पटियाला हाउस कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को POCSO मामले में बरी किया, नाबालिग पहलवान ने वापस लिया यौन शोषण का आरोप

हालांकि, नाबालिग पहलवान के मामले में जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने बृजभूषण के खिलाफ "झूठी" शि...

May 26, 2025 - 21:49
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पटियाला हाउस कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को POCSO मामले में बरी किया, नाबालिग पहलवान ने वापस लिया यौन शोषण का आरोप

नई दिल्ली: सोमवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) को नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए यौन शोषण के मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई 550 पेज की रद्दीकरण (कैंसिलेशन) रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। इस मामले में नाबालिग पहलवान और उसके पिता ने कोर्ट में अपने बयान में कहा कि उन्होंने भावनात्मक दबाव और बहकावे में आकर बृजभूषण के खिलाफ यौन शोषण का "झूठा" आरोप लगाया था।

यह मामला 2023 में तब सुर्खियों में आया जब एक नाबालिग महिला पहलवान ने बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। इस शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले ने देश भर में हलचल मचा दी थी, क्योंकि बृजभूषण न केवल एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं, बल्कि कुश्ती महासंघ के प्रभावशाली नेता भी रहे हैं। उनके खिलाफ यह शिकायत उस समय और गंभीर हो गई थी जब देश के शीर्ष पहलवानों, जैसे विनेश फोगट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक ने जंतर-मंतर पर बृजभूषण के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। इन पहलवानों ने बृजभूषण पर कई महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था।

हालांकि, नाबालिग पहलवान के मामले में जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने बृजभूषण के खिलाफ "झूठी" शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने दावा किया कि यह शिकायत उनकी बेटी के प्रति कुश्ती महासंघ के कथित पक्षपातपूर्ण व्यवहार से नाराजगी और हताशा के कारण दर्ज की गई थी। इसके बाद, नाबालिग पहलवान ने भी 1 अगस्त 2023 को कोर्ट में दिए गए अपने बयान में यौन शोषण के आरोपों को वापस ले लिया और दिल्ली पुलिस की जांच से संतुष्टि जताई। इस बयान के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में POCSO मामले को बंद करने के लिए 550 पेज की रद्दीकरण रिपोर्ट दायर की थी।

कोर्ट का निर्णय

सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष जज गोमती मनोचा ने दिल्ली पुलिस की रद्दीकरण रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) को इस POCSO मामले से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा अपने आरोप वापस लेने और जांच में कोई ठोस सबूत न मिलने के आधार पर इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि नाबालिग पहलवान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसने भावनात्मक दबाव और बहकावे में आकर यह आरोप लगाया था, और उसे बृजभूषण द्वारा किसी भी यौन शोषण का सामना नहीं करना पड़ा।

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इस फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) ने इसे "सत्य की जीत" करार देते हुए कहा कि वे हमेशा से इन आरोपों को निराधार मानते रहे हैं। उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इसे अपनी बेगुनाही का प्रमाण बताया। उनके वकील, राजीव मोहन ने भी तर्क दिया कि यह मामला एक "छिपे हुए एजेंडे" का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य बृजभूषण को कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाना था।

संबंधित यौन उत्पीड़न मामला

हालांकि POCSO मामले में बृजभूषण को राहत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ छह अन्य महिला पहलवानों द्वारा दायर एक अलग यौन उत्पीड़न मामले में मुकदमा अभी भी जारी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी, जिसमें बृजभूषण और उनके सहयोगी, पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर पर यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी, और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। मई 2024 में कोर्ट ने बृजभूषण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल), 354A (यौन उत्पीड़न), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए थे। इस मामले में बृजभूषण ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही है।

इस दूसरे मामले में सुनवाई चल रही है, और कोर्ट ने पीड़ित पहलवानों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में एक पीड़ित महिला पहलवान ने कमजोर गवाह कक्ष में अपनी गवाही दर्ज की थी। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बृजभूषण की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने FIR और आरोपों को रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि चूंकि मुकदमा शुरू हो चुका है और आरोप तय हो चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही को रद्द करना उचित नहीं है।

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ज्ञातव्य है कि 2023 में जंतर-मंतर पर हुए पहलवानों के विरोध प्रदर्शन ने देश भर में ध्यान खींचा था। साक्षी मलिक, विनेश फोगट, और बजरंग पूनिया जैसे ओलंपिक पदक विजेताओं ने बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और कुश्ती महासंघ में सुधार की वकालत की थी। इस आंदोलन ने महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न और खेल संगठनों में जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाया।

साक्षी मलिक ने हाल ही में अपनी आत्मकथा विटनेस में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे और मीडिया पर भी इन मुद्दों को उचित कवरेज न देने का आरोप लगाया था। हालांकि, बृजभूषण के समर्थकों का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे और इसका उद्देश्य उनकी छवि को खराब करना था।

इस बीच, कुश्ती महासंघ भी विवादों से अछूता नहीं रहा। दिसंबर 2023 में खेल मंत्रालय ने WFI को निलंबित कर दिया था, और संगठन कुछ समय तक बृजभूषण के निवास से संचालित हो रहा था। हाल ही में मंत्रालय ने निलंबन हटा लिया, लेकिन संगठन के संचालन में पारदर्शिता और सुधार की मांग अभी भी बनी हुई है।

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