नासा का मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम रद्द: पर्सेवरेंस रोवर के संभावित जीवन के सबूतों वाले नमूने मंगल पर ही रह जाएंगे, चीन मंगल पर ढूंढेगा जीवन

नासा ने 2025 में दो वैकल्पिक प्लान प्रस्तावित किए थे जिसमें स्काई क्रेन लैंडिंग या कमर्शियल विकल्प शामिल थे। इनसे लागत 6 से 7 अरब डॉलर तक कम होने की उम्मी

Jan 18, 2026 - 23:14
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नासा का मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम रद्द: पर्सेवरेंस रोवर के संभावित जीवन के सबूतों वाले नमूने मंगल पर ही रह जाएंगे, चीन मंगल पर ढूंढेगा जीवन
नासा का मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम रद्द: पर्सेवरेंस रोवर के संभावित जीवन के सबूतों वाले नमूने मंगल पर ही रह जाएंगे, चीन मंगल पर ढूंढेगा जीवन

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम को प्रभावी रूप से रद्द कर दिया गया है। यह कार्यक्रम पर्सेवरेंस रोवर द्वारा एकत्र किए गए मंगल ग्रह के नमूनों को पृथ्वी पर लाने के लिए था। इन नमूनों में प्राचीन जीवन के संकेत हो सकते थे। कार्यक्रम की रद्दीकरण की वजह बजट की कमी और लागत में भारी वृद्धि है। अमेरिकी कांग्रेस ने हाल ही में एक खर्च बिल पारित किया है जिसमें नासा को कुल 24.4 अरब डॉलर आवंटित किए गए हैं लेकिन मौजूदा मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम के लिए फंडिंग नहीं दी गई है।

यह निर्णय जनवरी 2026 में लिया गया जब कांग्रेस ने व्हाइट हाउस के प्रस्तावित बजट में से अधिकांश कटौतियों को अस्वीकार कर दिया लेकिन मार्स सैंपल रिटर्न को अपवाद बनाया। बिल में कहा गया है कि मौजूदा मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम का समर्थन नहीं किया जाता। हालांकि कुछ तकनीकों जैसे रडार, स्पेक्ट्रोस्कोपी, एंट्री डिसेंट एंड लैंडिंग सिस्टम और अन्य पूर्ववर्ती तकनीकों के लिए 110 मिलियन डॉलर मंगल फ्यूचर मिशन्स के तहत दिए गए हैं। यह फंडिंग भविष्य के मंगल मिशनों और मानव अन्वेषण के लिए उपयोगी होगी।

पर्सेवरेंस रोवर ने जेज़ेरो क्रेटर में 33 से अधिक नमूने एकत्र किए हैं जिनमें चट्टानें और मिट्टी शामिल हैं। इनमें से एक नमूना चेयावा फॉल्स नामक चट्टान से लिया गया था जिसे नासा ने मंगल पर अब तक का सबसे स्पष्ट संभावित जीवन का संकेत माना था। इस नमूने में संभावित बायोसिग्नेचर जैसे लेपर्ड स्पॉट्स पाए गए थे। वैज्ञानिकों का मानना था कि ये नमूने पृथ्वी पर लाकर विस्तृत जांच से मंगल पर प्राचीन जीवन की पुष्टि हो सकती थी।

प्रोग्राम की शुरुआत 2020 के मार्स 2020 मिशन से हुई थी जिसमें पर्सेवरेंस रोवर को लॉन्च किया गया। रोवर ने 2021 में लैंडिंग की और नमूने एकत्र करना शुरू किया। मूल योजना में नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर सैंपल रिट्रीवल लैंडर, मार्स एसेंट व्हीकल और अर्थ रिटर्न ऑर्बिटर भेजना था। नमूने 2030 के दशक में पृथ्वी पर लौटने थे लेकिन लागत 11 अरब डॉलर तक पहुंच गई और समयसीमा 2040 तक खिसक गई।

नासा ने 2025 में दो वैकल्पिक प्लान प्रस्तावित किए थे जिसमें स्काई क्रेन लैंडिंग या कमर्शियल विकल्प शामिल थे। इनसे लागत 6 से 7 अरब डॉलर तक कम होने की उम्मीद थी। निर्णय 2026 के दूसरे भाग में लेना था लेकिन बजट बिल ने मौजूदा प्रोग्राम को समाप्त कर दिया। अब नमूने मंगल पर ही रहेंगे क्योंकि कोई रिट्रीवल मिशन नहीं है।

यह फैसला वैज्ञानिक समुदाय के लिए झटका है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि ये नमूने सौर मंडल में जीवन की समझ को बदल सकते थे। पर्सेवरेंस रोवर अब भी मंगल पर काम कर रहा है और विज्ञान कार्य जारी रख रहा है लेकिन सैंपल रिटर्न का कोई प्लान नहीं है।

इस रद्दीकरण के बाद मंगल पर जीवन के सबूत ढूंढने का मिशन चीन के लिए अकेला रह गया है। चीन ने तियानवेन-3 मिशन की योजना बनाई है जो 2028 में लॉन्च होगा। यह मिशन 2031 तक मंगल से नमूने पृथ्वी पर लाने का लक्ष्य रखता है। तियानवेन-3 में दो लॉन्च होंगे जिसमें एक ऑर्बिटर और रिटर्न व्हीकल तथा दूसरा लैंडर और एसेंट व्हीकल।

चीन का मिशन सरल होगा और सतह से ग्रैब-एंड-गो तरीके से नमूने एकत्र करेगा। यह पर्सेवरेंस के जैसे लक्षित नमूने नहीं होंगे लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण होंगे। चीन ने पहले चांग'ई-5 मिशन से चंद्रमा से नमूने सफलतापूर्वक लौटाए थे। तियानवेन-3 से चीन पहला देश बन सकता है जो मंगल से नमूने लौटाएगा।

नासा के प्रोग्राम रद्द होने से अमेरिका की स्पेस लीडरशिप पर सवाल उठे हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि ये नमूने मानव मंगल मिशन के लिए भी महत्वपूर्ण थे। अब तकनीकों को भविष्य के मिशनों में उपयोग किया जाएगा। पर्सेवरेंस के नमूने अभी भी रोवर पर या बैकअप डिपो में सुरक्षित हैं लेकिन वापसी की कोई योजना नहीं है।

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