Lucknow: नोबेल विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने CM योगी से की मुलाकात, यूपी में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च हब पर चर्चा। 

नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ

By INA News Desk
Mar 11, 2026 - 14:22  · Updated: Mar 11, 2026 - 15:54
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Lucknow: नोबेल विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने CM योगी से की मुलाकात, यूपी में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च हब पर चर्चा। 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव व लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा ने मुलाकात की
  • मुख्यमंत्री से मिले नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव
  • लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात 
  • उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा 

लखनऊ। नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया।

बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है।

लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2D मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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