Sultanpur: समाजसेवियों ने वृद्धाश्रम और मानसिक मंदित संस्थान में मनाई अनोखी होली, बांटी खुशियों की सौगात।
रंगों का पर्व होली इस बार कुछ युवाओं ने सेवा और संवेदना के नाम कर दिया। मंगलवार को समाजसेवियों का एक समूह
सुलतानपुर। रंगों का पर्व होली इस बार कुछ युवाओं ने सेवा और संवेदना के नाम कर दिया। मंगलवार को समाजसेवियों का एक समूह शहर के वृद्धाश्रम और मानसिक मंदित संस्थान पहुंचा, जहां निराश्रित बुजुर्गों और बच्चों के साथ अबीर-गुलाल खेलकर, गुझिया-नमकीन व फल वितरित कर उनके जीवन में खुशियों के रंग भरने का प्रयास किया गया।
यह पहल अंकुरण फाउंडेशन के बजरंग बहादुर सिंह और सिद्धार्थ सिंह की प्रेरणा से की गई। उनके साथ डब्बू पाठक, मुन्ना जायसवाल, हर्षि सिंह, दीपक पाठक और अंकुर मिश्र भी मौजूद रहे।
सबसे पहले समाजसेवियों की टोली तुराबखानी स्थित वृद्धाश्रम पहुंची। यहां अपने परिजनों से दूर रह रहे बुजुर्गों को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी गईं। युवाओं ने फल, गुझिया और नमकीन वितरित किए। अपनेपन और सम्मान से अभिभूत वृद्धजनों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने युवाओं को ढेरों आशीर्वाद दिया।
इसके बाद समाजसेवियों का काफिला भाई अमेठा स्थित मानसिक मंदित संस्थान पहुंचा। यहां करीब पचास निराश्रित एवं मानसिक रूप से कमजोर बच्चे निवास करते हैं। संस्थान की निदेशिका रिशा वर्मा के मार्गदर्शन में बच्चों के साथ रंगों का उत्सव मनाया गया। अबीर-गुलाल, मिठाइयों और उपहारों ने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।
होली गीतों पर बच्चों और युवाओं ने साथ मिलकर नृत्य किया। पूरे परिसर में उल्लास और अपनत्व का माहौल देखने को मिला। उपस्थित लोगों का कहना था कि त्योहार तभी सार्थक होता है, जब उसकी खुशियां समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचे, जो अक्सर उपेक्षा का सामना करते हैं।
समाजसेवियों ने संदेश दिया कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त करने का अवसर है।
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