Sambhal : सम्भल में दिखा मुहर्रम का चांद, 1448 हिजरी साल का आगाज़; उलेमा ने अमन और भाईचारे के साथ जुलूस निकालने की अपील की
रूयत-ए-हिलाल कमेटी के सदस्य मौलाना वसी अशरफ ने बताया कि मुहर्रम की पहली तारीख से ही धार्मिक कार्यक्रमों और तकरीरों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम में नए साल की मुबारकबाद देना जायज है। लोग एक-दूसरे के लिए सेहत, सलामती, अमन, बरकत
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में रूयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक के बाद मुहर्रम का चांद नजर आने का ऐलान कर दिया गया। मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमलुल उलूम में आयोजित बैठक में उलेमा और मुफ्तीयान-ए-इकराम की मौजूदगी में यह घोषणा की गई कि इस्लामी नए साल 1448 हिजरी की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही 1447 हिजरी साल समाप्त हो गया है।
रूयत-ए-हिलाल कमेटी के सदस्य मौलाना वसी अशरफ ने बताया कि मुहर्रम की पहली तारीख से ही धार्मिक कार्यक्रमों और तकरीरों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम में नए साल की मुबारकबाद देना जायज है। लोग एक-दूसरे के लिए सेहत, सलामती, अमन, बरकत और खुशहाली की दुआ करते हुए नए साल की शुभकामनाएं दे सकते हैं। मौलाना वसी अशरफ ने जानकारी दी कि मुहर्रम की 7 तारीख को आलम का जुलूस निकाला जाएगा, जबकि 10 मुहर्रम यानी आशूरा का दिन इस बार जुमे के दिन पड़ेगा।
इसी दिन जुलूस, फातेहा और नियाज सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मुहर्रम के सभी जुलूस और कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और भाईचारे के माहौल में आयोजित किए जाएं, ताकि दुनिया को यह संदेश मिले कि हजरत इमाम हुसैन के मानने वाले अमन, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देने वाले हैं। मौलाना ने बताया कि मुहर्रम के दौरान रसूल-ए-पाक की सीरत, खुलफा-ए-राशिदीन की शिक्षाओं और कर्बला के वाकये पर बयान होंगे, जिनमें इमाम हुसैन की कुर्बानी और उसके संदेश से लोगों को रूबरू कराया जाएगा।
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