भरतपुर में पति की मेहनत पर पत्नी की बेवफाई- मजदूरी और ससुर की फसल बेचकर पढ़ाया, टीचर बनने के बाद छोड़ा साथ। 

Rajasthan: राजस्थान के भरतपुर जिले में एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी को पढ़ाने-लिखाने के लिए दिन-रात ....

Aug 6, 2025 - 14:03
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भरतपुर में पति की मेहनत पर पत्नी की बेवफाई- मजदूरी और ससुर की फसल बेचकर पढ़ाया, टीचर बनने के बाद छोड़ा साथ। 
भरतपुर में पति की मेहनत पर पत्नी की बेवफाई- मजदूरी और ससुर की फसल बेचकर पढ़ाया, टीचर बनने के बाद छोड़ा साथ। 

राजस्थान के भरतपुर जिले में एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी को पढ़ाने-लिखाने के लिए दिन-रात मजदूरी की और ससुर ने अपनी फसल बेच दी, लेकिन सरकारी शिक्षिका बनते ही पत्नी ने पति का साथ छोड़ दिया। पीड़ित पति अनूप कुमार ने अपनी पत्नी पंकज कुमारी के खिलाफ जिला कलेक्टर और कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। अनूप का आरोप है कि पत्नी ने न केवल उसके साथ रहने से इनकार कर दिया, बल्कि सरकारी नौकरी के लिए दस्तावेजों में खुद को अविवाहित बताया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक रिश्तों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि समाज में नैतिकता और विश्वास जैसे मुद्दों पर भी बहस छेड़ दी है।

भरतपुर जिले की भुसावर तहसील के सलेमपुर खुर्द गांव के निवासी अनूप कुमार ने जिला कलेक्टर को दिए अपने शिकायत पत्र में बताया कि उनकी शादी 14 नवंबर 2021 को नगला हवेली गांव की पंकज कुमारी के साथ हुई थी। यह शादी बिना दहेज के साधारण तरीके से हुई थी। शादी के बाद पंकज ने सरकारी शिक्षक बनने की इच्छा जताई। अनूप ने अपनी पत्नी के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मजदूरी की और भरतपुर शहर में सूरजपोल दरवाजे के पास किराए पर कमरा लेकर उसे कोचिंग दिलाई। अनूप ने पंकज की पढ़ाई, कोचिंग और अन्य खर्चों के लिए 10,500 रुपये का मोबाइल भी खरीदा। उनके पिता मोतीलाल जाटव ने परिवार की आर्थिक मदद के लिए अपनी फसल बेच दी, ताकि पंकज की पढ़ाई में कोई कमी न आए।

पंकज ने 2021 में डाइट भरतपुर से बीएसटीसी (बेसिक स्कूल टीचिंग कोर्स) पूरा किया और 2023 में रीट प्रथम लेवल परीक्षा पास करके सरकारी शिक्षक बन गई। वर्तमान में वह रूपवास तहसील के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत है। अनूप का कहना है कि नौकरी लगने के बाद पंकज का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उसने अपने सास-ससुर के साथ अभद्रता शुरू कर दी और 02 मई 2025 को अनूप के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। अनूप का आरोप है कि पंकज ने शिक्षक भर्ती के दस्तावेज सत्यापन के दौरान तथ्यों को छिपाकर खुद को अविवाहित बताया, जो धोखाधड़ी का मामला है।

  • पत्नी का जवाब- बाल विवाह का दावा

पंकज कुमारी ने अनूप के आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया कि उनकी शादी बाल विवाह थी और इसे कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने अनूप पर फर्जी विवाह प्रमाणपत्र बनवाने और उनके दस्तावेज चुराने का आरोप लगाया। पंकज का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत से पढ़ाई पूरी की और सरकारी नौकरी हासिल की। उन्होंने यह भी दावा किया कि अनूप ने उनकी पढ़ाई में कोई खास मदद नहीं की और अब वह उनकी सफलता से जलन के कारण यह मामला उठा रहे हैं।

  • परिवार की आर्थिक तंगी और पति का दर्द

अनूप ने अपनी शिकायत में बताया कि पंकज ने शादी के समय वादा किया था कि अगर वह सरकारी नौकरी हासिल कर लेती हैं, तो परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेंगी और अनूप की पढ़ाई-लिखाई में भी मदद करेंगी। अनूप ने कहा, "मैंने अपनी पत्नी के सपनों को पूरा करने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। मजदूरी करके, ससुर की फसल बेचकर और कर्ज लेकर मैंने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाया। लेकिन नौकरी लगते ही उसने मुझे और मेरे परिवार को ठुकरा दिया।" अनूप के पिता मोतीलाल ने भी बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद उन्होंने पंकज की पढ़ाई के लिए अपनी फसल बेच दी। अब अनूप बेरोजगार है और परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है।

अनूप ने अपनी शिकायत जिला कलेक्टर और अपर जिला न्यायाधीश को सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि पंकज द्वारा दस्तावेजों में गलत जानकारी देने की जांच की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने भी दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अगर पंकज द्वारा अविवाहित होने का दावा गलत पाया जाता है, तो उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो सकता है।

इसके अलावा, अनूप ने कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया है, और मामला अभी विचाराधीन है। पुलिस और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई होगी।

यह मामला समाज में कई गंभीर सवाल उठाता है। अनूप की कहानी उन कई पुरुषों की कहानी को दर्शाती है, जो अपने परिवार और पत्नी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें विश्वासघात मिलता है। यह घटना उत्तर प्रदेश के ज्योति मौर्य प्रकरण की याद दिलाती है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी को पढ़ाकर एसडीएम बनाया, लेकिन बाद में पत्नी ने उसे छोड़ दिया। ऐसे मामलों ने समाज में यह बहस छेड़ दी है कि क्या शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता कुछ लोगों के नैतिक मूल्यों को बदल देती है।

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने पंकज के व्यवहार की निंदा की, जबकि कुछ ने उनके बाल विवाह के दावे का समर्थन किया। एक यूजर ने X पर लिखा, "यह बेहद दुखद है कि एक पति ने अपनी पत्नी के लिए इतना कुछ किया, लेकिन बदले में उसे धोखा मिला।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "अगर यह बाल विवाह का मामला है, तो पंकज को अपनी बात साबित करनी होगी। लेकिन सच जो भी हो, इस तरह के मामले समाज के लिए चेतावनी हैं।"

यह मामला दहेज, बाल विवाह और वैवाहिक रिश्तों में विश्वास जैसे मुद्दों को सामने लाता है। भारत में दहेज और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयां अभी भी मौजूद हैं, और इस तरह की घटनाएं समाज को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर करती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2023 में भारत में वैवाहिक विवादों से जुड़े 3,50,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कई मामले दहेज और घरेलू हिंसा से संबंधित थे।

यह घटना यह भी दर्शाती है कि शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को बनाए रखना कितना जरूरी है। समाज को ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है, ताकि रिश्तों में विश्वास और सम्मान बना रहे।

इस मामले में कोर्ट और प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। अगर पंकज के अविवाहित होने के दावे गलत पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर, अगर बाल विवाह का दावा सही साबित होता है, तो अनूप को अपने दावों को साबित करने में मुश्किल हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में दोनों पक्षों को काउंसलिंग और मध्यस्थता की जरूरत होती है, ताकि रिश्तों को बचाने का प्रयास किया जा सके।

भरतपुर का यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि समाज में व्याप्त विश्वासघात, आर्थिक तंगी और वैवाहिक रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाता है। अनूप कुमार की मेहनत और उनके पिता की कुर्बानी ने पंकज को सरकारी शिक्षक बनाया, लेकिन नौकरी के बाद पंकज का व्यवहार बदल गया।

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