Hardoi: गंभीर एनीमिया से जूझ रही गर्भवतियों के लिए राहत, एफसीएम इंजेक्शन की एक डोज से हो रहा प्रभावी उपचार

जनपद में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) से होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए सण्डीला, हरपालपुर

Jun 6, 2026 - 17:46
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Hardoi: गंभीर एनीमिया से जूझ रही गर्भवतियों के लिए राहत, एफसीएम इंजेक्शन की एक डोज से हो रहा प्रभावी उपचार
गंभीर एनीमिया से जूझ रही गर्भवतियों के लिए राहत, एफसीएम इंजेक्शन की एक डोज से हो रहा प्रभावी उपचार

हरदोई: जनपद में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) से होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए सण्डीला, हरपालपुर, पिहानी और बिलग्राम प्रथम संदर्भन इकाइयों (एफआरयू) में इंजेक्शन एफसीएम (Ferric Carboxy Maltose) की सुविधा शुरू की गई है। जो की गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है इस इंजेक्शन का प्रयोग पूर्णतया सुरक्षित है एवं कोई दुष्प्रभाव देखने में नहीं आया है इस पहल का उद्देश्य गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को प्रभावी एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराना है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत पिछले माह सण्डीला एफआरयू से की गई थी, जहां 4 जून 2026 तक 13 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया जा चुका है। पिहानी एफआरयू में 26 मई से शुरू हुई इस सुविधा का लाभ अब तक 18 गर्भवतियों ने लिया है, जबकि हरपालपुर एफआरयू में 3 जून से शुरू हुई सेवा के तहत अब तक 4 गर्भवती महिलाओं को इंजेक्शन दिया गया है। बिलग्राम एफआरयू में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि एनीमिया गर्भवती महिला और उसके होने वाले शिशु, दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एफसीएम इंजेक्शन की उपलब्धता से गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को समय पर उपचार मिल सकेगा, जिससे प्रसव संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र गर्भवती महिलाओं को यह सुविधा प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों की निगरानी में सुरक्षित रूप से उपलब्ध कराई जाए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गर्भावस्था में एनीमिया का एक प्रमुख कारण आयरन की कमी है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एफसीएम एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।
इस संबंध में चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि उपचार प्रक्रिया को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

डॉ. पांडे ने बताया कि पहले गंभीर एनीमिया की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज की 5 डोज देनी पड़ती थीं, जबकि एफसीएम के माध्यम से अब अधिकांश पात्र मामलों में केवल एक डोज में उपचार संभव हो गया है। इससे शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद मिलती है और महिलाओं को बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता भी कम पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह पहल सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की सुविधा और उपचार की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही यह सुविधा जनपद के अन्य एफआरयू तथा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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