मध्यप्रदेश वन राज्य निगम: जंगलों में अतिक्रमण का बोलबाला, बादलपुर और पहाड़पुर में लापता कंपार्टमेंट, पक्के मकान और खेती का कब्जा।
वनविकास निगम की रामपुर भतोड़ि परियोजना मंडल में लगातार नए नए मामले सामने आ रहे है जिसको लेकर लगातार हमारे द्वारा ...
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश वनविकास निगम की रामपुर भतोड़ि परियोजना मंडल में लगातार नए नए मामले सामने आ रहे है जिसको लेकर लगातार हमारे द्वारा खबरें प्रकाशित कर उच्चाधिकारियों के संज्ञान में डाला भी जा रहा है पर डीएम की लापरवाही से जंगल तबाह और बर्बाद हो रहे है और डीएम कार्यवाही के लिए मौके पर जाने की बजाए अपने अधीनस्थों को बचाने में लगे हुए है ताजा मामला चोपना परिक्षेत्र से सामने आया है जहाँ बेड़ीढाना ,बादलपुर,पहाड़पुर अतिक्रमण कारियों के कब्जे में है जहाँ धड़ल्ले से ट्रेक्टर द्वारा जमीन की जुताई की जा रही है वहीं जंगल के बीच मे खेती हो रही है वहीं चौकीदार और रेंजर की मिलिभगत से तेजी से प्लान्टेशनो का सफाया करके और खेती का कार्य किया जा रहा है।
वहीं पक्के कॉम्पेक्स का निर्माण भी जंगल की जमीन पर 3 मंजिला कॉम्प्लेक्स तैयार करवाया गया है साथ ही इसी जमीन पर दुकाने गुमठी भी रखकर अतिक्रमण किया गया जिसकी शिकायत भी हो चुकी है पर आज तक संभागीय प्रबंधक और उप संभागीय प्रबंधक ने मौके पर जाकर नही देखा है जबकि इस पूरे मामले की जानकारी एमडी के संज्ञान में पहले भी लाई जा चुकी है पर जांच और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है जिसको देखकर लगता है इस पूरे भृष्टाचार के मामले में एमडी भी शामिल है और अपने अधिनस्थों को जंगल बेचने की खुली छूट दे रखी है बता दें इन प्लान्टेशनों के नाम पर लाखों रुपयों की बंदरबांट रेंजर और अधिकारियों के बीच हो रही है।
इसीलिए शिकायत के बावजूद न मौके की जांच की गई न ही कोई कार्यवाही दोषियों पर अब तक नही की गई और जंगलों के रक्षक ही भक्षक बनकर जंगलों को अतिक्रमण कारियों को बेच रहे है और शासन को लाखों का चूना लगाकर मौज उड़ा रहे है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस परिक्षेत्र में जितने भी रेंजर पदस्थ हुए है वो तो यहाँ से जाना ही नही चाहते थे क्योंकि मलाईदार जगह ये परिक्षेत्र ही है अगर इस पूरे भृष्टाचार की निष्पक्ष जांच की जाए तो पता चलेगा कि निगम के जंगलों के कंपार्टमेंट ही गायब है अधिकारी कार्यवाही के नाम पर पीओआर तो कर देते है पर उनकी रिपोर्ट डिवीज़न कार्यालय में जमा ही नही करते है और जिन प्लान्टेशनों के नाम पर पैसा निकल रहा है।
वह तो मौके पर है ही नही अब देखना यह होगा कि इस भृष्टाचार की जांच कब होती है क्या केंद्र सरकार को ही संज्ञान लेना होगा तभी इस भृष्टाचार की परत खुल सकती है खैर देखने वाली बात यह होगी कि कब इतने बड़े भृष्टाचार की निष्पक्ष जांच होती है और कोई कार्यवाही हो पाएगी और यह बात भी सामने आएगी की आज तक कितने हेक्टेयर का पीओआर किया गया या फिर इस पूरे भृष्टाचार को सामने लाने के लिए ई ओ डब्ल्यू को ही संज्ञान लेना होगा या निगम के जंगलों पर सिर्फ और सिर्फ अधिकारियों के संरक्षण में अतिक्रमण कारियों का ही कब्जा रहेगा ।
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