बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद की सुरक्षा में बड़ी चूक: मंच पर रिवाल्वर लेकर पहुंचा युवक।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जनसभा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में
- कार्यकर्ताओं ने तुरंत पकड़ा: हंगामा के बीच युवक को नीचे उतारा, खुद को पुलिसकर्मी बताया
- करणी सेना की धमकी के बीच घटना: प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल, जांच की मांग तेज
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जनसभा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई है। यह कार्यक्रम बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की जयंती तथा पार्टी के छठे स्थापना दिवस के अवसर पर बडेल मैदान में आयोजित किया गया था। दोपहर करीब 2:30 बजे चंद्रशेखर आजाद मंच पर पहुंचे थे, जहां हजारों समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद थे। इसी बीच एक युवक सादे कपड़ों में रिवाल्वर कमर में लगाकर मंच के बहुत करीब पहुंच गया, जो चंद्रशेखर आजाद से महज कुछ मीटर की दूरी पर था। घटना के समय माहौल में अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि कार्यक्रम पहले से ही करणी सेना के एक नेता की धमकी के कारण संवेदनशील था। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए युवक को पकड़ लिया और उसे मंच से नीचे उतार दिया। इस दौरान मंच के पास काफी देर तक हो-हल्ला और हंगामा जारी रहा, जिसमें कार्यकर्ता युवक से सवाल-जवाब करते रहे। युवक ने अपना नाम अमित कुमार बताया और दावा किया कि वह पुलिस लाइन में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात है। इस घटना ने पूरे इलाके में सुरक्षा की कमजोरियों पर चर्चा छेड़ दी है, खासकर जब यह एक सांसद और राजनीतिक नेता के कार्यक्रम में हुई।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में राजनीतिक तनाव पहले से मौजूद था, क्योंकि करणी सेना के एक नेता ने चंद्रशेखर आजाद को धमकी दी थी, जिसके चलते प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। बावजूद इसके युवक मंच तक आसानी से पहुंच गया, जो व्यवस्था की खामी को दर्शाता है। घटना के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता सतर्क हो गए और कई जगहों पर लाठियां लेकर अलर्ट मोड में खड़े दिखे। युवक को पकड़ने के बाद उससे पूछताछ की गई, जहां उसने पुलिसकर्मी होने का दावा किया। हालांकि, उसने कोई आईडी कार्ड या प्रमाण नहीं दिखाया, जिससे संदेह और बढ़ गया। सीओ सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि अमित कुमार को सिविल ड्रेस में ड्यूटी के लिए लगाया गया था, और वह प्लेन क्लोथ्स में था। पुलिस ने उसे मंच से हटा दिया और स्थिति को नियंत्रित किया। इस पूरे प्रकरण ने दिखाया कि कैसे एक संदिग्ध व्यक्ति हथियार के साथ इतने करीब पहुंच सकता है, जबकि हजारों लोग मौजूद थे। कार्यक्रम जारी रहा, लेकिन इस घटना ने दर्शकों और कार्यकर्ताओं में असुरक्षा की भावना पैदा की।
युवक अमित कुमार की पहचान और भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वह सादे कपड़ों में रिवाल्वर लेकर मंच के निकट पहुंचा था। उसने खुद को पुलिस लाइन में तैनात हेड कॉन्स्टेबल बताया, लेकिन घटना के समय उसकी मौजूदगी और पहुंचने का तरीका सामान्य ड्यूटी से मेल नहीं खाता। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह ड्यूटी पर था, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर वह ड्यूटी पर था तो मंच पर चढ़ने की क्या जरूरत थी। इस पर विवाद बढ़ गया, क्योंकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में ऐसे मामलों में सख्ती बरती जानी चाहिए। युवक को हटाने के बाद हंगामा कुछ समय तक जारी रहा, जिसमें कार्यकर्ता उसे घेरे में लेकर सवाल पूछते रहे। पुलिस ने स्थिति संभाल ली और कार्यक्रम को बिना किसी बड़ी घटना के पूरा किया। इस घटना ने स्थानीय पुलिस की तैयारी पर सवाल खड़े किए, खासकर जब धमकी की पृष्ठभूमि में अतिरिक्त सतर्कता की उम्मीद थी। अमित कुमार को फिलहाल हिरासत में नहीं लिया गया, लेकिन जांच जारी है ताकि उसकी मंशा और पहुंच का पता लगाया जा सके। यह जनसभा कांशीराम जयंती पर आयोजित की गई थी, जहां चंद्रशेखर आजाद ने बहुजन समाज की एकजुटता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया। पार्टी के छठे स्थापना दिवस के मौके पर हजारों समर्थक जुटे थे, और धमकी के बावजूद बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई। यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं।
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू हो गई है। पुलिस ने माना कि युवक की पहुंच मंच तक एक चूक थी, लेकिन उन्होंने इसे जानबूझकर नहीं बताया। चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर भी हमले की खबरें आईं, जहां उनके वाहन पर कुछ लोगों ने हमला किया था। मंच पर यह घटना अलग से सामने आई, जो कुल मिलाकर सुरक्षा में कई कमजोरियों को इंगित करती है। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने त्वरित कार्रवाई की, जिससे कोई बड़ा हादसा टल गया। पुलिस ने क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया और जांच टीम गठित की। अमित कुमार से पूछताछ जारी है, और उसकी ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इस मामले ने राजनीतिक दलों के बीच बहस छेड़ दी है, जहां विपक्षी नेता सुरक्षा की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं। कार्यक्रम सफल रहा, लेकिन इस घटना ने भविष्य के आयोजनों के लिए सख्त प्रोटोकॉल की मांग बढ़ा दी है।
चंद्रशेखर आजाद ने कार्यक्रम में धमकियों का जिक्र किया और कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सतर्कता की सराहना की, जिसने स्थिति को संभाला। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जहां युवक को पकड़ते और हंगामा करते दिखाया गया। पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू की है ताकि पूरी घटना का क्रम समझा जा सके। अमित कुमार की पहचान पुष्ट होने के बाद भी सवाल बने हुए हैं कि ड्यूटी पर तैनात व्यक्ति मंच पर क्यों पहुंचा। सीओ ने कहा कि वह प्लेन क्लोथ्स में था, लेकिन यह स्पष्टीकरण कार्यकर्ताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया। इस घटना ने यूपी पुलिस की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया है, खासकर राजनीतिक रैलियों में। जांच में अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन असुरक्षा की भावना बनी हुई है। करणी सेना की धमकी के बाद भीम आर्मी कार्यकर्ता अलर्ट थे, और कई जगह लाठियां लेकर खड़े थे। यह तैयारी घटना में मददगार साबित हुई, क्योंकि उन्होंने युवक को तुरंत पकड़ा। धमकी ने कार्यक्रम को संवेदनशील बनाया था, लेकिन सुरक्षा में चूक ने स्थिति को और जटिल किया।
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