'जब तक सेलेक्शन नहीं, तब तक शादी नहीं' बुंदेलखंड की बेटी मयंका चौरसिया ने 8 बार मेन्स देकर DSP का सपना पूरा किया
मयंका ने कुल 8 बार मेन्स परीक्षा दी। कई प्रयासों में वे इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। 2019, 2020 और 2022 में वे इंटरव्यू स्टेज तक पहुंचीं लेकिन च
मध्य प्रदेश की छतरपुर जिले की लवकुश नगर निवासी मयंका चौरसिया की सफलता की कहानी मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उन्होंने MPPSC राज्य सेवा परीक्षा में DSP पद पर चयनित होने के लिए वर्षों तक लगातार प्रयास किए। मयंका ने 2016 में पहली बार MPPSC स्टेट सर्विस एग्जाम में हिस्सा लिया। उस वर्ष उनकी पहली कोशिश में प्रीलिम्स क्लियर हो गया लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने इंदौर में रहकर सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी जारी रखी।
मयंका ने कुल 8 बार मेन्स परीक्षा दी। कई प्रयासों में वे इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। 2019, 2020 और 2022 में वे इंटरव्यू स्टेज तक पहुंचीं लेकिन चयन नहीं हो सका। 10 साल की लंबी तैयारी के दौरान कई बार निराशा हाथ लगी। 8 बार मेन्स देने के बाद भी सफलता न मिलने पर मयंका ने खुद से वादा किया कि जब तक उनका सेलेक्शन नहीं हो जाता तब तक वे शादी नहीं करेंगी। यह संकल्प उनकी तैयारी को और मजबूत करने वाला बना।
उनके परिवार ने इस दौरान पूरा सहयोग दिया। परिवार के समर्थन से मयंका ने हिम्मत नहीं हारी। 2023 में उन्होंने फिर से परीक्षा दी। इस बार भी वे इंटरव्यू तक पहुंचीं और अंत में DSP पद पर चयनित हुईं। MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2023 के परिणाम में उनका नाम DSP पद के लिए आया। यह सफलता 10 साल की लगन और अटूट धैर्य का परिणाम थी।
मयंका का जन्म छतरपुर जिले के लवकुश नगर में हुआ। बुंदेलखंड क्षेत्र से होने के कारण उनकी पृष्ठभूमि में संसाधनों की कमी थी लेकिन उन्होंने इसे चुनौती नहीं माना। तैयारी के दौरान उन्होंने इंदौर में रहकर पढ़ाई की। सेल्फ स्टडी पर फोकस किया और लगातार प्रयास जारी रखे। उनकी सफलता का राज लगातार मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ रहा।
DSP बनने के बाद मयंका ने अपनी यात्रा को साझा किया। उन्होंने बताया कि असफलताओं के बावजूद हार न मानना और संकल्प पर अटल रहना महत्वपूर्ण था। 8 बार मेन्स देने की प्रक्रिया ने उन्हें और मजबूत बनाया। उनका यह वादा कि सेलेक्शन तक शादी नहीं करेंगी, उनकी दृढ़ता को दर्शाता है। यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं। MPPSC जैसी परीक्षाओं में कई बार प्रयास करने पड़ते हैं। मयंका की सफलता दिखाती है कि निरंतर प्रयास से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। छतरपुर जिले की इस बेटी ने बुंदेलखंड की माटी से निकलकर DSP की वर्दी पहनी।
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