श्री बालाजी ज्ञान ज्योति संस्थान हल्लू सराय में हिंदी पर विचार गोष्ठी आयोजित, अध्यापिका अनीता श्रीवास्तव ने ने कहा- गर्व से कहो हम हिंदी भाषी हैं

विद्यालय के प्रबंधक दीपक शर्मा ने हिंदी पर अपने वक्तव्य में बच्चों को संबोधित करते हुए कहा आज अधिकांश लोग अपने सामान्य बोलचाल में अंग्रेज़ी भाषा के

By INA News Desk
Sep 14, 2025 - 14:45
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श्री बालाजी ज्ञान ज्योति संस्थान हल्लू सराय में हिंदी पर विचार गोष्ठी आयोजित, अध्यापिका अनीता श्रीवास्तव ने ने कहा- गर्व से कहो हम हिंदी भाषी हैं
श्री बालाजी ज्ञान ज्योति संस्थान हल्लू सराय में हिंदी पर विचार गोष्ठी आयोजित, अध्यापिका अनीता श्रीवास्तव ने ने कहा- गर्व से कहो हम हिंदी भाषी हैं
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श्री बालाजी ज्ञान ज्योति संस्थान हल्लू सराय में हिंदी दिवस से एक दिन पूर्व हिंदी पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। सर्वप्रथम विद्यालय के प्रबंधक दीपक शर्मा, प्रधानाचार्य विकास कुमार वर्मा समस्त स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ सहायक अध्यापिका अनीता श्रीवास्तव ने हिंदी दिवस पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को बताया कि हिन्दी दिवस हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार व उसके उपयोग के के लिए समर्पित एक दिवस है।हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को ही संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि हिन्दी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। चूंकि भारत मे अधिकतर क्षेत्रों में हिन्दी भाषा बोली जाती थी, इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया गया और 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। आगे उन्होंने कहा हम हिंदी भाषी हैं और हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए।विद्यालय के प्रबंधक दीपक शर्मा ने हिंदी पर अपने वक्तव्य में बच्चों को संबोधित करते हुए कहा आज अधिकांश लोग अपने सामान्य बोलचाल में अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों का उपयोग करते हैं या करना चाहते हैं। इससे हिंदी कुछ कमजोर हो सकती है। जिस प्रकार आज साधारण बोलचाल में, टेलीविजन से लेकर विद्यालयों तक और सामाजिक संचार माध्यम से लेकर निजी तकनीकी संस्थानों व कार्यालयों तक में अंग्रेजी का दबदबा कायम है। उससे लगता है कि अपनी मातृभाषा हिन्दी धीरे–धीरे क्षीण हो रही हैं।यदि हमने शीघ्र ही छोटे–छोटे प्रयासों द्वारा अपनी मातृभाषा हिन्दी को अपने जीवन में एक अनिवार्य स्थान नहीं दिया तो यह दूसरी भाषाओं से हो रही स्पर्धा में बहुत पीछे रह जायेगी। माना कि हमें वर्तमान समय को देखते हुए अन्य भाषाओं का भी ज्ञान होना चाहिए, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को प्रथम वरीयता देनी चाहिए। इस दौरान बच्चों ने भी हिंदी में गीत व कविताएं सुनाकर हिंदी को सशक्त भाषा बनाने में अपना योगदान दिया।अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान आकांक्षा ठाकुर, पायल ठाकुर, ज्योति,रुपाली, नंदनी, विशाखा ठाकुर ,तपस्या, अनीता श्रीवास्तव, विकास कुमार वर्मा आदि उपस्थित रहे।

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