दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के खिलाफ केंद्र सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार: कैबिनेट ने 5041 करोड़ रुपये की मेगा हरित परिवहन योजना को दी अपनी मंजूरी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के मौसम में गंभीर रूप से गहराने वाले वायु प्रदूषण
- सड़कों से हटाए जाएंगे पुराने डीजल और पेट्रोल कमर्शियल वाहन: नई BS-VI और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें व ट्रक खरीदने पर गाड़ी मालिकों को मिलेगा भारी वित्तीय प्रोत्साहन।
- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया ऐतिहासिक पर्यावरण नीति का ऐलान: पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और मासिक फ्यूल वाउचर के साथ प्रदूषण मुक्त परिवहन के नए युग का सूत्रपात।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के मौसम में गंभीर रूप से गहराने वाले वायु प्रदूषण के संकट से निपटने और हवा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्रीय कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक और बेहद दूरगामी फैसले को मंजूरी दे दी है। सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में शामिल भारी वाणिज्यिक वाहनों को सड़कों से हटाने और उनके स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को स्थापित करने के लिए पांच हजार इकतालीस करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली एक विशेष और महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार किया है। इस वृहद योजना के मुख्य बिंदु के तहत क्षेत्र में दौड़ रहे पुराने, जर्जर और अत्यधिक धुआं उगलने वाले वाणिज्यिक ट्रकों और बसों को पूरी तरह से चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जाएगा। इनके स्थान पर बेदाग और आधुनिक बीएस-6 (BS-VI) मानकों वाले तथा शून्य-उत्सर्जन क्षमता से लैस पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में उतारने के लिए वाहन मालिकों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक संबल प्रदान किया जाएगा।
इस विशाल और व्यापक रूप से तैयार की गई नीतिगत पहल की विस्तृत और आधिकारिक घोषणा बुधवार को आयोजित एक विशेष कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा की गई। उन्होंने देश के सामने इस योजना के उद्देश्यों को रखते हुए साफ किया कि यह कदम केवल वाहनों को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली और इसके पड़ोसी शहरों की आबोहवा को पूरी तरह से बदलने और नागरिकों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार देने की दिशा में केंद्र सरकार का एक बड़ा और निर्णायक निवेश है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने सीधे तौर पर उन परिवहन ऑपरेटरों और वाणिज्यिक वाहन मालिकों को लक्षित किया है, जो भारी वित्तीय लागत के डर से अपने पुराने वाहनों को बदलने से कतराते थे। सरकार की इस नई पहल से अब उन लोगों को अपने पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को कबाड़ (स्क्रैप) में बदलकर नए जमाने के सुरक्षित और हरित वाहनों को अपनाने के लिए एक बेहद आकर्षक और सुगम रास्ता मिल सकेगा। इस 5041 करोड़ रुपये की योजना के तहत वाहन मालिकों को चार मुख्य स्तरों पर भारी वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं। पहला, नई गाड़ी की खरीद के लिए लिए जाने वाले ऋण पर पांच वर्षों के लिए पांच प्रतिशत की सीधी ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। दूसरा, वाहनों की विशिष्ट श्रेणियों और उनकी क्षमता के आधार पर पांच साल तक की अवधि के लिए अधिकतम अड़तालीस सौ रुपये तक के मासिक फ्यूल वाउचर प्रदान किए जाएंगे। तीसरा, इस सरकारी नीति के समर्थन में वाहन निर्माता कंपनियों की तरफ से भी नई गाड़ियों की खरीद पर विशेष संस्थागत छूट (डिस्काउंट) दी जाएगी। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यदि कोई मालिक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन (बस या ट्रक) खरीदने का विकल्प चुनता है, तो उसे सरकार की तरफ से एकमुश्त भारी वित्तीय नकद लाभ दिया जाएगा ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च शुरुआती लागत के बोझ को कम किया जा सके।
इस विशेष योजना के दायरे और इसके पात्रता नियमों को लेकर सरकार ने बेहद कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं, ताकि योजना का लाभ सीधे तौर पर केवल उन्हीं क्षेत्रों को मिल सके जो प्रदूषण की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यह महत्वाकांक्षी नीति मुख्य रूप से केवल दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आने वाले जिलों में पंजीकृत और संचालित हो रहे बीएस-4 (BS-IV) और उससे भी पुराने तकनीकी मानकों वाले ट्रकों और बसों के लिए ही पूरी तरह से प्रभावी और लागू मानी जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन कमर्शियल वाहनों के पास बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 या बीएस-4 श्रेणी के इंजन हैं और जो वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर माल ढुलाई या सार्वजनिक परिवहन के रूप में चल रहे हैं, उन्हें ही इस योजना के तहत कबाड़ घोषित करके नई गाड़ियां खरीदने पर यह सभी वित्तीय रियायतें और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। नए और कड़े नियमों के तहत इस पुरानी श्रेणी के वाहनों के परमिट को भी धीरे-धीरे नवीनीकृत न करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और मौसम के मिजाज को देखते हुए यह कदम समय की मांग बन चुका था, क्योंकि हर साल अक्टूबर से लेकर जनवरी के महीनों के दौरान धूल के कणों और वाहनों से निकलने वाले खतरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड व पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) के कारण पूरा इलाका एक गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है। अध्ययनों में यह बात बार-बार सामने आई है कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले और यहां रात के समय चलने वाले अंतरराज्यीय भारी ट्रक और पुरानी बसें कुल वाहन जनित प्रदूषण में पचास प्रतिशत से भी अधिक की हिस्सेदारी रखती हैं। ऐसे में सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर प्रदूषण की उस मुख्य जड़ पर प्रहार करता है, जो रात के अंधेरे में शहर की हवा को सबसे ज्यादा जहरीली बनाती थी। इन पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के माध्यम से अगले कुछ वर्षों के भीतर हजारों की संख्या में पुराने कमर्शियल वाहनों को सड़कों से पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रदूषण के स्तर में तात्कालिक और बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।
वित्तीय रूप से इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी वाणिज्यिक वाहन ऑपरेटरों को आसान शर्तों पर ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करेगी। आमतौर पर कमर्शियल ट्रक या बस खरीदने के लिए ब्याज दरें काफी ऊंची होती हैं, लेकिन सरकार द्वारा पांच प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी सीधे बैंकों को हस्तांतरित किए जाने के कारण वाहन मालिकों के लिए मासिक किस्त (ईएमआई) का बोझ बेहद कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, जो अड़तालीस सौ रुपये तक के मासिक फ्यूल वाउचर दिए जा रहे हैं, वे वाहन ऑपरेटरों के दैनिक परिचालन खर्च (रनिंग कॉस्ट) को काफी हद तक कम कर देंगे, जिससे वे अपनी गाड़ियों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए खुद आगे आएंगे। वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जा रहे इस इकोसिस्टम के तहत स्क्रैपिंग सेंटर्स को भी आधुनिक बनाया जा रहा है, जहां पुरानी गाड़ियों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नष्ट किया जाएगा और उसका स्क्रैप सर्टिफिकेट दिखाने पर ही नई गाड़ी पर ये सभी लाभ दिए जाएंगे।
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