बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति गठबंधन की जीत से ठाकरे परिवार का मुंबई पर 28 वर्ष पुराना कब्जा समाप्त हो गया। 

बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 के परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है, जहां बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन

By INA News Desk
Jan 17, 2026 - 17:47
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बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति गठबंधन की जीत से ठाकरे परिवार का मुंबई पर 28 वर्ष पुराना कब्जा समाप्त हो गया। 
बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति गठबंधन की जीत से ठाकरे परिवार का मुंबई पर 28 वर्ष पुराना कब्जा समाप्त हो गया। 
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  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी ने 65 सीटें जीतीं जबकि बीजेपी-शिंदे सेना गठबंधन ने 118 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया
  • बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना की विरासत पर असर, मुंबई नगर निगम में महायुति ने विपक्ष को पीछे छोड़ा

बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 के परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है, जहां बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया और ठाकरे परिवार का मुंबई पर दशकों पुराना नियंत्रण समाप्त हो गया। कुल 227 वार्डों में से बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें प्राप्त कीं, जो बहुमत के 114 के आंकड़े से ऊपर है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी को 65 सीटें मिलीं, जो 2017 के 84 से कम हैं, जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 6 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 24 सीटें और अन्य पार्टियों को शेष सीटें प्राप्त हुईं। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महायुति ने मुंबई के अलावा अन्य नगर निगमों में भी मजबूत प्रदर्शन किया, जहां बीजेपी ने कुल 1425 सीटें जीतीं। यह जीत ठाकरे परिवार के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना ने 1995 से मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण रखा था। चुनाव में मतदान प्रतिशत 52.94 रहा और मतगणना 16 जनवरी 2026 को पूरी हुई। महायुति ने विकास और युवा अपील पर जोर दिया, जबकि विपक्ष ने मराठी अस्मिता पर फोकस किया। परिणामों से स्पष्ट है कि ठाकरे चचेरे भाइयों उद्धव और राज का गठबंधन अपेक्षित सफलता नहीं पा सका।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी ने मुंबई में मराठी हृदय भूमि में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन समग्र रूप से महायुति से पीछे रह गई। दादर-माहिम, वर्ली, सेवरी, लालबाग-पारेल और वडाला के कुछ हिस्सों में शिवसेना यूबीटी-एमएनएस गठबंधन ने अधिकांश सीटें जीतीं, जबकि महायुति को इन क्षेत्रों में सीमित सफलता मिली। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 65 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा बनाए रखा, लेकिन बहुमत से दूर रही। राज ठाकरे की एमएनएस ने 6 सीटें जीतीं, जो उनके लिए निराशाजनक रहा। कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं और अन्य छोटी पार्टियां शेष में सिमट गईं। राज्य स्तर पर महायुति ने 29 नगर निगमों में से अधिकांश में बहुमत हासिल किया, जहां बीजेपी ने 1425 सीटें, शिंदे सेना ने 394 सीटें जीतीं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भी बीजेपी ने एनसीपी गुटों को पीछे छोड़ा। चुनाव आयोग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि ठाकरे परिवार ने मुंबई पर 25-28 वर्षों का नियंत्रण खो दिया। मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों में महायुति 110 से अधिक वार्डों में आगे थी, जो अंतिम परिणामों से मेल खाती है। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन आयोग ने उन्हें खारिज किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परिणामों को विकास की जीत बताया और कहा कि महायुति ने इतिहास रचा है। उन्होंने मुंबई में 118 सीटें जीतने को बीजेपी की बढ़ती ताकत का संकेत माना। एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह जीत महाराष्ट्र की जनता की है और विपक्ष के आरोपों का जवाब जनता ने दिया है। उद्धव ठाकरे ने परिणामों को स्वीकार किया लेकिन कहा कि उनकी पार्टी ने मराठी वोट बैंक बनाए रखा है। राज ठाकरे ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी और नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई दी। कांग्रेस ने राज्य स्तर पर 315 सीटें जीतीं लेकिन मुंबई में 24 पर सिमट गई। राहुल गांधी ने चुनाव में अमिट स्याही के मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना की। महायुति ने नवी मुंबई, पनवेल और जलगांव में भी जीत दर्ज की। परिणामों से ठाकरे चचेरे भाइयों का गठबंधन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका, जहां उद्धव और राज दो दशकों बाद एक साथ आए थे।

चुनाव परिणामों ने मुंबई की राजनीति में नए समीकरण बनाए, जहां महायुति ने ठाकरे परिवार की विरासत को चुनौती दी। शिवसेना यूबीटी ने 65 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति बनाए रखी, लेकिन सत्ता से दूर रही। एमएनएस का प्रदर्शन एकल अंक में रहा। महायुति ने मुंबई के अलावा राज्य के 2869 वार्डों में से अधिकांश जीते। बीजेपी ने 2017 के 82 से बढ़कर 89 सीटें जीतीं। शिंदे सेना ने 29 सीटों के साथ गठबंधन को मजबूती दी। विपक्षी महा विकास अघाड़ी को झटका लगा।

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