प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ रोका, भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन ने पैदल जाने का अनुरोध किया
प्रशासन के अनुरोध पर शंकराचार्य ने पैदल जाने की इच्छा जताई, लेकिन उनके समर्थकों और भक्तों ने इसका विरोध किया और जुलूस को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इससे पुलिसकर्मियों
- संगम नोज पर भारी भीड़ के बीच पुलिस ने शंकराचार्य के काफिले को रोका, समर्थकों से धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी
- मौनी अमावस्या स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ शंकराचार्य का जुलूस रुकवाया, पुलिस अनुरोध पर समर्थकों ने किया विरोध और धक्का-मुक्की हुई
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। संगम नोज पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे, जिससे क्षेत्र में दबाव बढ़ गया। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ जुलूस संगम तट की ओर बढ़ रहा था, लेकिन प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के कारण इसे रोक दिया। पुलिस ने शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन उनके समर्थकों ने विरोध किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और धक्का-मुक्की की घटना हुई।
माघ मेला 2026 में मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची, जहां सुबह 8 बजे तक करीब 1.3 करोड़ लोगों ने स्नान किया। मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया था, ताकि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसी दौरान ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान के लिए रथ जुलूस के साथ पहुंचे। प्रशासन ने भीड़ के दबाव को देखते हुए उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया और रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया। अधिकारियों ने कहा कि अनुमति के बिना रथ से जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और सुरक्षा व्यवस्था के तहत यह कदम उठाया गया है।
प्रशासन के अनुरोध पर शंकराचार्य ने पैदल जाने की इच्छा जताई, लेकिन उनके समर्थकों और भक्तों ने इसका विरोध किया और जुलूस को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इससे पुलिसकर्मियों और समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच झड़प जैसी स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समर्थकों को पीछे धकेला। इस दौरान कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया गया। मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, जो श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित कर रहे थे।
घटना के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया। उनका जुलूस रुका हुआ रहा और पुलिस तथा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद होकर स्थिति संभालने में लगे रहे। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके संतों और शिष्यों पर हमला किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए की गई है। मेला क्षेत्र में भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ 800 हेक्टेयर में फैला मेला सात सेक्टरों में विभाजित है और 12,100 फुट लंबे घाट बनाए गए हैं।
मौनी अमावस्या माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व है, जहां 3.5 से 4 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था। प्रशासन ने 8-स्तरीय सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन योजना लागू की थी। घटना के दौरान पुष्प वर्षा भी की गई, लेकिन विवाद ने माहौल प्रभावित किया। पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारी शंकराचार्य को मनाने में लगे रहे। स्थिति पर काबू पाने के प्रयास जारी रहे और मीडिया कर्मियों को सुरक्षा के नाम पर हटाया गया।
यह घटना मेला क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को दर्शाती है, जहां लाखों श्रद्धालु एक साथ इकट्ठा होते हैं। प्रशासन ने पहले से ही मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन बनाया था और वाहनों की एंट्री पर रोक लगाई थी। समर्थकों की संख्या बढ़ने से स्थिति और जटिल हो गई। पुलिस ने समर्थकों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे धक्का-मुक्की हुई। शंकराचार्य का जुलूस अभी भी रुका हुआ था और अधिकारी मौके पर मौजूद थे।
माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान पर्व के दौरान यह विवाद प्रमुखता से सामने आया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए आवश्यक थी। शंकराचार्य ने स्नान से इनकार किया और आरोप लगाए कि संतों को मारा जा रहा है। स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रहे। मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को निर्देश दिए कि पैदल मार्गों का उपयोग करें।
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