Lakhimpur : लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में हिंसक जंगली जानवरों के लिए वरदान बन रहा कृषि क्षेत्र
वन विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से पिंजड़ा लगाने तक सीमित रहती है। तराई क्षेत्र इन जानवरों के लिए वरदान साबित हो रहा है क्योंकि यहां कृषि भूमि पर गन्ना, केला, गेहूं, धान
लखीमपुर खीरी जिले में घाघरा और शारदा नदियों के बीच स्थित पलिया निघासन और धौरहरा तहसीलों का इलाका दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से जुड़ा हुआ है। यहां वन रेंज धौरहरा के आसपास करीब दो दर्जन से अधिक हिंसक जंगली जानवर जैसे बाघ और तेंदुए जंगलों से निकलकर डेरा डाल चुके हैं। ये जानवर कभी-कभी आम लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं और दर्शन देते रहते हैं।
वन विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से पिंजड़ा लगाने तक सीमित रहती है। तराई क्षेत्र इन जानवरों के लिए वरदान साबित हो रहा है क्योंकि यहां कृषि भूमि पर गन्ना, केला, गेहूं, धान, उरद, मसूर और सब्जियों की भारी मात्रा में खेती होती है। नदियों का कछार, बहते नाले और घने गन्ना-केला के खेत इनके लिए छिपने और शिकार करने की अच्छी जगह बन जाते हैं।
हालांकि, इन हिंसक जानवरों के हमलों से कभी-कभार लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन पीड़ित परिवार को केवल सहायता राशि देकर मामला संभाल लेता है। क्षेत्र में मनुष्य-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां बाघ और तेंदुए खेतों में घुसकर हमला करते हैं।
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