बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता आरती साठे की बॉम्बे हाई कोर्ट जज नियुक्ति पर विवाद- रोहित पवार ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल। 

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वकील आरती अरुण साठे, अजित भगवानराव कडेठाणकर और सुशील मनोहर घोडेस्वर को बॉम्बे हाई कोर्ट ....

Aug 6, 2025 - 13:48
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बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता आरती साठे की बॉम्बे हाई कोर्ट जज नियुक्ति पर विवाद- रोहित पवार ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल। 
बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता आरती साठे की बॉम्बे हाई कोर्ट जज नियुक्ति पर विवाद- रोहित पवार ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल। 

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वकील आरती अरुण साठे, अजित भगवानराव कडेठाणकर और सुशील मनोहर घोडेस्वर को बॉम्बे हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की। इस सिफारिश में आरती साठे का नाम शामिल होने से महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरती साठे 2023 से 2024 तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मुंबई इकाई की प्रवक्ता और विधि प्रकोष्ठ की प्रमुख थीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार और कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए, इसे लोकतंत्र और न्यायपालिका की निष्पक्षता के लिए खतरा बताया। बीजेपी ने जवाब में कहा कि साठे ने जनवरी 2024 में पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

आरती अरुण साठे एक अनुभवी वकील हैं, जिन्हें 20 साल से अधिक का कानूनी अनुभव है। वह मुख्य रूप से प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) विवादों, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (एसएटी), और कस्टम्स, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (सीईएसटीएटी) के मामलों में विशेषज्ञता रखती हैं। इसके अलावा, उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वैवाहिक विवादों से संबंधित मामलों में भी काम किया है। उनके पिता, वरिष्ठ वकील अरुण साठे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य रहे हैं।

02 फरवरी 2023 को बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुळे ने साठे को महाराष्ट्र बीजेपी का प्रवक्ता और मुंबई बीजेपी विधि प्रकोष्ठ का प्रमुख नियुक्त किया था। साठे ने सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति की घोषणा की थी, जिसका स्क्रीनशॉट अब विपक्ष द्वारा साझा किया जा रहा है। हालांकि, बीजेपी के अनुसार, साठे ने 06 जनवरी 2024 को व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों का हवाला देते हुए प्रवक्ता, विधि प्रकोष्ठ प्रमुख और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई कर रहे थे, ने साठे सहित तीन वकीलों को बॉम्बे हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की। यह सिफारिश अब केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजी गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट में वर्तमान में 66 जज हैं (50 स्थायी और 16 अतिरिक्त), जबकि स्वीकृत संख्या 94 है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक और महासचिव रोहित पवार ने इस नियुक्ति पर तीखा विरोध जताया। उन्होंने X पर साठे के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें वह बीजेपी प्रवक्ता के रूप में अपनी नियुक्ति की घोषणा कर रही थीं। पवार ने लिखा, "सार्वजनिक मंच से सत्तारूढ़ दल की ओर से पक्ष रखने वाली व्यक्ति को जज नियुक्त करना लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात है। इसका भारतीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।"

पवार ने साफ किया कि उनकी आपत्ति साठे की कानूनी योग्यता को लेकर नहीं है, बल्कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि से है। उन्होंने कहा, "कोई भी व्यक्ति जो सत्तारूढ़ दल के लिए सार्वजनिक मंच पर पक्ष रखता हो, उसकी जज के रूप में नियुक्ति से आम लोगों का यह विश्वास डगमगा सकता है कि न्याय बिना पक्षपात के मिलता है।" पवार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी नियुक्तियां न्यायपालिका को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बना देंगी। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश से इस सिफारिश पर पुनर्विचार करने और मार्गदर्शन देने की अपील की।

महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी इस नियुक्ति की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने X पर लिखा, "निर्लज्जपणाचा कळस! चक्क बीजेपी प्रवक्ताओं को जज नियुक्त किया जा रहा है। बीजेपी ने लोकतंत्र की क्रूर थट्टा शुरू कर दी है।" कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने कहा कि यह नियुक्ति न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता पर कालिख पोतने वाली घटना है।

महाराष्ट्र बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि साठे ने अपनी नियुक्ति से पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी के मीडिया प्रभारी नवीन बान ने कहा, "यह सच है कि आरती साठे महाराष्ट्र बीजेपी की प्रवक्ता थीं, लेकिन उन्होंने जज नियुक्त होने से पहले जनवरी 2024 में प्रवक्ता पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।" बान ने साठे का इस्तीफा पत्र भी साझा किया, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों का हवाला दिया था।

महाराष्ट्र बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने भी पवार और कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने X पर लिखा, "साठे ने डेढ़ साल पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उनकी सिफारिश कॉलेजियम के फैसले के आधार पर हुई है।" उपाध्ये ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और पवार को कॉलेजियम की सिफारिश पर भरोसा नहीं है।

यह विवाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। रोहित पवार ने संविधान में शक्तियों के पृथक्करण (सेपरेशन ऑफ पावर्स) के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी नियुक्तियां न्यायपालिका की स्वायत्तता और जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "जब हाई कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त व्यक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि हो और वह सत्तारूढ़ दल में पद धारण कर चुका हो, तो कौन गारंटी दे सकता है कि न्याय प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात नहीं होगा?"

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता और योग्यता मुख्य मानदंड होने चाहिए। हालांकि, साठे की कानूनी योग्यता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है, लेकिन उनकी हाल की राजनीतिक सक्रियता ने इस नियुक्ति को विवादास्पद बना दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जज नियुक्त करने से पहले पर्याप्त समय बीतना चाहिए ताकि निष्पक्षता पर सवाल न उठें।

यह पहला मौका नहीं है जब जजों की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ हो। बीजेपी प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोग जज नियुक्त हुए थे। उन्होंने उदाहरण दिया कि जस्टिस बहारूल इस्लाम 1962 में कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि साठे का मामला अलग है, क्योंकि उनकी बीजेपी प्रवक्ता के रूप में सक्रियता हाल की थी।

इस नियुक्ति ने सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखीं। X पर एक यूजर ने लिखा, "न्यायपालिका को राजनीति से मुक्त रखना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता को जज बनाना गलत संदेश देता है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "साठे ने इस्तीफा दे दिया था, फिर भी विपक्ष को दिक्कत क्यों है? क्या योग्यता पर सवाल है?"

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और यह विवाद राजनीतिक माहौल को और गरमा सकता है। विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि बीजेपी इसे कॉलेजियम की सिफारिश और साठे की योग्यता का मामला बता रही है।

आरती अरुण साठे की बॉम्बे हाई कोर्ट जज के रूप में नियुक्ति की सिफारिश ने महाराष्ट्र में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। रोहित पवार और कांग्रेस ने उनकी पूर्व बीजेपी प्रवक्ता की भूमिका को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने उनके इस्तीफे और योग्यता का हवाला देकर बचाव किया। यह विवाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीति के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल उठाता है।

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