MP News: रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल में एक और घोटाला उजागर- पीओआर के बाद सागौन से भरी बैलगाड़ी गायब, चोपना रेंज में कोई कार्यवाही नहीं। 

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मध्यप्रदेश वन राज्य निगम के जंगलों को लेकर अत्यधिक चिंताजनक स्थिति बनी हुई है जिसका कारण है कि जंगल ...

By INA News Desk
Jun 18, 2025 - 14:28
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MP News: रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल में एक और घोटाला उजागर- पीओआर के बाद सागौन से भरी बैलगाड़ी गायब, चोपना रेंज में कोई कार्यवाही नहीं। 
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रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मध्यप्रदेश वन राज्य निगम के जंगलों को लेकर अत्यधिक चिंताजनक स्थिति बनी हुई है जिसका कारण है कि जंगल के रक्षक ही भक्षक बनकर जंगलों को बेचने में लगे हुए है निगम की रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल के चोपना परिक्षेत्र से लगातार भृष्टाचार के मामले हमारे द्वारा खबरों के माध्यम से जिम्मदारों के संज्ञान में लाये जा रहे है जिसको लेकर जिम्मदार कार्यवाही और जांच करने के बजाए अधिनस्थों को बचाने में लग गए है मामला चोपना परिक्षेत्र की आमढाना बीट से सामने क्या जहाँ रेंजर द्वारा सागौन से भरी बैलगाड़ी जंगल से लाते हुए पकड़ी थी।

जिसके मामले में पीओआर भी किया गया था पर आरोपी सहित बैलगाड़ी को पीओआर करने के बाद छोड़ दिया जाना अपने कप में बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि उस वक्त रेंजर और डिप्टी रेंजर दोनों ने मिलकर बैलगाड़ी को पकड़ा था जो कि 2 दिन आम ढाना स्थित निगम के नाके में ही खड़ी रखी गई थी जिसका पीओआर भी फाड़ा गया था पर 2 दिन बाद आरोपियों के साथ साथ बैलगाड़ी को भी लंबे लेनदेन के बाद छोड़ दिया गया इस बात की जानकारी हमारे द्वारा डिवीज़न की सम्भागीय प्रबन्धक और एसडीओ को भी दी गई थी और भोपाल में बैठे एमडी को भी इस बात की जानकारी थी उसके बावजूद बिना किसी कार्यवाही के सांठगांठ और लंबा लेनदेन करके छोड़ दिया गया जिससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे मामले में बैतूल डिवीज़न से लेकर भोपाल में बैठे एमडी की मिलीभगत के चलते निगम में रेन्जरो के हौसले बुलंद है और बिना किसी के डर के खुला निगम में  भृष्टाचार का  खुला खेल खेला जा रहा है।

आपको बता दें कि इसके पूर्व में भी 2 साल पहले जंगल से एक ट्रेक्टर पूर्व  रेंजर द्वारा पकड़ा गया था पर सांठगांठ कर नगद 59000 रुपये किसान से लिये गए  और ट्रेक्टर को छोड़ दिया गया था जिसकी खबरें चलने के 6 माह बाद राशि डिवीज़न कार्यालय में जमा कराया गया था यहाँ एक बात और बताना चाहेंगे कि निगम में इसी तरह का भृष्टाचार व्याप्त है इसीलिए पुराने मामले भी उठाकर देखे जाएं तो साफतौर पर पता चलता है कि किसी भी भृष्टाचार के मामले में जांच और कार्यवाही करने की बजाए जिम्मदारों का ट्रांसफर कर दिया जाता है और आने वाले रेंजर को इसी तरह भृष्टाचार करने की खुली छूट दी जाती है।

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अब यह तो देखने वाली बात होगी कि जब पूरा निगम का महकमा ही इस पूरे भृष्टाचार में लिप्त है तो केंद्र  में बैठेअधिकारियों को ही अब इस मामले में संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करवानी होगी तभी लाखों करोड़ों के  भृष्टाचार की पोल खुल पाएगी।

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