Crime News: 5000 रुपये के ट्रांसफर पर गुस्साए पिता ने नशेड़ी बेटे को गोली मारकर उतारा मौत के घाट, पुलिस में किया सरेंडर।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया, बल्कि पारिवारिक रिश्तों और नशे की लत...
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया, बल्कि पारिवारिक रिश्तों और नशे की लत के दुष्परिणामों पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। एक सेवानिवृत्त फौजी पिता ने अपने नशे की लत से ग्रस्त बेटे को केवल 5000 रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर के विवाद में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना शुक्रवार, 30 मई 2025 की रात को मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र में हुई। वारदात के बाद पिता ने खुद सकरा थाने पहुंचकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि परिवार में बेटे की मौत के बाद मातम पसरा हुआ है। यह घटना मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पिता, रामजीवन राय (उम्र लगभग 60 वर्ष), एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं, जिन्होंने अपने जीवन में अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि माना। दूसरी ओर, उनका बेटा, अमित राय (उम्र लगभग 25 वर्ष), लंबे समय से नशे की लत का शिकार था। स्थानीय लोगों और परिवार के सदस्यों के अनुसार, अमित अपनी नशे की आदत के लिए बार-बार अपने पिता से पैसे मांगता था। इस बार उसने अपने पिता के मोबाइल फोन से बिना अनुमति के 5000 रुपये UPI के जरिए ट्रांसफर कर लिए, जिससे रामजीवन बेहद नाराज हो गए।
शुक्रवार रात को पिता-पुत्र के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। पुलिस जांच के अनुसार, बहस इतनी बढ़ गई कि रामजीवन ने अपनी लाइसेंसी राइफल निकाली और गुस्से में अमित के सीने में गोली मार दी। गोली लगने से अमित की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद रामजीवन ने बिना देरी किए सकरा थाने पहुंचकर अपनी राइफल के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने पुलिस को बताया, "मैंने अपने बेटे को गोली मार दी है। वह बार-बार नशे के लिए पैसे मांगता था और इस बार उसने मेरे फोन से चोरी छिपे पैसे ट्रांसफर किए।"
पुलिस की कार्रवाई
सकरा थाना प्रभारी, इंस्पेक्टर राकेश कुमार, ने बताया कि रामजीवन ने रात करीब 10 बजे थाने पहुंचकर अपनी राइफल जमा की और हत्या की बात कबूल की। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (SKMCH), मुजफ्फरपुर भेज दिया। रामजीवन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। शनिवार, 31 मई 2025 को उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि रामजीवन और अमित के बीच नशे की लत और पैसे के विवाद को लेकर अक्सर तनाव रहता था। थाना प्रभारी ने कहा, "आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार की है, और हम मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्यों और पड़ोसियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।"
इस घटना ने रामजीवन के परिवार और गांव में गहरा सदमा पैदा किया है। अमित की मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय निवासी, रमेश साहनी, ने बताया, "रामजीवन एक अनुशासित और सम्मानित व्यक्ति थे। अमित की नशे की लत ने पूरे परिवार को परेशान कर रखा था। लेकिन यह बहुत दुखद है कि बात इतनी बढ़ गई कि पिता को अपने बेटे की जान लेनी पड़ी।" गांव में इस घटना के बाद तनाव का माहौल है, और लोग नशे की लत को एक सामाजिक अभिशाप मान रहे हैं।
- नशे की लत
यह घटना नशे की लत के बढ़ते खतरे और इसके पारिवारिक-सामाजिक प्रभावों को उजागर करती है। बिहार में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, नशे की लत युवाओं के बीच एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। शराबबंदी के बावजूद, नशीले पदार्थों जैसे गांजा, डोडा, और स्मैक का अवैध व्यापार फल-फूल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता, अनिल शर्मा, ने कहा, "नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवारों को भी तोड़ देती है। इस घटना ने दिखाया कि समाज और सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए और सख्त कदम उठाने होंगे।"
यह घटना मुजफ्फरपुर में कानून-व्यवस्था और सामाजिक समस्याओं से निपटने की चुनौतियों को भी दर्शाती है। हाल के महीनों में, मुजफ्फरपुर में हिंसक अपराधों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जैसे कि 70 रुपये के किराए के विवाद में नाविक और उसके बेटे को गोली मारना। इस तरह की घटनाएं पुलिस और प्रशासन के लिए एक चेतावनी हैं कि नशे के अवैध व्यापार और सामाजिक जागरूकता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
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रामजीवन की कार्रवाई, भले ही गुस्से और हताशा में की गई हो, कानून की नजर में अपराध है। हालांकि, यह घटना यह भी सवाल उठाती है कि क्या समाज में नशे की लत से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन और सहायता उपलब्ध हैं। नशामुक्ति केंद्रों की कमी और सामाजिक कलंक के कारण कई परिवार इस समस्या से अकेले जूझते हैं। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या समय रहते अमित को उचित सहायता मिली होती, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।
मुजफ्फरपुर की यह घटना न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि यह समाज में नशे की लत और पारिवारिक तनाव के गंभीर परिणामों का प्रतीक भी है। रामजीवन का अपने बेटे को गोली मारना और फिर आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि वह खुद अपनी कार्रवाई से टूट चुके हैं। यह घटना समाज और सरकार के लिए एक जागरूकता का संदेश है कि नशे की लत को रोकने के लिए नशामुक्ति केंद्रों, सामाजिक जागरूकता अभियानों, और सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है।
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