Sitapur : मौनी अमावस्या पर कड़कड़ाती ठंड में भी लाखों श्रद्धालु नैमिषारण्य में लगाई गोमती की पवित्र डुबकी
एक दिन पहले से ही श्रद्धालु आना शुरू हो गए थे और चौदस की रात तक आना-जाना लगा रहा। वे इष्ट गुरु के आश्रम, धर्मशाला या परिचितों के यहां रुकते हैं और सुबह होते ही घा
रिपोर्ट - सुरेन्द्र मोठी INA NEWS नीमसार
माघ माह की मौनी अमावस्या के पावन मौके पर कड़कड़ाती ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु नैमिषारण्य धाम पहुंचे। भोर होते ही राजघाट और देवदेवेश्वर घाटों पर शुभ मुहूर्त में लोगों ने गोमती नदी में स्नान किया। स्नान का सिलसिला सुबह चार बजे से शाम पांच बजे तक जारी रहा।
एक दिन पहले से ही श्रद्धालु आना शुरू हो गए थे और चौदस की रात तक आना-जाना लगा रहा। वे इष्ट गुरु के आश्रम, धर्मशाला या परिचितों के यहां रुकते हैं और सुबह होते ही घाटों पर पहुंच जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार हर अमावस्या पर भीड़ रहती है लेकिन माघ माह की मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान करने से उत्तम पुण्य और यश मिलता है इसलिए तीर्थ में इतनी बड़ी भीड़ जुटती है।
जनश्रुति के अनुसार नैमिषारण्य को नाभि गया भी कहा जाता है जो भगवान विष्णु का प्रिय स्थान है। यहां अमावस्या पर स्नान और पितरों का तर्पण करने से पितृदोष दूर होता है तथा परिवार के दुख समाप्त होते हैं। विभिन्न राज्यों जैसे उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बरेली आदि जिलों से साथ ही नेपाल और बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोग आए। घाटों पर जय श्री राम, हर हर महादेव, हर हर गंगे के जयकारे गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं ने गोमती में स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया। स्नान के बाद मां ललिता देवी मंदिर में पूजन-अर्चन और दर्शन किए। फिर भूतेश्वर नाथ, सुतगद्दी, व्यासगद्दी, हनुमानगढ़ी, पांच पांडव किला, खाटू श्याम मंदिर, बालाजी, त्रिशक्ति धाम कालीपीठ आदि मंदिरों के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति की कामना की। दर्शन के बाद स्थानीय दुकानों से पूजन सामग्री, प्रसाद और बच्चों के लिए खिलौने खरीदे। भारी भीड़ से मुख्य मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बनी और सैकड़ों वाहन जाम में फंसे दिखे।
सुरक्षा के लिए चौदस की रात से पुलिस बल मुस्तैद रहा। मुख्य जगहों पर अलाव जलाकर ठंड से बचाव की व्यवस्था की गई। घाटों पर पीएससी बल, गोताखोर टीमें और नैमिषारण्य थाना पुलिस तैनात रही। मान्यता है कि इस दिन गोमती में स्नान, तीर्थ पुरोहितों को दान और गरीबों को दक्षिणा देने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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