Baitul : चार साल से इंतजार, अब किसानों का अल्टीमेटम, मुआवजा नहीं तो मेढ़ा डेम नहीं भूख हड़ताल और जल सत्याग्रह की चेतावनी
किसान कह रहे हैं- सरकार ने वादा किया था, लेकिन निभाया नहीं।आक्रोशित किसानों का कहना है कि अब अगर उन्हें हक नहीं मिला तो आंदोलन उग्र होगा और त
10 दिनों में पैसा खाते डालने का किया विनम्र निवेदन, आगे किया जाएगा उग्र आंदोलन ,डेम के कार्य रुकवाया जाएगा
Report : शशांक सोनकपुरिया, बैतूल- मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के बैतूल से बड़ी खबर मेढ़ा डेम से प्रभावित किसान अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। चार साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे किसान अब कह रहे हैं।बस बहुत हो गया,अगर 10 दिन में पैसा नहीं आया तो भूख हड़ताल करेंगे, जल सत्याग्रह करेंगे और मेढ़ा डेम का काम भी रोक देंगे।ये तस्वीरें हैं बैतूल जिले के मेढ़ा डेम की… जहां डेम का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
लेकिन जिन किसानों की जमीनें गईं, जिनके घर-बार उजड़े, वे आज भी सिर्फ आश्वासनों पर जी रहे हैं। शासन ने 10 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का लेटर तो जारी किया। मगर पिछले चार साल से किसानों को एक भी रुपया नहीं मिला।इतना ही नहीं,घर और झोपड़ी ढहाने पर 50 हजार रुपये, 18 साल के हो चुके युवाओं के लिए 1 लाख 36 हजार रुपये और पहले किए गए 5 लाख रुपये देने का वादा भी अब तक अधूरा है।
किसान कह रहे हैं- सरकार ने वादा किया था, लेकिन निभाया नहीं।आक्रोशित किसानों का कहना है कि अब अगर उन्हें हक नहीं मिला तो आंदोलन उग्र होगा और तब तक चलेगा जब तक हर प्रभावित किसान के खाते में पूरी राशि जमा नहीं हो जाती।समाजसेवी निखिल विश्वकर्मा के नेतृत्व में किसानों का बड़ा जत्था कलेक्टर और एसपी ऑफिस पहुंचा। ज्ञापन सौंपा और साफ अल्टीमेटम देकर लौट गया।दस दिन में पैसा दो, वरना भूख हड़ताल भी होगी और ताप्ती किनारे जल सत्याग्रह भी।
ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत टेमुरनी की सरपंच कमलाबाई धाड़से के साथ दर्जनों किसान शामिल रहे। चैतराम धाड़से, रामराव, सुखराम, मुन्ना, रमेश, गानू, जोहर सिंह, काशीराम, संतु, मंगलू, चेतराम, रामजी, बालकिशन, दिनेश, रामकिशोर और दादूराम। यानी संदेश साफ है, मुआवजा दो, वरना मेढ़ा डेम का काम ठप होगा। किसानों का अल्टीमेटम प्रशासन और सरकार के लिए अब काउंटडाउन बन चुका हैं,दस दिन का वक्त है और उसके बाद बैतूल बनेगा भूख हड़ताल और जल सत्याग्रह का मैदान।
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