MP News: चंबल की बेटी हिमानी तोमर ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर रचा इतिहास, अम्बाह और मुरैना को किया गौरवान्वित

हिमानी तोमर (Himani Tomar) मुरैना जिले के अम्बाह क्षेत्र के चांद का पुरा गांव की निवासी हैं। वह रिटायर्ड सूबेदार माधौ सिंह तोमर और सुमन तोमर की पुत्री हैं। उनके भाई ना...

May 26, 2025 - 21:58
 0  139
MP News: चंबल की बेटी हिमानी तोमर ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर रचा इतिहास, अम्बाह और मुरैना को किया गौरवान्वित

By INA News Madhya Pradesh.

सोमवार को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अम्बाह क्षेत्र के चांद का पुरा गांव की बेटी हिमानी तोमर (Himani Tomar) ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। हिमानी ने पुणे के प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC) से नर्सिंग में स्नातक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया और भारतीय सेना की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशंड हुईं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गांव के लिए, बल्कि पूरे चंबल अंचल के लिए गर्व का विषय है, जहां सैन्य क्षेत्र में अब तक पुरुषों का वर्चस्व रहा है। हिमानी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि चंबल की बेटियां भी साहस, समर्पण और मेहनत के बल पर देश सेवा में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं।

हिमानी तोमर (Himani Tomar) का परिचय

हिमानी तोमर (Himani Tomar) मुरैना जिले के अम्बाह क्षेत्र के चांद का पुरा गांव की निवासी हैं। वह रिटायर्ड सूबेदार माधौ सिंह तोमर और सुमन तोमर की पुत्री हैं। उनके भाई नायक विकास तोमर भी सेना में सेवारत हैं, और वह वात्सल्य स्कूल के संचालक राजकुमार तोमर की भतीजी हैं। हिमानी के परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है, और उनके पिता और भाई की तरह उन्होंने भी देश सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। हिमानी की इस उपलब्धि ने उनके परिवार की सैन्य परंपरा को और मजबूत किया है।

कमीशनिंग समारोह

हिमानी तोमर (Himani Tomar) को यह सम्मान 24 मई 2025 को पुणे के आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज में आयोजित 55वें कमीशनिंग समारोह में प्राप्त हुआ। यह भव्य समारोह कैप्टन देवाशीष शर्मा कीर्ति चक्र परेड ग्राउंड पर आयोजित किया गया, जो 1995 में जम्मू-कश्मीर में अपनी वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन देवाशीष शर्मा की स्मृति में नामित है। समारोह की अध्यक्षता AFMC के डायरेक्टर और कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल पंकज पी राव ने की, जिनके पास 38 वर्षों से अधिक का सैन्य और चिकित्सा क्षेत्र में अनुभव है।

Also Click: पटियाला हाउस कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को POCSO मामले में बरी किया, नाबालिग पहलवान ने वापस लिया यौन शोषण का आरोप

समारोह में 41 नर्सिंग कैडेट्स को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। इस दौरान कैडेट्स ने अपनी शानदार वर्दी में परेड ग्राउंड पर मार्च किया, और AFMC के प्रतीक चिह्न से सजे समारोही तोरण द्वार के नीचे से गुजरे। राष्ट्रीय ध्वज और सैन्य बैनरों ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। लेफ्टिनेंट जनरल राव ने अपने संबोधन में नव-कमीशंड अधिकारियों को उनकी कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया और समर्पण की सराहना की। उन्होंने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की गौरवशाली परंपरा को याद करते हुए कहा कि MNS ने 1888 से लेकर आज तक भारतीय सेना के चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने नर्सिंग अधिकारियों से "कर्तव्य और गरिमा" के साथ सेवा करने का आह्वान किया।

हिमानी की शैक्षिक यात्रा

हिमानी तोमर (Himani Tomar) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की और फिर भारतीय सेना के बीएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा के माध्यम से उन्हें पुणे के AFMC में चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला। AFMC भारत का एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जो अपनी उत्कृष्टता और अनुशासन के लिए जाना जाता है। इस संस्थान में नर्सिंग और चिकित्सा प्रशिक्षण अत्यंत कठिन और व्यापक होता है, जो कैडेट्स को न केवल तकनीकी कौशल प्रदान करता है, बल्कि सैन्य अनुशासन और नेतृत्व क्षमता भी विकसित करता है।

हिमानी ने इस चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण को पूरी मेहनत और लगन के साथ पूरा किया। AFMC में चार वर्षीय प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने, आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेने, और रोगियों की देखभाल में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें एक सक्षम और आत्मविश्वास से भरी नर्सिंग अधिकारी बनाया, जो अब भारतीय सेना में अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार हैं।

चंबल अंचल के लिए गर्व का क्षण

चंबल अंचल, जो लंबे समय से अपनी वीरता और सैन्य परंपराओं के लिए जाना जाता है, में हिमानी की उपलब्धि एक नए युग की शुरुआत है। इस क्षेत्र में अब तक सैन्य क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा रहा है, लेकिन हिमानी जैसे युवा महिला अधिकारियों के उदय ने यह साबित कर दिया कि बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं। हिमानी की इस उपलब्धि ने न केवल उनके गांव चांद का पुरा को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे मुरैना जिले और मध्य प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।हिमानी की कहानी उन युवतियों के लिए एक प्रेरणा है जो सैन्य क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं। उनकी मेहनत और समर्पण ने यह दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। चंबल जैसे क्षेत्र, जहां सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां अक्सर युवाओं के लिए बाधा बनती हैं, वहां हिमानी की सफलता एक नई उम्मीद की किरण है।

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) का महत्व

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) भारतीय सेना का एक अभिन्न अंग है, जो 1888 में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित हुई थी। स्वतंत्रता के बाद, 1950 में इसे औपचारिक रूप से भारतीय सेना का हिस्सा बनाया गया। MNS में केवल महिला अधिकारी ही शामिल होती हैं, और यह एकमात्र ऐसा कोर है जो पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित है। MNS अधिकारियों को स्थायी या शॉर्ट सर्विस कमीशन प्रदान किया जाता है, और उनकी नियुक्तियां और पदोन्नति भारत सरकार के साप्ताहिक गजट अधिसूचना में प्रकाशित की जाती हैं।

MNS अधिकारियों ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी विभिन्न युद्धों और मिशनों के दौरान अपनी सेवाएं दी हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान MNS नर्सों ने सिंगापुर, बर्मा, इटली, मेसोपोटामिया, श्रीलंका, मिस्र, और पश्चिमी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। युद्धकाल में कई नर्सों ने जापानी युद्धबंदी शिविरों में भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया। आज भी, MNS नर्सें शांतिकाल, युद्धकाल, और आपातकालीन परिस्थितियों में सैनिकों और उनके परिवारों को चिकित्सा सहायता प्रदान करती हैं।

लेफ्टिनेंट हिमानी तोमर (Himani Tomar) अब भारतीय सेना के विभिन्न सैन्य अस्पतालों में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगी। उनकी भूमिका सैनिकों, उनके परिवारों, और अन्य मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल प्रदान करने की होगी। AFMC से प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर, हिमानी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देंगी, बल्कि सैन्य अनुशासन और नेतृत्व के साथ देश सेवा में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उनकी इस उपलब्धि ने चंबल अंचल की युवतियों के लिए एक नया रास्ता खोला है। यह न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। हिमानी की कहानी यह सिखाती है कि मेहनत, लगन, और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

हिमानी की इस उपलब्धि का चंबल अंचल पर गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़ेगा। यह क्षेत्र, जो अक्सर सामाजिक रूढ़ियों और आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है, अब नई पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन रहा है। हिमानी की सफलता ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा और मेहनत के बल पर कोई भी क्षेत्र लैंगिक बाधाओं को तोड़ सकता है।

इसके अलावा, हिमानी की उपलब्धि ने AFMC और MNS जैसे संस्थानों की भूमिका को भी रेखांकित किया है। ये संस्थान न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि देश सेवा के लिए युवाओं को तैयार भी करते हैं। हिमानी की कहानी उन हजारों युवतियों के लिए प्रेरणा बनेगी जो सैन्य क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं। हिमानी तोमर (Himani Tomar) की यह उपलब्धि चंबल अंचल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने न केवल अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे मुरैना जिले और मध्य प्रदेश को गर्व का अवसर प्रदान किया। उनकी कहानी साहस, समर्पण, और मेहनत की एक जीवंत मिसाल है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow