छत्तीसगढ़ बस्तर के 47 गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा, बीजापुर नारायणपुर सुकमा में मनाया गया गणतंत्र दिवस।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 गांवों ने 26 जनवरी 2026 को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया। इन गांवों में
- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में 26 जनवरी 2026 को 47 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया और गणतंत्र दिवस मनाया गया, जहां बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के ये गांव दशकों तक वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा कैंपों की मौजूदगी से लोकतंत्र का जश्न मनाने में सक्षम हुए।
- दशकों बाद बस्तर में लोकतंत्र की वापसी, 47 गांवों ने पहली बार मनाया गणतंत्र दिवस और लहराया राष्ट्रीय ध्वज
- बीजापुर नारायणपुर सुकमा के 47 गांवों में ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस, पहली बार तिरंगा फहराने से उत्साह का माहौल
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 गांवों ने 26 जनवरी 2026 को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया। इन गांवों में दशकों तक वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव के कारण राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था। अब इन गांवों में तिरंगा फहराया गया। ग्रामीणों ने उत्साह से भाग लिया। सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने यह संभव बनाया। बस्तर में अब 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। इन कैंपों ने सुरक्षा के साथ विकास का रास्ता खोला। सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और संचार सुविधाएं पहुंच रही हैं। 47 गांवों में ध्वजारोहण हुआ। यह बस्तर के लिए ऐतिहासिक दिन था। गांवों में उत्सव का माहौल रहा।
बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 गांवों में गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया गया। ये गांव पहले उग्रवाद प्रभावित थे। अब पहली बार राष्ट्रीय ध्वज लहराया। ग्रामीणों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सुरक्षा कैंपों की स्थापना से स्थिति बदली। बस्तर में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ी। विकास कार्य आगे बढ़े। इन गांवों में पहली बार लोकतंत्र का जश्न मनाया गया। तिरंगा फहराने से ग्रामीणों में उत्साह दिखा। कार्यक्रम में ग्रामीण शामिल हुए। यह घटना बस्तर में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का प्रतीक बनी। 26 जनवरी को यह आयोजन हुआ। गांवों में शांति और उत्सव रहा।
बस्तर के 47 गांवों ने पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के ये गांव दशकों से प्रभावित थे। अब तिरंगा फहराया गया। ग्रामीणों ने ध्वजारोहण किया। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। कैंपों से विकास पहुंचा। सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं आईं। गांवों में उत्सव मनाया गया। यह ऐतिहासिक पल था। लोकतंत्र की बहाली हुई। ग्रामीणों ने भाग लिया। तिरंगा लहराने से माहौल उत्साहपूर्ण रहा। कार्यक्रम सफल रहा। बस्तर में नई शुरुआत हुई।
छत्तीसगढ़ बस्तर में 47 गांवों ने गणतंत्र दिवस मनाया। ये गांव बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा में हैं। पहली बार तिरंगा फहराया। उग्रवाद प्रभाव कम हुआ। सुरक्षा कैंप स्थापित हुए। विकास कार्य चले। ग्रामीणों ने उत्साह दिखाया। ध्वजारोहण कार्यक्रम हुए। गांवों में जश्न मनाया। यह बस्तर के इतिहास में महत्वपूर्ण था। लोकतंत्र मजबूत हुआ। तिरंगा लहराया गया। ग्रामीण शामिल हुए। स्थिति सामान्य हुई।
बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के 47 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया। तिरंगा फहराया गया। दशकों के प्रभाव से मुक्ति मिली। सुरक्षा बलों की मौजूदगी से संभव हुआ। विकास सुविधाएं पहुंचीं। ग्रामीणों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उत्सव का माहौल रहा। यह ऐतिहासिक था। लोकतंत्र की वापसी हुई। गांवों में तिरंगा लहराया। ग्रामीण उत्साहित रहे। कार्यक्रम सफल रहा। बस्तर में बदलाव आया।
बस्तर संभाग के 47 गांवों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में यह हुआ। पहली बार तिरंगा फहराया। उग्रवाद से प्रभावित रहे गांव। अब सुरक्षा कैंप हैं। विकास रास्ता खुला। ग्रामीणों ने ध्वजारोहण किया। उत्साह दिखा। लोकतंत्र का जश्न मनाया। यह महत्वपूर्ण कदम था। गांवों में शांति रही। तिरंगा लहराया। कार्यक्रम आयोजित हुए।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में 47 गांवों ने पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के गांव थे। तिरंगा फहराया गया। दशकों बाद लोकतंत्र लौटा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। विकास कार्य हुए। ग्रामीणों ने उत्सव मनाया। ध्वजारोहण हुआ। यह ऐतिहासिक था। गांवों में उत्साह रहा। तिरंगा लहराया। कार्यक्रम सफल रहे। बस्तर में नई सुबह आई।
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