मान बढ़ाया है। अयोध्या, प्रयाग, काशी, मथुरा, विंन्घ्याचल के उपेक्षित मंदिरो का जीर्णोद्धार करके हिन्दू धर्म का मान बढ़ाया है। ऐसे कर्मयोगी संत के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी अस्वीकार्य है। 

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