मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मोहन लाल द्विवेदी ने 50 वर्षों से नींद न लेने का दावा किया, चिकित्सकों को हैरान कर दिया।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहन लाल द्विवेदी ने दावा किया है कि वे पिछले 50 वर्षों से एक पल भी नहीं सोए हैं, फिर भी

Jan 17, 2026 - 17:56
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मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मोहन लाल द्विवेदी ने 50 वर्षों से नींद न लेने का दावा किया, चिकित्सकों को हैरान कर दिया।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मोहन लाल द्विवेदी ने 50 वर्षों से नींद न लेने का दावा किया, चिकित्सकों को हैरान कर दिया।
  • सेवानिवृत्त ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी 1973 से बिना सोए स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, विज्ञान की समझ को चुनौती
  • 75 वर्षीय मोहन लाल द्विवेदी की अनोखी स्थिति: 50 साल से नींद से दूर, फिर भी पूरी तरह ऊर्जावान और स्वस्थ

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहन लाल द्विवेदी ने दावा किया है कि वे पिछले 50 वर्षों से एक पल भी नहीं सोए हैं, फिर भी वे पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान हैं। उनकी यह स्थिति चिकित्सा विज्ञान के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है, जहां डॉक्टरों का कहना है कि बिना नींद के इतने लंबे समय तक जीवित रहना असंभव है। मोहन लाल द्विवेदी का जन्म 1949 में हुआ था और उन्होंने 1973 में व्याख्याता के रूप में अपना करियर शुरू किया था। 1974 में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और नायब तहसीलदार बने, उसके बाद 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके अनुसार, यह स्थिति 1973 के आसपास शुरू हुई, जब वे व्याख्याता बने थे। उन्होंने बताया कि उस समय से उनकी नींद उड़ गई और वे एक भी पल गहरी नींद नहीं सो पाए। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए 6 से 8 घंटे की नींद आवश्यक है, लेकिन मोहन लाल द्विवेदी इस नियम को चुनौती देते हुए बिना सोए सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने दिल्ली, मुंबई और अन्य स्थानों पर इलाज कराया, लेकिन कोई डॉक्टर उनकी स्थिति का कारण नहीं बता सका। डॉक्टरों ने विभिन्न जांचें कीं, लेकिन सब कुछ सामान्य पाया गया। मोहन लाल द्विवेदी की दिनचर्या में रात में किताबें पढ़ना, लेखन कार्य करना या अन्य गतिविधियां शामिल हैं, और वे दिन में भी पूरी तरह सक्रिय रहते हैं। उनकी यह स्थिति स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है, और कई लोग उन्हें देखने आते हैं।

मोहन लाल द्विवेदी ने बताया कि उनकी यह स्थिति 1973 में व्याख्याता बनने के समय से शुरू हुई, जब वे अपनी नौकरी में व्यस्त हो गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय से वे रात में सो नहीं पाते, लेकिन अगले दिन पूरी ऊर्जा के साथ काम करते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नींद की कमी से व्यक्ति की स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जैसे थकान, कमजोरी या अन्य बीमारियां, लेकिन मोहन लाल द्विवेदी में ऐसा कुछ नहीं दिखता। उन्होंने विभिन्न अस्पतालों में जांच कराई, जिसमें ईसीजी, एमआरआई और अन्य टेस्ट शामिल थे, लेकिन सभी रिपोर्ट्स सामान्य आईं। डॉक्टरों ने उन्हें दवाएं दीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मोहन लाल द्विवेदी का कहना है कि वे बिना सोए भी स्वस्थ हैं और कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है। उनकी उम्र 75 वर्ष है, लेकिन वे पूरी तरह सक्रिय हैं और दैनिक कार्यों को आसानी से कर लेते हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा 1974 में पास की और सरकारी सेवा में प्रवेश किया, जहां उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लेखन और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। उनकी यह स्थिति चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए एक रहस्य बनी हुई है, और कई डॉक्टर उन्हें अध्ययन के लिए आमंत्रित करते हैं। मोहन लाल द्विवेदी ने कहा कि वे इस स्थिति से परेशान नहीं हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।

रीवा जिले में मोहन लाल द्विवेदी की यह अनोखी स्थिति स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय है। उन्होंने बताया कि 1973 से वे एक भी पल गहरी नींद नहीं सोए, फिर भी उनकी तबीयत बिल्कुल दुरुस्त है। चिकित्सा विज्ञान के नियमों को चुनौती देते हुए वे बिना सोए पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों ने उनकी जांच की, लेकिन कोई बीमारी नहीं पाई। मोहन लाल द्विवेदी ने दिल्ली और मुंबई में इलाज कराया, लेकिन सब डॉक्टर हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि नींद न आने का कारण उन्हें खुद भी नहीं पता, लेकिन वे इससे प्रभावित नहीं हैं। उनकी दिनचर्या में रात में जागना और दिन में काम करना शामिल है। उन्होंने 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर के पद से रिटायरमेंट लिया, और उसके बाद भी वे सक्रिय हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बिना नींद के इतने लंबे समय तक जीना असंभव है, लेकिन मोहन लाल द्विवेदी इसका जीवित उदाहरण हैं। उनकी उम्र 75 वर्ष है, लेकिन वे ऊर्जावान हैं और कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है। कई लोग उनकी स्थिति पर अध्ययन करना चाहते हैं, लेकिन वे सामान्य जीवन जीना पसंद करते हैं।

मोहन लाल द्विवेदी की स्थिति चिकित्सा विज्ञान के लिए एक पहेली है, जहां वे 50 वर्षों से बिना सोए जी रहे हैं। उन्होंने 1973 में व्याख्याता बनने के बाद से नींद न आने की समस्या का सामना किया, लेकिन इससे उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। डॉक्टरों ने विभिन्न जांचें कीं, लेकिन सब कुछ सामान्य पाया। मोहन लाल द्विवेदी ने कहा कि वे रात में जागते रहते हैं और किताबें पढ़ते हैं। उनकी सेवानिवृत्ति 2001 में हुई, और वे मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नींद की कमी से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है, लेकिन मोहन लाल द्विवेदी स्वस्थ हैं। उन्होंने इलाज के लिए विभिन्न शहरों का दौरा किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। उनकी उम्र 75 वर्ष है, और वे पूरी तरह सक्रिय हैं। यह स्थिति डॉक्टरों को हैरान कर रही है। मोहन लाल द्विवेदी ने दावा किया कि 1974 में एमपीपीएससी पास करने के बाद से वे बिना सोए काम करते रहे। उनकी स्थिति 1973 से शुरू हुई, और वे आज भी स्वस्थ हैं। डॉक्टरों ने जांच की, लेकिन कोई कारण नहीं मिला। मोहन लाल द्विवेदी चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहते हैं। उनकी उम्र 75 वर्ष है। रीवा के मोहन लाल द्विवेदी 50 साल से नहीं सोए, फिर भी स्वस्थ हैं। उन्होंने व्याख्याता से ज्वाइंट कलेक्टर तक का सफर तय किया। डॉक्टर हैरान हैं।

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