बागपत में भीषण रसोई गैस हादसा: चाय बनाते समय दो सिलेंडरों में लगी आग की चपेट में आने से चार साल के मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कपां देने वाली दुर्घटना की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर
- अचानक भड़की लपटों ने पूरे हंसते-खेलते परिवार को लिया आगोश में: दादा-दादी, चाचा और दस साल का बड़ा भाई गंभीर रूप से झुलसे, अस्पताल में उपचार जारी।
- पड़ोसियों की बहादुरी से टला एक और बड़ा धमाका: जलते हुए सिलेंडरों को घर से बाहर खींचकर बुझाई आग, मासूम की मौत के बाद बिना पोस्टमार्टम के शव का अंतिम संस्कार।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कपां देने वाली दुर्घटना की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक साधारण ग्रामीण घर की रसोई में सुबह की शुरुआत रोज की तरह बेहद सामान्य तरीके से हुई थी, लेकिन चाय बनाने के दौरान अचानक भड़की आग ने देखते ही देखते एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। रसोई घर में रखे छोटे और बड़े दोनों सिलेंडरों में गैस रिसाव के कारण अचानक भीषण आग लग गई, जिसने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयानक अग्निकांड में घर के भीतर मौजूद चार वर्षीय एक मासूम बच्चे की आग की लपटों में बुरी तरह झुलस जाने के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, परिवार के चार अन्य सदस्य, जिनमें बच्चे के दादा-दादी, चाचा और उसका एक बड़ा भाई शामिल हैं, आग को बुझाने और एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
यह हृदयविदारक हादसा बागपत के एक रिहायशी इलाके में स्थित मकान में उस समय घटित हुआ जब परिवार की महिलाएं और सदस्य सुबह की दिनचर्या के तहत रसोई में चाय तैयार कर रहे थे। घर के कोने में बने चूल्हे के पास ही एक पांच किलोग्राम वाला छोटा गैस सिलेंडर और एक चौदह किलोग्राम वाला बड़ा कमर्शियल या घरेलू सिलेंडर रखा हुआ था। रेगुलेटर या पाइप में अचानक हुए तकनीकी रिसाव के कारण जैसे ही माचिस की तीली जलाई गई, गैस के गुबार ने तुरंत आग पकड़ ली। लपटें इतनी तेज और अप्रत्याशित थीं कि रसोई घर के संकरे रास्ते के कारण किसी भी सदस्य को संभलने या बाहर भागने का मौका नहीं मिल सका। देखते ही देखते आग ने पूरी रसोई को अपनी चपेट में ले लिया और वहां रखे दोनों सिलेंडरों से आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं, जिससे घर के भीतर भीषण चीख-पुकार मच गई। घरेलू या छोटे एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग करते समय सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। यदि कभी भी रसोई में गैस की गंध महसूस हो, तो भूलकर भी कोई बिजली का स्विच ऑन या ऑफ न करें और न ही माचिस या लाइटर जलाएं। सबसे पहले घर के सभी खिड़की-दरवाजों को पूरी तरह खोल देना चाहिए ताकि गैस बाहर निकल सके। इसके साथ ही, रेगुलेटर के मुख्य नॉब को तुरंत बंद कर देना चाहिए और समय-समय पर गैस पाइप व सुरक्षा रबर रिंग (ओ-रिंग) की जांच किसी अधिकृत डीलर से करानी अनिवार्य है।
हादसे के वक्त लगी भयानक आग और उठते हुए काले धुएं को देखकर आसपास के पड़ोसियों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत लाठी-डंडे, पानी की बाल्टियां और रेत लेकर पीड़ित परिवार के घर की तरफ दौड़े। घर के भीतर से आ रही रोने और चिल्लाने की आवाजें सुनकर कुछ साहसी युवकों ने जलते हुए मकान के भीतर प्रवेश किया। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए किसी तरह रसोई में धधक रहे दोनों गैस सिलेंडरों को कपड़ों और बोियों की मदद से पकड़कर घर के बाहर खुले मैदान में फेंका। यदि समय रहते इन सिलेंडरों को बाहर न निकाला जाता, तो अत्यधिक गर्मी के कारण उनके फटने का खतरा बढ़ जाता, जिससे आसपास के कई अन्य घर भी इसकी जद में आ सकते थे। बाहर फेंकने के बाद पड़ोसियों ने सूझबूझ से मिट्टी और भारी मात्रा में पानी डालकर सिलेंडरों की आग को पूरी तरह काबू में किया।
इस भीषण अग्निकांड के दौरान घर के भीतर मौजूद चार साल के मासूम बच्चे को बचाने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई। आग की लपटों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया था, जिसके कारण वह अत्यधिक झुलस गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अपने कलेजे के टुकड़े को आंखों के सामने दम तोड़ते देख पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और मां सहित पूरे कुनबे का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बच्चे को बचाने के चक्कर में उसका दस वर्षीय बड़ा भाई, उसके बुजुर्ग दादा-दादी और सगे चाचा भी आग की भीषण तपन से बुरी तरह झुलस गए। ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें उच्च स्तरीय बर्न वार्ड में रेफर कर दिया है, जहां उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
घटना की भयावहता की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और अग्निशमन दल की गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना किया और जले हुए मलबे व सिलेंडरों की स्थिति को देखकर मामले से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने पड़ोसियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस प्रशासन की तरफ से कानूनी प्रक्रिया के तहत मृत बच्चे के शव का पंचनामा भरकर उसे अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए भेजने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि, इस बेहद दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने बच्चे के शव का किसी भी प्रकार का पोस्टमार्टम कराने से साफ तौर पर इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने लिखित रूप में अपनी अनापत्ति दर्ज कराई।
पारिवारिक सदस्यों के कड़े अनुरोध और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही मासूम के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद गमगीन माहौल में, नम आंखों और भारी मन से ग्रामीणों की उपस्थिति में बच्चे के शव का अंतिम संस्कार स्थानीय श्मशान घाट पर कर दिया गया। इस घटना के बाद से पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में गहरा सन्नाटा और शोक की लहर व्याप्त है, क्योंकि मृत बच्चा बेहद मिलनसार और पूरे मोहल्ले का लाडला था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधाया है और सरकार से इस गरीब परिवार को उचित आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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