शिक्षा विभाग की गलती से शिवपुरी की छात्रा की लैपटॉप राशि बिहार में गलत खाते में पहुंची।
MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण एक मेधावी छात्रा को मिलने वाली ....
MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण एक मेधावी छात्रा को मिलने वाली लैपटॉप योजना की 25,000 रुपये की राशि गलत खाते में स्थानांतरित हो गई। यह राशि छात्रा के खाते की बजाय बिहार के किसी अन्य व्यक्ति के खाते में चली गई। इस गलती से परेशान होकर छात्रा ने शिवपुरी कलेक्टर कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई और मदद की गुहार लगाई। यह घटना मध्य प्रदेश सरकार की मेधावी छात्र लैपटॉप योजना के तहत हुई, जिसका उद्देश्य 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करना है। इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार की मेधावी छात्र लैपटॉप योजना के तहत 12वीं कक्षा में 75% या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। शिवपुरी की रहने वाली छात्रा मुस्कान ने 2024-25 शैक्षणिक सत्र में मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया और इस योजना के लिए पात्रता हासिल की। उसे जुलाई 2025 में यह राशि अपने बैंक खाते में प्राप्त होनी थी।
हालांकि, प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह राशि मुस्कान के खाते में जमा होने की बजाय बिहार के किसी अन्य व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित हो गई। जब मुस्कान को अपने खाते में राशि नहीं मिली, तो उसने शिक्षा विभाग और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया। जांच में पता चला कि गलत बैंक खाता नंबर दर्ज होने के कारण यह त्रुटि हुई। यह गलती शिक्षा विभाग के डेटा प्रबंधन और राशि वितरण की प्रक्रिया में कमी को दर्शाती है। परेशान होकर मुस्कान ने अपने परिवार के साथ 15 जुलाई 2025 को शिवपुरी कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज की और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मेधावी छात्र लैपटॉप योजना का उद्देश्य
मध्य प्रदेश सरकार की यह योजना 2009 में शुरू की गई थी, जिसका मकसद मेधावी छात्रों को तकनीकी शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत, 12वीं कक्षा में 75% या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25,000 रुपये की राशि दी जाती है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए मददगार है, जो लैपटॉप जैसे उपकरण खरीदने में असमर्थ होते हैं। मध्य प्रदेश शिक्षा पोर्टल (shikshaportal.mp.gov.in) के माध्यम से इस योजना का संचालन होता है, जहां छात्रों के विवरण और बैंक खाता जानकारी दर्ज की जाती है।
इस मामले में गलती की जड़ शिक्षा विभाग के डेटा प्रबंधन में है। मध्य प्रदेश शिक्षा पोर्टल पर छात्रों के बैंक खाता विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया में मानवीय या तकनीकी त्रुटि हुई, जिसके कारण राशि गलत खाते में चली गई। विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, ऐसी त्रुटियां पहले भी सामने आई हैं, जहां गलत खाता नंबर या IFSC कोड दर्ज होने से राशि अन्य व्यक्तियों के खातों में पहुंची।
मुस्कान ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने बोर्ड परीक्षा में कड़ी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए थे और इस राशि से वह लैपटॉप खरीदकर अपनी पढ़ाई को और बेहतर करना चाहती थी। गलत खाते में राशि जाने से उसका विश्वास टूटा है। उसने कलेक्टर से मांग की कि राशि को सही खाते में स्थानांतरित किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
शिवपुरी कलेक्टर कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच शुरू की। कलेक्टर रविंद्र सिंह ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि गलत खाते में गई राशि को वापस लाने और छात्रा के खाते में जमा करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही, उन्होंने विभाग से इस तरह की त्रुटियों को रोकने के लिए डेटा सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने को कहा। मध्य प्रदेश शिक्षा पोर्टल पर दर्ज जानकारी की दोबारा जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह त्रुटि संभवतः बैंक खाता नंबर या IFSC कोड में गलती के कारण हुई। विभाग अब बिहार के उस खाते की जानकारी जुटा रहा है, जिसमें राशि गई है। हालांकि, राशि वापस लाने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, क्योंकि यह अंतरराज्यीय मामला है।
इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मेधावी छात्रों के लिए शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ सही समय पर सही लाभार्थी तक नहीं पहुंचना निराशाजनक है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों में गुस्सा देखा गया। कई यूजर्स ने शिक्षा विभाग की लापरवाही की आलोचना की और मांग की कि ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, जैसे मध्य प्रदेश शिक्षा पोर्टल, पर डेटा प्रबंधन में और सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सत्यापन के लिए मल्टी-लेयर चेकिंग सिस्टम लागू करना चाहिए, ताकि ऐसी त्रुटियां कम हों। साथ ही, छात्रों को उनकी राशि का स्टेटस ट्रैक करने के लिए पारदर्शी सिस्टम उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मुस्कान के मामले ने अन्य छात्रों को भी सतर्क कर दिया है। कई छात्र अब अपने खाते में राशि जमा होने की स्थिति की जांच कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि इस तरह की गलतियों को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने मेधावी छात्र लैपटॉप योजना को और पारदर्शी बनाने के लिए पोर्टल पर एक हेल्पलाइन नंबर और शिकायत निवारण प्रणाली शुरू करने की बात कही है।
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