Lakhimpur- Kheri : नई श्रम संहिताओं के खिलाफ मेडिकल सेल्स प्रतिनिधियों में आक्रोश, काला दिवस मनाने की घोषणा

FMRAI से जुड़े UPMSRA ने आरोप लगाया कि इन संहिताओं का असली मकसद बड़े व्यापारिक घरानों को फायदा पहुंचाना है। इससे करोड़ों मजदूरों की सुरक्षा, नौकरी

Nov 24, 2025 - 22:45
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Lakhimpur- Kheri : नई श्रम संहिताओं के खिलाफ मेडिकल सेल्स प्रतिनिधियों में आक्रोश, काला दिवस मनाने की घोषणा
Lakhimpur- Kheri : नई श्रम संहिताओं के खिलाफ मेडिकल सेल्स प्रतिनिधियों में आक्रोश, काला दिवस मनाने की घोषणा

केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं को लागू करने के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मेडिकल सेल्स प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन (UPMSRA) ने इसे मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि श्रम सुधार के नाम पर मेहनतकश वर्ग को कॉर्पोरेट हितों के आगे मजबूर किया जा रहा है।

FMRAI से जुड़े UPMSRA ने आरोप लगाया कि इन संहिताओं का असली मकसद बड़े व्यापारिक घरानों को फायदा पहुंचाना है। इससे करोड़ों मजदूरों की सुरक्षा, नौकरी की शर्तें और अधिकार कमजोर पड़ जाएंगे। एसोसिएशन ने कहा कि लागू होने से सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉयी (कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट 1976 समेत कई पुराने श्रम कानून समाप्त हो गए हैं, जिससे कर्मचारियों को कानूनी मदद से वंचित कर दिया गया है।

UPMSRA ने सरकार पर मजदूरों के खिलाफ दमनकारी रवैया अपनाने का इल्जाम लगाया। संगठन के मुताबिक, नई संहिताएं कार्यस्थलों पर मनमानी, शोषण और असुरक्षा को बढ़ावा देंगी। सरकार ने व्यापार आसान बनाने के बहाने श्रमिकों की आवाज दबाई है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है और श्रमिक आंदोलन को तोड़ने की चाल है।

विरोध को मजबूत करने के लिए UPMSRA ने ऐलान किया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी सेल्स प्रमोशन कर्मचारी काला दिवस मनाएंगे। इस दौरान दोनों राज्यों के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन होंगे। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के जरिए भेजा जाएगा।

दूसरी ओर, श्रम संहिताओं और श्रम शक्ति नीति 2025 के खिलाफ देश स्तर पर भी बड़ा आंदोलन तेज हो रहा है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच, स्वतंत्र औद्योगिक फेडरेशन और संयुक्त किसान मोर्चा ने देशव्यापी विरोध दिवस मनाने का फैसला किया है।

UPMSRA ने देशभर के मेहनतकश लोगों, श्रमिक संगठनों और किसान मोर्चों से अपील की है कि वे मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट हों। मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष में हिस्सा लें और मजबूत आवाज बुलंद करें।

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