तमन्ना भाटिया ने GITN इंटरव्यू में खोले करियर और बाहुबली के राज- बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के वर्क कल्चर पर खुलकर की बात। 

Bollywood News: भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने हाल ही में GITN (ग्लोबल इंडियन टाइम्स न्यूज) के साथ एक विशेष....

Aug 6, 2025 - 13:57
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तमन्ना भाटिया ने GITN इंटरव्यू में खोले करियर और बाहुबली के राज- बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के वर्क कल्चर पर खुलकर की बात। 
तमन्ना भाटिया ने GITN इंटरव्यू में खोले करियर और बाहुबली के राज- बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के वर्क कल्चर पर खुलकर की बात। 

Bollywood News: भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने हाल ही में GITN (ग्लोबल इंडियन टाइम्स न्यूज) के साथ एक विशेष साक्षात्कार में अपने करियर, बाहुबली फिल्म में अपने अनुभव और फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर खुलकर बात की। तमन्ना ने बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा (तेलुगु और तमिल) के बीच कामकाजी संस्कृति के अंतर को भी समझाया। उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष, बाहुबली की सफलता और इंडस्ट्री में लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

शुरुआती करियर: 15 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर

तमन्ना भाटिया का जन्म 21 दिसंबर 1989 को मुंबई में एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था। उन्होंने 15 साल की उम्र में 2005 में हिंदी फिल्म "चांद सा रोशन चेहरा" से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। उसी साल उन्होंने तेलुगु सिनेमा में "श्री" और 2006 में तमिल सिनेमा में "केदी" के साथ डेब्यू किया। तमन्ना ने GITN को बताया कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में प्रवेश करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि वह न तो तमिल बोल सकती थीं और न ही तेलुगु। इसके बावजूद, उन्होंने इन भाषाओं को सीखा और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई।

तमन्ना ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, "मैं केवल 15 साल की थी जब मैंने सिनेमा में कदम रखा। भाषा, लोग, और संस्कृति सब कुछ नया था। मैंने बहुत कम उम्र में बहुत कुछ सीखा।" उन्होंने बताया कि वह पृथ्वी थिएटर में एक साल तक प्रशिक्षण ले चुकी थीं, जहां उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। इस अनुभव ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और सिनेमा की दुनिया में कदम रखने की हिम्मत दी। तमन्ना ने यह भी कहा कि वह शुरू में अपनी उम्र के कारण नर्वस थीं, क्योंकि उन्हें 30-40 साल के अभिनेताओं के साथ काम करना पड़ता था।

  • बाहुबली: करियर का टर्निंग पॉइंट

तमन्ना ने बाहुबली: द बिगिनिंग (2015) में अवंतिका की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में पैन-इंडिया सिनेमा की अवधारणा को जन्म दिया। GITN साक्षात्कार में तमन्ना ने बताया कि बाहुबली उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने कहा, "बाहुबली ने न केवल मेरे लिए, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए कई दरवाजे खोले। इसने मुझे एक अभिनेत्री के रूप में नई पहचान दी और मुझे अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने का मौका दिया।"

तमन्ना ने बाहुबली की एक विवादास्पद सीन पर भी बात की, जिसमें उनके किरदार अवंतिका और प्रभास के किरदार शिवुडु के बीच एक रोमांटिक दृश्य को कुछ दर्शकों ने गलत समझा और इसे बलात्कार के रूप में चित्रित करने की आलोचना की। तमन्ना ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा, "यह सीन अवंतिका की आत्म-खोज की यात्रा थी, न कि कोई हिंसक दृश्य। डायरेक्टर एसएस राजामौली ने इसे एक मजबूत और घायल नारीत्व को फिर से खोजने के रूप में दर्शाया था।" उन्होंने समाज में अंतरंग दृश्यों को लेकर शर्मिंदगी की मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोग प्रेम और अंतरंगता को गलत नजरों से देखते हैं।

हालांकि, तमन्ना ने यह भी स्वीकार किया कि वह बाहुबली की सफलता का पूरा फायदा नहीं उठा पाईं। उन्होंने GITN को बताया, "उस समय मैं व्यक्तिगत रूप से उतनी परिपक्व नहीं थी कि इसकी विशालता को समझ सकूं। मुझे लगता है कि अगर मैं उस समय अधिक समझदार होती, तो शायद मैं इस सफलता को और बेहतर तरीके से भुना पाती।" फिर भी, उन्होंने कहा कि बाहुबली ने उन्हें दर्शकों के बीच एक स्थायी पहचान दी।

तमन्ना ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर खुलकर बात की और लैंगिक समानता के मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इंडस्ट्री में बदलाव आया है और अब महिलाओं को अधिक मजबूत और महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिल रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि लैंगिक समानता और वेतन समानता की दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। तमन्ना ने कहा, "महिलाओं को अपनी शक्ति और व्यक्तित्व को अपनाने की जरूरत है। हमें बार-बार यह साबित करने की जरूरत नहीं कि हम संघर्ष कर रही हैं। हमें अपनी पहचान को गर्व के साथ स्वीकार करना चाहिए।"

उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में कुछ व्यावसायिक फिल्मों में पुरुषवादी सोच को बढ़ावा दिया जाता है, जिसे वह अब स्वीकार नहीं करतीं। तमन्ना ने कहा, "मैंने उन फिल्मों में काम करना बंद कर दिया, जहां ऐसी सोच को बढ़ावा दिया जाता है। मैं अब ऐसी भूमिकाएं चुनती हूं जो मेरे लिए सार्थक हों और समाज में सकारात्मक संदेश दें।"

तमन्ना ने बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा के बीच कामकाजी संस्कृति के अंतर को भी समझाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में कहानियां अधिक जमीनी और क्षेत्रीय संस्कृति से जुड़ी होती हैं, जो दर्शकों के साथ गहरा भावनात्मक संबंध बनाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "दक्षिण में कहानियां बहुत जड़ों से जुड़ी होती हैं। वे बुनियादी मानवीय भावनाओं पर ध्यान देती हैं, जिसके कारण वे वैश्विक दर्शकों तक पहुंचती हैं।"

वहीं, बॉलीवुड में फिल्में व्यापक दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जिसके कारण कभी-कभी कहानियां बहुत सामान्य हो जाती हैं। तमन्ना ने कहा, "बॉलीवुड में कई बार हर तरह के दर्शकों को खुश करने की कोशिश में कहानी का मूल भाव खो जाता है। लेकिन अगर कहानी जड़ों से जुड़ी हो, जैसे लापता लेडीज, तो वह हर तरह के दर्शक को छू सकती है।" उन्होंने यह भी कहा कि दोनों इंडस्ट्री में काम करने का उनका अनुभव उनके लिए सीखने का मौका रहा है।

तमन्ना ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में काम किया है। 2023 में वह नेटफ्लिक्स की "लस्ट स्टोरीज 2" में नजर आईं, जहां उनकी भूमिका को सराहा गया। उसी साल तमिल फिल्म "जेलर" में उनके विशेष प्रदर्शन ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई। 2024 में उनकी तमिल हॉरर-कॉमेडी फिल्म "अरनमनई 4" ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। तमन्ना ने हाल ही में नेटफ्लिक्स के लिए "सिकंदर का मुकद्दर" में काम किया, जिसमें वह जिम्मी शेरगिल और अविनाश तिवारी के साथ नजर आईं। इस फिल्म में उनकी भूमिका को दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा है।

तमन्ना ने GITN को बताया कि वह अब ऐसी भूमिकाएं चुन रही हैं जो उन्हें चुनौती दें और उनके अभिनय को नई दिशा दें। उन्होंने कहा, "मैं अब उन किरदारों को चुनना चाहती हूं जो मेरे दर्शकों को आश्चर्यचकित करें। सिकंदर का मुकद्दर में मेरा किरदार ऐसा ही है।" वह जल्द ही तेलुगु थ्रिलर "ओडेला 2" और अजय देवगन के साथ "रेंजर" में भी नजर आएंगी।

तमन्ना ने साक्षात्कार में समाज में सौंदर्य और कॉस्मेटिक उपचारों के प्रति दृष्टिकोण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं पर हमेशा सुंदर और जवां दिखने का दबाव रहता है, लेकिन अब नई पीढ़ी इन उपचारों को खुलकर स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा, "लोगों को व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करना चाहिए। पुरुष भी सौंदर्य उपचार लेते हैं, लेकिन महिलाओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है। यह दोहरा मापदंड खत्म होना चाहिए।"

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