MP News: रेंजर शुक्ला का नया कारनामा- जब तक रहे एसडीओ और रेंजर के पद पर बेच दिया निगम का आधा जंगल।
माफियाओं से भी रहे है घनिष्ठ संबंध,महीना बांध रखा था माफियाओं ने,जंगल से होता था रेत और पत्थरों का अवैध उत्खनन: सूत्र
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मध्यप्रदेश वन राज्य निगम जगंलों को बेचने का काम माफिया तो बाद में पहले जिन्हें जंगल की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है वही कर रहे है निगम की परियोजना रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल में लगातार सुर्खियों में बने हुए है रेंजर शुक्ला के भृष्टाचार के मामले खत्म होने का नाम नही ले रहे है।
ताजा मामला रेंजर शुक्ला का ही आया है सूत्र बताते है रेंजर शुक्ला पहले एसडीओ के पद पर भी पदस्थ रह चुके है उस समय जंगलों की कटाई करवाकर आधी लकड़ियां ही डिपो भेजी जाती थी बाकी आधी अधिनस्थों के साथ मिलकर माफियाओं को बेचने का काम किया करते थे वहीं जिस भी रेंज में शुक्ला पदस्थ रहे वहाँ अवैध कटाई और अतिक्रमण का जाल फैला हुआ है वहीं वन संपदा को भी बेचने का काम रेंजर शुक्ला द्वारा लगातार किया गया है चोपना रेंज में अवैध उत्खनन और रेत के ठेकेदारों और वन माफियाओं से भी रेंजर की गहरी सांठगांठ रही है।
वहीं यह बात भी सामने आई है कि माफियाओं से लाखों रुपया महीना रेंजर को आते थे हमारे द्वारा लगातार मामले उजागर करने पर रेंजर के वो साथी अब अपने करार से मुकर गए है और उनका महीना बंद हो गया है जिससे बौखलाहट में अब रेंजर इधर उधर शिकवे शिकायतें हमारे नाम से गया रहे है वहीं अब पुलिस में अपने विभागीय कर्मचारी से पत्रकार के खिलाफ झूठी शिकायत करवाकर झूठे मामले में फसाने के प्रयास में भी लगा हुआ है।
वहीं बता दें की इनकी महीनों के ऑडिट रिपोर्ट भी डिवीजन में जमा नही की गई यहाँ आपके ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे कि रेंजर शुक्ला फिलहाल मेडिकल लीव पर है बावजूद इसके वे दिन दिन भर डिवीजन कार्यालय में बैठकर अपने भृष्टाचार से संबंधित दस्तावेजों के हेरफेर में लगे हुए है और झूठी शिकायत की साजिश भी रेंजर ने डिवीजन कार्यालय में बैठकर ही रची है यदि कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं तो रेंजर शुक्ला कार्यालयीन समय मे बाबूओं के साथ बैठकर गोलमाल करते हुए देखे जा सकते है।
इनके द्वारा किये गए भृष्टाचार की अगर निष्पक्ष जांच हो जाये तो शासन के लाखों के गबन का मामला उजागर होने से इंकार नही किया जा सकता है अब देखना यह होगा कि भोपाल में बैठे मध्यप्रदेश वन राज्य निगम के अधिकारियों की नींद कब खुलती है और वे अपने एसी चेम्बर से निकलकर कब बैतूल की ओर रुख करते है और इतने बड़े भृष्टाचारी रेंजर के मामलों की कब निष्पक्ष जांच की जाती है।
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