पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा: LPG की कोई कमी नहीं, पैनिक बुकिंग से उत्पन्न हुई परेशानी तो फिर लाइन में क्यों खड़े हैं लोग?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और पैनिक बुकिंग

Mar 13, 2026 - 16:09
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पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा: LPG की कोई कमी नहीं, पैनिक बुकिंग से उत्पन्न हुई परेशानी तो फिर लाइन में क्यों खड़े हैं लोग?
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य, लेकिन शहरों में लंबी कतारें और उपलब्धता की शिकायतें
  • मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित सप्लाई चेन, सरकार ने घरेलू प्राथमिकता सुनिश्चित की

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और पैनिक बुकिंग तथा अफवाहों के कारण स्थिति जटिल हुई है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 11 मार्च 2026 को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पैनिक बुकिंग और होर्डिंग व्यवहार गलत सूचनाओं से प्रेरित है। घरेलू एलपीजी की डिलीवरी साइकिल सामान्य रूप से 2.5 दिनों में बनी हुई है और रिफाइनरियों से उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। सरकार ने 8 मार्च को LPG कंट्रोल ऑर्डर जारी कर सभी रिफाइनरियों को LPG यील्ड अधिकतम करने और C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पूरी तरह तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के लिए निर्देशित करने का आदेश दिया। इस कदम से घरेलू उपभोक्ताओं की 33 करोड़ से अधिक कनेक्शनों वाली रसोई सुरक्षित रखी गई है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है, जिससे अफवाहें फैलीं और लोग अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक करने लगे।

देश के विभिन्न शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, पटना, लखनऊ और अन्य स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं लेकिन कई को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ इलाकों में ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ या सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने से लोग निराश लौट रहे हैं। पैनिक बुकिंग के कारण बुकिंग में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर दबाव बढ़ा और डिलीवरी में देरी हुई। सरकार ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन कर दिया है। यह कदम मांग प्रबंधन के लिए अस्थायी उपाय है ताकि जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले और अनावश्यक स्टॉकिंग रोकी जा सके। हालांकि, कई उपभोक्ता इस नियम से असुविधा महसूस कर रहे हैं क्योंकि पहले डिलीवरी तेज होती थी लेकिन अब बुकिंग में देरी से पुराने सिलेंडर खत्म होने पर समस्या बढ़ रही है।

सरकार का जोर घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने पर है, जहां अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं को निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की गई है। वाणिज्यिक उपयोग जैसे होटल, रेस्तरां और उद्योगों के लिए सप्लाई सीमित कर दी गई है, जिससे कई रेस्तरां बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 90 प्रतिशत रेस्तरां LPG पर निर्भर हैं और कमी से ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं, जिससे नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। कुछ जगहों पर इंडक्शन कुकटॉप और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा कि घरेलू LPG, क्रूड, पेट्रोल, डीजल, ATF और केरोसिन में कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च को पैनिक फैलाने वालों पर निशाना साधा और कहा कि ऐसे लोग देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मंत्रालय ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड कवरेज 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत करने का फैसला किया है, जिससे सिलेंडर की डिलीवरी मोबाइल पर OTP से कन्फर्म होती है और डायवर्शन रोका जा सके।

मिडिल ईस्ट संकट से भारत की LPG आयात निर्भरता उजागर हुई है, जहां 80-85 प्रतिशत LPG आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और FY25 में 31.3 मिलियन टन आयात किया जबकि घरेलू उत्पादन केवल 12.8 मिलियन टन रहा। संघर्ष से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से आयात में 20-25 प्रतिशत तक की कमी आई, जिससे वैश्विक कीमतें बढ़ीं और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद दबाव बना। सरकार ने इमरजेंसी पावर का उपयोग कर रिफाइनरियों से LPG उत्पादन अधिकतम करने और इंडस्ट्री सेल कट करने का आदेश दिया। वैकल्पिक स्रोतों से LNG और LPG कार्गो प्राप्त हो रहे हैं लेकिन तत्काल राहत के लिए समय लग रहा है। स्टॉक केवल 2-3 सप्ताह की मांग कवर कर पाते हैं, जिससे पैनिक तेज हुआ।

पैनिक बुकिंग से स्थिति और जटिल हुई है, जहां डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होर्डिंग की शिकायतें आईं और ब्लैक मार्केटिंग की घटनाएं सामने आईं। कुछ जगहों पर सिलेंडर 3000 रुपये तक बिक रहे हैं। राज्य सरकारों को ब्लैक मार्केटिंग रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। एंटी-एडल्टरेशन सेल और फील्ड ऑफिसर डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सहयोग मांगा है कि वे ईंधन संरक्षण करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। दैनिक 50 लाख से अधिक सिलेंडर डिलीवर हो रहे हैं लेकिन पैनिक से डिमांड डिस्टॉर्शन हुआ है।

यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों को सामने लाती है, जहां आयात निर्भरता और वैश्विक घटनाओं का सीधा प्रभाव पड़ता है। सरकार ने PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को भी प्राथमिकता दी है और कुछ शहरों में 20 प्रतिशत कट लगाया गया है। इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री बढ़ी है और कई परिवार वैकल्पिक ईंधन की ओर मुड़ रहे हैं। मंत्रालय का मानना है कि स्थिति नियंत्रण में है और कुछ दिनों में सामान्य हो जाएगी यदि पैनिक कम हो। एलपीजी संकट ने उपभोक्ताओं को सतर्क किया है कि वैश्विक घटनाओं का घरेलू जीवन पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार के दावे के बावजूद कतारें और उपलब्धता की समस्या बनी हुई है, जो पैनिक और सप्लाई चेन दबाव का मिश्रित परिणाम है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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