घर में गैस की किल्लत से परेशान पटनावासी: गुरुद्वारा पटना साहिब का लंगर बना जीवन रक्षक, 24 घंटे चल रही सुविधा।
पटना शहर में चल रही एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां घरों में खाना बनाना मुश्किल
- पश्चिम एशिया संकट का असर: एलपीजी की कमी में गुरुघर की भूमिका बनी महत्वपूर्ण
पटना शहर में चल रही एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है और कई परिवार भोजन की व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह समस्या पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पैदा हुई है, जिसमें ईरान, इजराइल और अमेरिका जैसे देशों की भागीदारी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है। पटना साहिब गुरुद्वारा, जो सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है, इस संकट में एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है। यहां का लंगर, जो लगभग 24 घंटे चलता है, हजारों लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा रहा है, जिसमें रोटी, दाल, सब्जी और चावल जैसी सादा लेकिन पौष्टिक व्यंजन शामिल हैं। गुरुद्वारा प्रबंधन ने सुनिश्चित किया है कि गैस की कमी के बावजूद सेवा में कोई रुकावट न आए, और वे वैकल्पिक ईंधन जैसे लकड़ी और अन्य स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं। हाल के अपडेट्स के अनुसार, 15 मार्च 2026 तक पटना जिला प्रशासन ने गैस की कालाबाजारी पर कार्रवाई की है, जिसमें चार एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन आम लोगों की समस्या बरकरार है। इस स्थिति में गुरुद्वारा की सेवा ने न केवल भोजन प्रदान किया बल्कि समुदाय में एकजुटता का संदेश भी दिया है, जहां अमीर-गरीब सभी एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। गुरुद्वारा में रोजाना औसतन 10,000 से ज्यादा लोग लंगर ग्रहण कर रहे हैं, जो सामान्य दिनों से काफी अधिक है।
एलपीजी की कमी की शुरुआत पश्चिम एशिया के संघर्ष से हुई, जहां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर बाधा ने भारत की गैस आयात को प्रभावित किया है। पटना में पिछले तीन-चार दिनों से लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सर्वर की समस्या या स्टॉक की कमी का हवाला देकर उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है। इस बीच, तख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा की लंगर सेवा ने लोगों को बड़ी राहत दी है, जहां सुबह 3:30 बजे से रात 8:30 बजे तक लगातार भोजन उपलब्ध रहता है, और सफाई के लिए थोड़े समय के अलावा यह सेवा निरंतर चलती है। गुरुद्वारा के सेवादारों ने बताया कि वे बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करते हैं, जिसमें रोजाना सैकड़ों किलो आटा, दाल और सब्जियां इस्तेमाल होती हैं। संकट के समय में गुरुद्वारा ने अपनी क्षमता बढ़ाई है, और स्थानीय समुदाय के स्वयंसेवी भी इसमें योगदान दे रहे हैं। अपडेट्स से पता चलता है कि 16 मार्च 2026 तक पटना में रेस्तरां और होटल बंद होने की कगार पर हैं, क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुक गई है, लेकिन गुरुद्वारा ने वैकल्पिक व्यवस्था से सेवा जारी रखी है। यह गुरुद्वारा न केवल धार्मिक महत्व का है बल्कि सामाजिक सेवा का प्रतीक भी, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्म की याद में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। लंगर की परंपरा सिख धर्म के मूल सिद्धांतों- समानता और सेवा- को जीवंत रखती है, और इस संकट में यह और ज्यादा प्रासंगिक हो गई है।
इनसेट: गुरुद्वारा का ऐतिहासिक महत्व तख्त श्री पटना साहिब सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 1666 में हुआ था। मुगल काल में बने इस गुरुद्वारे में संगमरमर की सुंदर नक्काशी है, और यहां रखे पवित्र हथियार और ग्रंथ श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। लंगर हॉल में हजारों लोग एक साथ बैठ सकते हैं।
पटना साहिब गुरुद्वारा की लंगर सेवा संकट के समय में एक मिसाल बन गई है, जहां प्रबंधन ने गैस की कमी को देखते हुए लकड़ी के चूल्हों और अन्य ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाया है। रोजाना सुबह से शाम तक चलने वाली इस सेवा में स्वयंसेवी भोजन तैयार करते हैं, जिसमें रोटियां मशीनों से बनाई जाती हैं और दाल-सब्जी बड़े बर्तनों में पकाई जाती है। अपडेट्स के अनुसार, गुरुद्वारा में 500 क्विंटल से ज्यादा लकड़ी का स्टॉक है, जो सुनिश्चित करता है कि सेवा बाधित न हो। पटना के स्थानीय निवासी, खासकर गरीब परिवार और मजदूर वर्ग, अब लंगर पर निर्भर हो गए हैं, क्योंकि घर में गैस न होने से चूल्हा जलाना मुश्किल है। गुरुद्वारा के प्रबंधक ने केंद्र सरकार से अपील की है कि धार्मिक स्थलों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जाए, जैसा कि दिल्ली और अमृतसर में देखा गया है। इस सेवा ने न केवल भोजन प्रदान किया बल्कि मानसिक शांति भी दी है, क्योंकि लोग यहां आकर अपनी समस्याएं साझा करते हैं। लंगर में कोई भेदभाव नहीं होता, और यह सिख धर्म की शिक्षाओं का जीवंत उदाहरण है।
संकट की इस घड़ी में पटना साहिब गुरुद्वारा ने अपनी क्षमता का विस्तार किया है, जहां सामान्य दिनों में 5,000-7,000 लोग लंगर ग्रहण करते थे, लेकिन अब यह संख्या दोगुनी हो गई है। प्रबंधन ने अतिरिक्त स्वयंसेवकों को लगाया है, जो भोजन की तैयारी से लेकर वितरण तक सब संभालते हैं। अपडेट्स बताते हैं कि 16 मार्च 2026 तक पटना में गैस की कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ी है, और हेल्पलाइन जारी की गई है, लेकिन सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा। गुरुद्वारा की सेवा ने स्थानीय प्रशासन को भी प्रेरित किया है, जो अब अन्य सामुदायिक रसोईयों को बढ़ावा दे रहा है। लंगर में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जहां ताजा सामग्री का उपयोग होता है और स्वच्छता के उच्च मानक अपनाए जाते हैं। यह सेवा न केवल पटना के निवासियों बल्कि आसपास के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए भी उपलब्ध है। गुरुद्वारा में लंगर सुबह 5 बजे से शुरू होता है, जहां मशीनें रोटियां बनाती हैं और बड़े बर्तनों में दाल पकाई जाती है। सफाई के लिए 2 घंटे का ब्रेक होता है, लेकिन चाय और अन्य स्नैक्स उपलब्ध रहते हैं। स्वयंसेवी दिन-रात काम करते हैं।
पटना साहिब गुरुद्वारा की इस सेवा ने सामाजिक एकता को मजबूत किया है, जहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग एक साथ भोजन करते हैं। संकट में यह गुरुघर एक प्रकाश स्तंभ की तरह खड़ा है, जो सिख धर्म की सेवा भावना को प्रदर्शित करता है। अपडेट्स से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने घरेलू गैस को प्राथमिकता दी है, लेकिन कमर्शियल सप्लाई प्रभावित है, जिससे रेस्तरां बंद हो रहे हैं। गुरुद्वारा ने अपनी स्टॉक प्रबंधन से सेवा जारी रखी है, और स्थानीय दानदाताओं ने सामग्री उपलब्ध कराई है। यह घटना दिखाती है कि कैसे धार्मिक संस्थाएं संकट में समाज का सहारा बन सकती हैं। इस पूरे संकट ने पटना के लोगों को वैकल्पिक तरीकों पर सोचने को मजबूर किया है, लेकिन गुरुद्वारा की सेवा ने तात्कालिक राहत प्रदान की है। अपडेट्स के मुताबिक, 16 मार्च 2026 तक स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल लंगर पर निर्भरता बनी हुई है। गुरुद्वारा प्रबंधन ने भविष्य के लिए और स्टॉक बढ़ाने की योजना बनाई है, ताकि ऐसी स्थिति में सेवा प्रभावित न हो। यह घटना समाज को एक संदेश देती है कि एकजुटता और सेवा से किसी भी संकट का मुकाबला किया जा सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने भारत की 80% एलपीजी आयात को प्रभावित किया है, जिससे घरेलू और कमर्शियल सप्लाई में कमी आई है। पटना में लोग इंडक्शन स्टोव की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन गरीब परिवारों के लिए लंगर ही विकल्प है।
What's Your Reaction?









