Lakhimpur : लखीमपुर खीरी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती पर एमबीबीएस छात्रों को मिली प्रेरणा
कार्यक्रम में बताया गया कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन मेडिकल छात्रों के लिए मानव सेवा, निस्वार्थ कर्म, दृढ़ संकल्प और एकाग्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। उनके प्रसिद्ध संदेश "उठो,
लखीमपुर खीरी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन मेडिकल छात्रों के लिए मानव सेवा, निस्वार्थ कर्म, दृढ़ संकल्प और एकाग्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। उनके प्रसिद्ध संदेश "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक नहीं रुकना" को चिकित्सा जीवन से जोड़कर समझाया गया। कहा गया कि एक डॉक्टर को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहकर रोगियों की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि हर कर्तव्य पवित्र होता है।
इस मौके पर ध्यान और आत्मनियंत्रण के महत्व पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि ये दोनों चीजें तनाव कम करने में मदद करती हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र में बहुत जरूरी है। स्वामी विवेकानंद ने मानवता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया और कहा कि सेवा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि रोज के काम में दिखनी चाहिए। कार्यक्रम में यह बात विशेष रूप से कही गई कि एक चिकित्सक के लिए रोगियों की सेवा सबसे बड़ा कर्तव्य है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। साथ ही स्वामीजी द्वारा शारीरिक विकास पर दिए गए महत्व को भी बताया गया, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और मजबूत आत्मा रहती है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मेडिकल छात्रों को अपने काम को पूरी निष्ठा, सेवा भाव और समर्पण से करना चाहिए। उन्हें खुद को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए और लक्ष्य पर एकाग्र रहना चाहिए, क्योंकि हर काम में दिव्यता छिपी होती है।
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