Moradabad: मुरादाबाद नगर निगम में भ्रष्टाचार का बोलबाला: घटिया सड़क निर्माण और टेंडर में अनियमितताओं के गंभीर आरोप।
नगर निगम में इन दिनों निगम के आला अफसर निर्माण कार्य को लेकर संदेह के घेरे में आ गए हैं महानगर में जगह जगह आला अफसरों
मुरादाबाद। नगर निगम में इन दिनों निगम के आला अफसर निर्माण कार्य को लेकर संदेह के घेरे में आ गए हैं महानगर में जगह जगह आला अफसरों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर पूर्व में घटिया निर्माण हो चुके हैं यही वजह है प्रशासन के बड़े अफसरों द्वारा निगम के अधिकारियों पर शिकायतों के बावजूद भी नकेल न कसने के कारण घटिया निर्माणों का सिलसिला लगातार जारी है।
मिली जानकारी के अनुसार महानगर के कई पाॅश इलाके रामगंगा विहार,दीन दयाल नगर, नवीन नगर, आशियाना बुद्धि बिहार महानगर के भीतरी इलाकों में जगह जगह निगम के आला अफसरों के संरक्षण में निगम के कई राजनीतिक प्रभाव शाली ठेकेदारों ने निगम के निर्माण कार्यों के बड़े बड़े ठेके लेकर घटिया निर्माण कार्य किए हैं रामगंगा विहार, दीन दयाल नगर, आदि बड़े इलाकों में अपने को मेयर का खासम खास बताने वाले इस ठेकेदार ने प्राधिकरण की कालोनियों में निगम के अफसरों से मेनेज सिस्टम के चलते सड़कों के निर्माण कार्यों के ठेके हासिल कर बड़े पैमाने पर सड़कों का घटिया निर्माण किया है इस ठेकेदार ने प्राधिकरण की कालोनियों में जो सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी उन पर देर रात्रि को जगह जगह कोलतार का छिड़काव किया है खास बात यह भी है कि इन सड़कों पर नियमानुसार न तो पुरानी सड़कों को उखाड़ा गया न ही उन पर पत्थर डाला गया न ही रोड रोलर चलाया गया।
इसके अलावा जागरूक नागरिक बताते हैं कि कालोनियों में जो सड़कें सीसी टाइल्स अथवा आर सी द्वारा बनी हुई थी ऐसी सड़कों को भी निगम के अभियंताओं ने मोटे कमीशन के लालच में ठेकेदार से कोलतार की सड़कें बिछवा दी और यह भी देखने की बात है दो तीन महीने पूर्व बनी सड़कें घटिया निर्माण के चलते अभी से उखड़ने लगी हैं नाम न लिखने की शर्त पर कुछ भाजपा नेताओं ने बताया इस समय नगर निगम में भ्रष्ट आला अफसरों और ठेकेदारों का एक सिंडीकेट काम कर रहा है जो ठेकेदार ईमानदारी से निर्माण कार्य करते हैं उनको ये सिंडीकेट निर्माण कार्य के ठेके नहीं देता है नगर निगम के भ्रष्टाचार में लिप्त इन बड़े अफसरों का एक और कारनामा प्रकाश में आया है सूत्रों से जानकारी मिली है कि नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने टैंडर मेनेज कराने की नियत से बिना किसी शासनादेश के कुछ समय पहले एक फरमान जारी किया था कि वो ही ठेकेदार टैंडर डाल सकेगा जो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एन ए बी एल लैब का सर्टिफिकेट निगम की साइड पर लोड करेगा वह ही निगम के ठेके लेने के लिए पात्र होगा जो यह प्रमाण पत्र निगम की साइड पर उपलब्ध नहीं करा पायेगा तो उसको किसी भी दशा में टैंडर प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं होगा।
निगम में काम न मिलने की वजह से कुछ ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया एन ए बी एल लैब के प्रमाण पत्र के पीछे निगम के बड़े अधिकारी एक नया तरीके का मोटा खेल खेल रहे हैं और अपने निजी स्वार्थों के चलते निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं बताया गया है कि निगम के अधिकारियों ने निगम के निर्माण टैंडरो के लिए एक और दूसरी शर्त भी लगाई थी कि जिन ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके मिलेंगे उन्हें ईपीएफ प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा मगर बताया जाता है कि निगम ने करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत करा चुका है मगर आजतक इन ठेकेदारों ने शर्त पूरी नहीं की है बावजूद इसके उन्हें निगम बड़े पैमाने पर भुगतान कर चुका है।
इस प्रकार से निगम के आला अफसरों ने मोटे कमीशन का खेल खेलते हुए अपने बनाए हुए नियमों को ही तोड़ दिया है इसके अलावा निर्माण सामग्री की जांच निगम ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त एन ए बी एल लैब से कराने की बात कही थी मगर अब महानगर में जगह जगह मानकों के विपरीत घटिया सीसी टाइल्स लगाई जा रही है फिर भी निगम के अधिकारी निर्माण सामाग्री की जांच भुगतान से पूर्व एन ए बी एल लैब से न कराकर पीडब्ल्यूडी से करा रहें हैं। निगम के अफसरों की इन कारगुजारियों से उनकी कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुरादाबाद महानगर की कई सामाजिक संस्थाओं ने भी मंडलायुक्त से निगम के निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच टीम गठित करके कराने की मांग की है।
Also Read- Lucknow : पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा को हरी झंडी दिखाई
What's Your Reaction?









