कर्नाटक- 11 साल के छात्र ने स्कूल की पानी की टंकी में मिलाया कीटनाशक, सुधार गृह भेजा गया।
Karnataka: कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के हूविनकोने गांव में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की पानी की टंकी में कीटनाशक मिलाए जाने की घटना ने सभी ....
कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के हूविनकोने गांव में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की पानी की टंकी में कीटनाशक मिलाए जाने की घटना ने सभी को चौंका दिया। कर्नाटक पुलिस ने इस मामले को सुलझाते हुए एक 11 साल के पांचवीं कक्षा के छात्र को इस कृत्य का दोषी पाया। छात्र को किशोर सुधार गृह भेज दिया गया है। जांच में पता चला कि छात्र को हाल ही में क्लास मॉनिटर बनाया गया था, लेकिन जब उसके सहपाठियों ने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उसने नाराज होकर पानी की टंकी में कीटनाशक मिला दिया। इस घटना को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने “आतंकी कृत्य” करार दिया।
31 जुलाई 2025 को हूविनकोने के सरकारी निम्न प्राथमिक स्कूल में सुबह करीब 9 बजे यह घटना हुई। स्कूल की रसोइया दीपा ने पानी की टंकी का पानी बदरंग और बदबूदार होने की सूचना दी। उन्होंने तुरंत शिक्षकों और स्कूल विकास व निगरानी समिति (एसडीएमसी) को सूचित किया। शिक्षकों ने पानी की जांच की और पाया कि टंकी में कीटनाशक मिलाया गया था। स्कूल प्रबंधन ने होसनगर पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।
पुलिस ने पाया कि टंकी में मिलाया गया कीटनाशक अदरक की फसल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला एक रसायन था। एक खाली कीटनाशक की बोतल टंकी के पास मिली, जो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी। स्कूल कर्मचारियों की सतर्कता के कारण कोई भी छात्र दूषित पानी नहीं पी सका, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
होसनगर पुलिस ने तुरंत तीन जांच टीमें गठित कीं, जिनका नेतृत्व तीर्थहल्ली डीएसपी अरविंद कालगुज्जी ने किया। 18 कर्मियों की इन टीमों ने गांव में तैनात होकर स्कूल के छात्रों और कर्मचारियों से पूछताछ की। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्होंने 11 साल के एक सहपाठी को टंकी के पास देखा था। पूछताछ में इस छात्र ने स्वीकार किया कि उसने कीटनाशक मिलाया था।
पुलिस के अनुसार, इस छात्र को कुछ दिन पहले क्लास मॉनिटर बनाया गया था। जब उसके सहपाठियों ने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया, तो वह नाराज हो गया। उसने अपने घर से कीटनाशक की बोतल लाकर सुबह स्कूल शुरू होने से पहले टंकी में डाल दिया। उसने कुछ सहपाठियों को धमकी भी दी कि अगर उन्होंने किसी को बताया, तो उन्हें नुकसान होगा। हालांकि, कुछ छात्रों ने साहस दिखाकर शिक्षकों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद मामला सामने आया।
पुलिस ने यह भी जांच की कि क्या छात्र किसी और के इशारे पर काम कर रहा था, लेकिन अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला। शिवमोग्गा के पुलिस अधीक्षक जीके मिथुन कुमार ने कहा, “हमने वैज्ञानिक साक्ष्यों और छात्रों के बयानों के आधार पर मामले को सुलझा लिया है। दोषी छात्र को किशोर सुधार गृह भेजा गया है।”
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना को “आतंकी कृत्य” करार दिया और इसे बच्चों की जान के लिए खतरा बताया। उन्होंने X पर लिखा, “स्कूल की टंकी में कीटनाशक मिलाना बच्चों की सामूहिक हत्या की मंशा वाला कृत्य है। यह आतंकी हरकत से कम नहीं है।” उन्होंने पुलिस को गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (केएससीपीसीआर) ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया और शिवमोग्गा के उप निदेशक (सार्वजनिक शिक्षा विभाग) से रिपोर्ट मांगी। आयोग के सदस्य शशिधर कोसंबे ने कहा, “स्कूल की टंकी में कीटनाशक मिलाना अक्षम्य है। कर्मचारियों की सतर्कता के कारण बड़ी त्रासदी टल गई। हमने उप निदेशक को पत्र लिखकर इसकी विस्तृत जानकारी मांगी है।”
हूविनकोने गांव, जो शिवमोग्गा जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर होसनगर तालुका में स्थित है, में करीब 150 परिवार रहते हैं। यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। सरकारी निम्न प्राथमिक स्कूल में 31 छात्र पढ़ते हैं। इस घटना ने गांव की शांत छवि को नुकसान पहुंचाया है, जिससे स्थानीय लोग दुखी हैं। ग्राम पंचायत सदस्य चिदंबर ने कहा, “हमारी सतर्कता और मुख्यमंत्री के निर्देशों के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। हम इस घटना से दुखी हैं।”
स्कूल ने दूषित टंकी को जांच के लिए सुरक्षित रखा है और एक नई पानी की टंकी की व्यवस्था की है। छात्रों को फिलहाल सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और अनुशासन पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 11 साल का बच्चा इतना गंभीर कदम उठाए, यह चिंताजनक है। मनोवैज्ञानिक डॉ. रीता शर्मा ने कहा, “बच्चों में गुस्सा और असंतोष को समझने और प्रबंधन करने की जरूरत है। स्कूलों में काउंसलिंग और भावनात्मक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए।”
पुलिस ने स्कूल के सभी छात्रों को काउंसलिंग दी, ताकि वे इस घटना से डर न जाएं और सच बताने के लिए प्रोत्साहित हों। शिक्षकों ने भी अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी भावनाओं को समझने की सलाह दी है।
यह कर्नाटक में स्कूल की पानी की टंकी में जहर मिलाने की दूसरी घटना थी। इससे पहले, 14 जुलाई 2025 को बेलगावी जिले के हुलिकट्टी गांव में एक सरकारी स्कूल की टंकी में कीटनाशक मिलाया गया था। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें श्री राम सेना के स्थानीय नेता सागर पाटिल शामिल थे। जांच में पता चला था कि यह कृत्य स्कूल के मुस्लिम हेडमास्टर को हटाने के लिए किया गया था। उस घटना में 11 छात्र बीमार हो गए थे, लेकिन समय पर इलाज से सभी ठीक हो गए।
इन घटनाओं ने स्कूलों की सुरक्षा और पानी की टंकियों की निगरानी पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षित टंकियां और नियमित निगरानी जरूरी है।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा छेड़ दी। X पर एक यूजर ने लिखा, “11 साल का बच्चा इतना खतरनाक कदम कैसे उठा सकता है? स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग जरूरी है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह घटना डरावनी है। स्कूलों को सुरक्षा बढ़ानी होगी।”
कर्नाटक सरकार ने स्कूलों की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है। शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा, “हम सभी स्कूलों में पानी की टंकियों को लॉक करने और सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दे रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”
यह घटना स्कूलों में सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्कूलों में निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:
पानी की टंकियों को ताले और सीसीटीवी निगरानी में रखा जाए।
शिक्षकों और कर्मचारियों को आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
बच्चों के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि उनकी भावनात्मक समस्याओं को समझा जा सके।
अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों और व्यवहार पर नजर रखने के लिए जागरूक किया जाए।
हूविनकोने के सरकारी स्कूल में 11 साल के छात्र द्वारा पानी की टंकी में कीटनाशक मिलाने की घटना ने स्कूलों की सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने मामले को सुलझा लिया और दोषी छात्र को सुधार गृह भेज दिया गया है। स्कूल कर्मचारियों की सतर्कता ने एक बड़ी त्रासदी को रोका, लेकिन यह घटना समाज और सरकार के लिए एक चेतावनी है। स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाने, बच्चों की काउंसलिंग करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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