दृश्यम स्टाइल में प्लान्ड हत्या: पैसों के विवाद ने ली रिटायर्ड प्रोफेसर की जान।

छत्रपति संभाजीनगर शहर में एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है, जहां एक रिटायर्ड कॉलेज विभागाध्यक्ष की गुमशुदगी का

Mar 16, 2026 - 11:04
 0  5
दृश्यम स्टाइल में प्लान्ड हत्या: पैसों के विवाद ने ली रिटायर्ड प्रोफेसर की जान।
दृश्यम स्टाइल में प्लान्ड हत्या: पैसों के विवाद ने ली रिटायर्ड प्रोफेसर की जान।
  • फिल्मी प्लॉट की तरह बॉडी को छिपाया: जंगल की गहराई में दफन कर सबूत मिटाने की कोशिश
  • 40 दिनों की रहस्यमयी गुमशुदगी का खुलासा: पुलिस की जांच ने उजागर किया सनसनीखेज राज

छत्रपति संभाजीनगर शहर में एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है, जहां एक रिटायर्ड कॉलेज विभागाध्यक्ष की गुमशुदगी का मामला हत्या के रूप में सामने आया। 60 वर्षीय राजाभाऊजी सुब्राव लोंढे, जो एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रमुख रह चुके थे, पिछले 40 दिनों से लापता थे। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट परिवार ने दर्ज कराई थी, लेकिन जांच के दौरान यह पता चला कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी, जो लोकप्रिय फिल्म की कहानी से प्रेरित लगती है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कबूल किया कि उन्होंने पीड़ित को पहले नशे में धुत किया, फिर गोली मारकर हत्या की और शव को जंगल में गहरे गड्ढे में दफना दिया। इस घटना ने शहर में सुरक्षा और व्यक्तिगत विवादों के खतरनाक परिणामों पर बहस छेड़ दी है, क्योंकि पीड़ित एक सम्मानित शिक्षाविद थे और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करके इस साजिश का पर्दाफाश किया, जो दिखाता है कि अपराध कितनी सावधानी से रचा गया था।

पीड़ित राजाभाऊजी लोंढे का जीवन एक सामान्य रिटायर्ड व्यक्ति का था, लेकिन उनकी मौत ने उनके परिवार और समाज को गहरा सदमा दिया। वे दौलताबाद इलाके में रहते थे और रिटायरमेंट के बाद भी कभी-कभी कॉलेज से जुड़े कामों में व्यस्त रहते थे। 5 फरवरी को, मुख्य आरोपी विशाल विकास राठौड़ ने उन्हें एक पार्टी के लिए दौलताबाद के एक फार्महाउस पर आमंत्रित किया। वहां पहुंचने पर पीड़ित को भारी मात्रा में शराब पिलाई गई, जिससे वे बेहोश हो गए। वापसी के रास्ते में, सजापुर शिवर के पास एक रेलवे ब्रिज के नीचे आरोपियों ने उन्हें सिर में गोली मार दी। इस हत्या से पहले, आरोपियों ने योजना बनाई थी और तीन दिन पहले, यानी 2 फरवरी के आसपास, गेवराई तांडा के जंगल में दो गहरे गड्ढे खुदवाए थे। उन्होंने एक जेसीबी मशीन किराए पर ली और ऑपरेटर को खजाने की खोज का बहाना बनाकर काम करवाया। हत्या के बाद, शव को एक गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक दिया गया, ताकि कोई सुराग न मिले। इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों ने फिल्मी तरीके अपनाए, जहां सबूत मिटाने पर जोर दिया गया। परिवार ने जब लोंढे की गुमशुदगी की शिकायत की, तो शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह कोई सामान्य मामला है, लेकिन गहन जांच ने सच्चाई सामने ला दी।

आरोपियों की पृष्ठभूमि इस मामले को और जटिल बनाती है, क्योंकि वे पीड़ित से जुड़े थे लेकिन विवाद ने उन्हें अपराध की राह पर धकेल दिया। मुख्य आरोपी विशाल विकास राठौड़, जो 24 वर्ष का है, पीड़ित के साथ पैसे के लेन-देन में फंसा हुआ था। विशाल का जीजा आकाश विनोद पवार, 32 वर्षीय, और दोस्त करण विलास अडे, 22 वर्षीय, भी इस साजिश में शामिल थे। इन तीनों ने मिलकर योजना बनाई और हत्या को अंजाम दिया। पुलिस जांच में पता चला कि विशाल ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, दावा किया कि उसने पीड़ित को शहर के एक अस्पताल के पास छोड़ा था। लेकिन मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी ने उनके झूठ को पकड़ लिया। इन आरोपियों का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन पैसों का विवाद इतना गहरा था कि उन्होंने हत्या का फैसला कर लिया। जांच के दौरान, आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने गड्ढे पहले से तैयार कर रखे थे, ताकि शव को तुरंत छिपाया जा सके। इस मामले में चौथा आरोपी भी गिरफ्तार हुआ है, हालांकि उसकी भूमिका सहायक बताई जा रही है। पूरे मामले ने दिखाया कि कैसे छोटे विवाद बड़े अपराध में बदल सकते हैं, और आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए कितनी मेहनत की।

हत्या की योजना का फिल्मी कनेक्शन

फिल्म 'दृश्यम' में दिखाए गए तरीके से प्रेरित होकर आरोपियों ने शव को जंगल में दफनाया, जहां गड्ढा पहले से तैयार था। उन्होंने जेसीबी का इस्तेमाल कर गहराई सुनिश्चित की, ताकि बॉडी आसानी से न मिले। यह दिखाता है कि मीडिया और फिल्में कभी-कभी अपराधियों को नए आइडिया दे सकती हैं।

पुलिस जांच इस मामले में कुशलता का उदाहरण बनी, जहां क्राइम ब्रांच ने केस को संभाला और वैज्ञानिक तरीकों से सच्चाई तक पहुंची। शुरुआत में, गुमशुदगी की रिपोर्ट पर स्थानीय पुलिस ने काम किया, लेकिन कोई प्रगति न होने पर मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। टीम ने शहर भर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें पीड़ित को फार्महाउस जाते और वापस न लौटते देखा गया। मोबाइल लोकेशन डेटा से पता चला कि आरोपियों के फोन जंगल क्षेत्र में एक्टिव थे। गहन पूछताछ में आरोपियों ने टूटकर सब कबूल कर लिया। 15 मार्च को, तहसीलदार की मौजूदगी में जंगल से शव निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सिर में गोली लगने से मौत की पुष्टि की, साथ ही बॉडी की स्थिति से 40 दिनों की गुमशुदगी का समय मैच किया। पुलिस आयुक्त ने टीम की सराहना की, क्योंकि इस जांच ने न केवल अपराधियों को पकड़ा बल्कि शहर में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का संदेश दिया। इस मामले ने दिखाया कि तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति से कितने जटिल केस सुलझाए जा सकते हैं।

शव की खोज और पहचान ने पूरे मामले को क्लाइमैक्स पर पहुंचाया, जहां जंगल की गहराई ने रहस्य को छिपाने की कोशिश की लेकिन पुलिस की मेहनत ने उसे उजागर कर दिया। गेवराई तांडा के जंगल में, जहां घने पेड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्ते हैं, आरोपियों ने गड्ढा चुना ताकि कोई संदेह न हो। 15 मार्च की दोपहर, पुलिस टीम ने जेसीबी से खुदाई की और शव मिला, जो काफी सड़ी-गली हालत में था लेकिन कपड़ों और अन्य निशानों से पीड़ित की पहचान हुई। परिवार को सूचना दी गई, जिसने उन्हें गहरा दुख दिया लेकिन न्याय की उम्मीद भी जगाई। इस खोज ने इलाके के लोगों में दहशत फैलाई, क्योंकि जंगल आमतौर पर शांत रहता है। पुलिस ने क्षेत्र को सील कर लिया और अतिरिक्त सबूत जमा किए, जैसे जेसीबी ऑपरेटर का बयान, जिसने गड्ढे खुदवाने की बात कबूली। इस घटना ने स्थानीय समुदाय को सतर्क किया कि व्यक्तिगत विवादों को कैसे हैंडल करना चाहिए, वरना परिणाम घातक हो सकते हैं।

मामले के अपडेट्स बताते हैं कि जांच अब चार्जशीट की तैयारी की ओर बढ़ रही है, जहां सभी सबूतों को मजबूत किया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है, और पुलिस उनके बैंक खातों और पैसे के लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि मोटिव को और पुख्ता किया जा सके। परिवार ने न्याय की मांग की है और कहा कि पीड़ित एक समर्पित शिक्षक थे, जिन्होंने कई छात्रों को मार्गदर्शन दिया।

Also Read- कानपुर देहात में विदाई के बाद दुल्हन-दूल्हे पर दबंगों का हमला, बेरहमी से पिटाई और जेवर लूट।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।