धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला- बंगलागुड्डे में 100 से अधिक हड्डियों और कंकाल अवशेष मिले, एसआईटी जांच बारिश के बीच जारी। 

Karnataka: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल में बंगलागुड्डे क्षेत्र में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक संदिग्ध सामूहिक दफन स्थल की ....

Aug 6, 2025 - 13:05
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धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला- बंगलागुड्डे में 100 से अधिक हड्डियों और कंकाल अवशेष मिले, एसआईटी जांच बारिश के बीच जारी। 
धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला- बंगलागुड्डे में 100 से अधिक हड्डियों और कंकाल अवशेष मिले, एसआईटी जांच बारिश के बीच जारी। 

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल में बंगलागुड्डे क्षेत्र में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक संदिग्ध सामूहिक दफन स्थल की खुदाई के दौरान 100 से अधिक हड्डियों के टुकड़े और कंकाल अवशेष बरामद किए। यह खोज साइट 6 और एक नए स्थान, साइट 11-ए, से की गई, जिसे एक गवाह ने बाद में इंगित किया था। जांच को लगातार बारिश ने मुश्किल बना दिया है, और अवशेषों की उम्र, लिंग और मृत्यु के कारणों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट का इंतजार है। यह मामला 1995 से 2014 के बीच कथित बलात्कार और हत्या के शिकार लोगों के अवैध दफन से जुड़ा है, जिसे एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने उजागर किया।

धर्मस्थल, दक्षिण कन्नड़ जिले में श्री मंजुनाथेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध एक तीर्थ स्थल है। जुलाई 2024 में एक 50 वर्षीय पूर्व सफाई कर्मचारी ने धर्मस्थल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसमें दावा किया गया कि 1995 से 2014 के बीच उसे बलात्कार और हत्या के शिकार लोगों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। उसने 13 संदिग्ध दफन स्थलों की पहचान की, जिनमें से अधिकांश नेत्रावती नदी के किनारे और आसपास के जंगली क्षेत्रों में हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि कई शवों पर यौन उत्पीड़न और गला घोंटने के निशान थे।

04 जुलाई 2025 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 211(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया। 10 जुलाई को शिकायतकर्ता को गवाह संरक्षण योजना के तहत सुरक्षा दी गई, और 11 जुलाई को उसने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज किया। 19 जुलाई को कर्नाटक सरकार ने पुलिस महानिदेशक (आंतरिक सुरक्षा) डॉ. प्रणव मोहंती के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

एसआईटी ने 29 जुलाई 2025 से 13 चिह्नित स्थलों पर खुदाई शुरू की। पहले पांच स्थलों पर कोई मानव अवशेष नहीं मिले, लेकिन 31 जुलाई को साइट 6 पर, जो नेत्रावती नदी के स्नान घाट के पास जंगल में है, 15 हड्डियों के टुकड़े और एक खोपड़ी का हिस्सा मिला। प्रारंभिक जांच में ये अवशेष पुरुष के माने गए, और इन्हें एफएसएल को भेजा गया। इसके साथ ही, एक लाल रंग की फटी ब्लाउज, एक पैन कार्ड, और दो एटीएम कार्ड (एक पुरुष के नाम और दूसरा ‘लक्ष्मी’ के नाम) मिले।

04 अगस्त को शिकायतकर्ता ने साइट 11 के पास एक नए स्थान, साइट 11-ए, की ओर इशारा किया, जो 100 फीट ऊंची पहाड़ी पर है। 05 अगस्त को इस स्थान से 114 हड्डियों के टुकड़े, एक खोपड़ी, और एक लाल साड़ी, जिसमें गाँठ बंधी थी, बरामद हुई। प्रारंभिक विश्लेषण में साड़ी से गला घोंटने की संभावना जताई गई। यह स्थान शिकायतकर्ता द्वारा पहले चिह्नित स्थलों से 100 मीटर दूर था, जिसने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।

एसआईटी ने अब तक 13 में से 10 स्थलों की खुदाई पूरी कर ली है, लेकिन केवल साइट 6 और 11-ए से ही मानव अवशेष मिले हैं। खुदाई में 20 मजदूर, चार कमांडो, फोरेंसिक विशेषज्ञ, और दृश्यस्थल अधिकारी (सोको) शामिल हैं। बारिश और गीली मिट्टी ने खुदाई को मुश्किल बना दिया है, जिसके कारण मिनी अर्थमूवर का उपयोग नहीं हो सका। इसके बजाय, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग किया जा रहा है।

एसआईटी ने जांच को गोपनीय रखा है और इसे डीजीपी प्रणव मोहंती, डीआईजी एमएन अनुचेत, और एसपी जितेंद्र कुमार दयामा के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। जांच दल ने 1995 से धर्मस्थल पुलिस स्टेशन में तैनात अधिकारियों की सूची मांगी है और पूरे कर्नाटक में लापता महिलाओं और नाबालिगों के रिकॉर्ड एकत्र किए हैं। बेल्थांगडी पुलिस स्टेशन के कुछ रिकॉर्ड गायब या छेड़छाड़ किए गए पाए गए, लेकिन मोहंती के निर्देश पर पहले से एकत्र किए गए अप्राकृतिक मृत्यु रिपोर्ट (यूडीआर) ने महत्वपूर्ण साक्ष्य संरक्षित किए।

लगातार बारिश ने खुदाई कार्य को प्रभावित किया है। 05 अगस्त को साइट 11 पर खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता के नए स्थान की ओर इशारा करने पर दल ने साइट 11-ए पर ध्यान केंद्रित किया। शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि पहले चिह्नित स्थलों तक सीमित रहना “वैज्ञानिक और अर्थहीन” होगा। अवशेषों को तीन बाल्टियों और दो पीवीसी पाइपों में सुरक्षित कर एफएसएल भेजा गया है।

इस मामले ने कर्नाटक में व्यापक हंगामा मचाया है। कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं और एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज ने इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट से करने की मांग की है।

04 अगस्त को दक्षिण कन्नड़ के एक सामाजिक कार्यकर्ता जयंत टी ने एसआईटी के सामने शिकायत दर्ज की, जिसमें दावा किया गया कि 2002-03 में उन्होंने पुलिस को एक नाबालिग लड़की का शव जंगल में दफनाते देखा था, बिना उचित प्रक्रिया के। इस शिकायत ने जांच को और गहरा कर दिया है।

सोशल मीडिया मंच X पर लोगों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा, “धर्मस्थल जैसे पवित्र स्थान पर इतने भयावह अपराध? यह जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “एसआईटी को बिना दबाव के काम करने देना चाहिए। पीड़ितों के परिवारों को इंसाफ मिलना चाहिए।”

एफएसएल को भेजे गए अवशेषों की जांच से यह पता चलेगा कि ये हड्डियां कितनी पुरानी हैं, इनका लिंग क्या है, और मृत्यु का कारण क्या था। डीएनए विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि क्या ये अवशेष लापता लोगों से मेल खाते हैं। साइट 1 पर मिले पैन कार्ड और एटीएम कार्ड की जांच में पता चला कि ये सिद्धा लक्ष्मम्मा और उनके बेटे सुरेश के थे, जो मार्च 2025 में जॉन्डिस से मरे थे। हालांकि, उनके कार्ड का दफन स्थल पर मिलना सवाल उठाता है।

एसआईटी ने शेष तीन चिह्नित स्थलों और शिकायतकर्ता द्वारा इंगित अन्य संभावित स्थानों पर खुदाई की योजना बनाई है। जांच दल ने बेल्थांगडी पुलिस स्टेशन पर एक हेल्पलाइन और डेस्क स्थापित किया है, ताकि लोग इस मामले से संबंधित जानकारी साझा कर सकें। सामाजिक संगठनों ने रडार स्कैनिंग तकनीक के उपयोग और न्यायिक निगरानी की मांग की है।

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि जांच की दिशा अब साक्ष्यों पर आधारित हो रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि डीजीपी मोहंती की केंद्र में नई नियुक्ति के कारण जांच के नेतृत्व पर विचार किया जा सकता है।

धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला कर्नाटक के लिए एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बन गया है। बंगलागुड्डे में साइट 6 और 11-ए से मिले 100 से अधिक हड्डियों के टुकड़े और कंकाल अवशेष इस मामले की भयावहता को दर्शाते हैं। शिकायतकर्ता के दावों ने बलात्कार, हत्या और अवैध दफन की एक भयानक तस्वीर पेश की है। बारिश और गीली मिट्टी के बावजूद एसआईटी की जांच जारी है, और एफएसएल की रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है।

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