उत्तरकाशी बाढ़- कर्नल हर्षवर्धन के नेतृत्व में भारतीय सेना का राहत और बचाव अभियान, 150 जवान और हेलीकॉप्टर तैनात।
Uttarakhand: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा ...
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में चार लोगों की मौत हो चुकी है, और 50 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 8-10 भारतीय सेना के जवान भी शामिल हैं। भारतीय सेना के 14 राजपूत राइफल्स (RAJRIF) के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हर्षवर्धन 150 जवानों के साथ 05 अगस्त की दोपहर से राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। सेना ने ट्रैकर डॉग्स, ड्रोन, लॉजिस्टिक ड्रोन, और खुदाई मशीनों को तैनात किया है, जबकि सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर जरूरी सामान, दवाइयां और लोगों की निकासी में जुटे हैं। लगातार बारिश और बाधित सड़क संपर्क के बावजूद सेना का अभियान जारी है।
मंगलवार को दोपहर करीब 1:45 बजे उत्तरकाशी के धराली गांव के पास खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बादल फटने से भयंकर बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस आपदा ने धराली गांव के आधे हिस्से को मलबे और पानी में बहा दिया। 20-25 होटल, होम स्टे और कई घर नष्ट हो गए। शाम को हर्षिल क्षेत्र में एक और बादल फटने से सेना का कैंप प्रभावित हुआ, और 8-10 जवान लापता हो गए। सुक्खी टॉप पर तीसरे बादल फटने से एक अस्थायी झील बन गई, जिसने भागीरथी नदी के किनारे बसे कस्बों के लिए खतरा बढ़ा दिया।
भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, धराली में मलबा और पानी का बहाव इतना तेज था कि कई इमारतें पलक झपकते ही बह गईं। हर्षिल में सेना के कैंप के पास सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे राहत कार्यों में मुश्किलें आईं। चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, और 130 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
- कर्नल हर्षवर्धन का नेतृत्व
कर्नल हर्षवर्धन, 14 RAJRIF के कमांडिंग ऑफिसर, ने घटना के तुरंत बाद 150 जवानों की एक टुकड़ी के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू किया। भारतीय सेना के सूर्या कमांड ने X पर लिखा, “कर्नल हर्षवर्धन 05 अगस्त की दोपहर से 150 जवानों के साथ राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी ओर से मिले अपडेट्स से स्पष्ट है कि सेना हर संभव प्रयास कर रही है ताकि सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।”
कर्नल हर्षवर्धन ने धराली में मौके पर पहुंचकर स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ समन्वय स्थापित किया। उनकी टीम ने अब तक 20 से अधिक लोगों को बचाया है। डेहराडून के रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने कहा, “अपने 11 जवानों के लापता होने और कैंप के प्रभावित होने के बावजूद कर्नल हर्षवर्धन और उनकी टीम अडिग संकल्प के साथ काम कर रही है।”
भारतीय सेना ने अपने अभियान को तेज करने के लिए अतिरिक्त संसाधन तैनात किए हैं। सूर्या कमांड के अनुसार, ट्रैकर डॉग्स, ड्रोन, लॉजिस्टिक ड्रोन, और खुदाई मशीनों को हर्षिल भेजा गया है। सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं।
लगातार बारिश और भूस्खलन ने उत्तरकाशी-हर्षिल मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिसे खोलने के लिए जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। सेना के मेडिकल कैंप में घायलों का इलाज किया जा रहा है, और एम्स ऋषिकेश को आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंध्र प्रदेश का दौरा बीच में छोड़कर देहरादून में आपदा प्रबंधन केंद्र में स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बिजली बहाली और राहत कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं।” धामी ने तीन अतिरिक्त सचिवों—डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, अभिषेक रोहिल्ला, और गौरव कुमार—को राहत कार्यों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया।
राहत कार्यों में एनडीआरएफ की चार टीमें, एसडीआरएफ की 18 टीमें, और आईटीबीपी की तीन टीमें शामिल हैं। 40वीं बटालियन पीएसी की एक विशेष आपदा राहत इकाई, जिसमें 140 जवान शामिल हैं, को भी उत्तरकाशी भेजा गया है।
हर्षिल में सेना के कैंप के पास बनी अस्थायी झील को खोलने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम काम कर रही है। भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में हवाई सहायता प्रदान कर रहे हैं।
धराली, जो गंगोत्री की ओर जाने वाला एक प्रमुख पड़ाव है, पर्यटन के लिए जाना जाता है। इस आपदा ने गांव की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय निवासी सुधांशु सेमवाल ने कहा, “हमने चीखकर और इशारों से लोगों को चेतावनी देने की कोशिश की, लेकिन मलबा और पानी इतनी तेजी से आया कि कुछ समझ नहीं आया।”
मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 10 अगस्त तक भारी बारिश और भूस्खलन का रेड अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और अनियोजित निर्माण ने इस तरह की आपदाओं को बढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने सेना की तारीफ की। X पर एक यूजर ने लिखा, “कर्नल हर्षवर्धन और उनकी टीम का साहस प्रेरणादायक है। अपने जवानों के लापता होने के बावजूद वे लोगों की जान बचा रहे हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि एकजुट होकर राहत कार्यों में मदद करने का है।”
उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। 2013 की केदारनाथ त्रासदी में हजारों लोग मारे गए थे। 2019 में उत्तरकाशी के आराकोट में बादल फटने से 21 लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन की जरूरत को उजागर किया है।
यह आपदा स्कूलों और अन्य संस्थानों को बंद करने और आपात सेवाओं को छोड़कर सभी गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूर करती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जाएं, जैसे:
नदियों के किनारे अतिक्रमण को हटाना।
मौसम की सटीक चेतावनी के लिए घने रडार नेटवर्क की स्थापना।
स्थानीय लोगों को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करना।
उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में बादल फटने और भूस्खलन से हुई तबाही ने एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप को सामने लाया। कर्नल हर्षवर्धन और उनकी 150 जवानों की टीम ने अपने 8-10 साथियों के लापता होने के बावजूद राहत और बचाव कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और आईटीबीपी के संयुक्त प्रयासों से 130 से अधिक लोगों को बचाया गया है। यह घटना समाज और सरकार को आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की याद दिलाती है।
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