‘कभी अलविदा ना कहना’ के 19 साल- करण जौहर ने साझा कीं फिल्म की अनमोल यादें।
Bollywood News: भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं और दशकों बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखती हैं। ऐसी ही....
भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं और दशकों बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘कभी अलविदा ना कहना’, जिसने अपने बोल्ड कथानक, गहरे भावनात्मक दृश्यों और शानदार संगीत के साथ दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म को करण जौहर ने निर्देशित किया था, और अब इसके 19 साल पूरे होने पर करण ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए फिल्म से जुड़ी यादों को ताजा किया। 'कभी अलविदा ना कहना’ करण जौहर की तीसरी निर्देशकीय फिल्म थी, जो न्यूयॉर्क शहर की पृष्ठभूमि में एक जटिल प्रेम कहानी को प्रस्तुत करती है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा, अभिषेक बच्चन और किरण खेर जैसे सितारों ने अभिनय किया। फिल्म की कहानी दो ऐसे लोगों, देव (शाहरुख खान) और माया (रानी मुखर्जी), के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी नाकाम शादियों में फंसे हैं। जब वे एक-दूसरे से मिलते हैं, तो पहले एक-दूसरे की शादी को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनके बीच प्यार पनपने लगता है। यह कहानी वैवाहिक रिश्तों में बेवफाई और भावनात्मक उथल-पुथल जैसे संवेदनशील विषयों को छूती है, जो उस समय भारतीय सिनेमा में एक असामान्य और साहसिक कदम था। फिल्म ने रिश्तों की जटिलताओं को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया, जिसने इसे अपने समय से आगे की फिल्म बना दिया।
करण जौहर ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “कुछ प्रेम कहानियां समय से परे होती हैं और आज भी वही प्रभाव रखती हैं। मेरे लिए ‘कभी अलविदा ना कहना’ ऐसी ही कहानी है। मेरी तीसरी फिल्म के रूप में, मुझे फिर से इस बात का गर्व हुआ कि मुझे इतने शानदार लोगों के साथ एक ऐसी कहानी को पर्दे पर लाने का मौका मिला, जो बोल्ड, साहसी और सिर्फ दिल से भरी थी।” इस पोस्ट में उन्होंने सेट से कई अनदेखी तस्वीरें और एक वीडियो साझा किया, जिसमें शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा, अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन के साथ मजेदार और भावनात्मक पल दिखाई दिए। एक तस्वीर में शाहरुख अपने ऑन-स्क्रीन बेटे (अहसास चन्ना) का मुंह मजाक में बंद करते नजर आए, जबकि करण आश्चर्य से देख रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में प्रीति जिंटा फूलों को निहार रही हैं, और अभिषेक बच्चन के साथ करण हंसते हुए दिखाई दिए। इन तस्वीरों ने सेट पर मौजूद सौहार्द और रचनात्मक ऊर्जा को दर्शाया। फिल्म के सेट से साझा किए गए वीडियो में शाहरुख खान को दिग्गज अभिनेता देव आनंद की नकल करते देखा गया, जो पूरे क्रू के लिए एक हल्का-फुल्का पल था। करण ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे “नॉस्टैल्जिया का खजाना” बताया। इस पोस्ट पर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने कमेंट किया, “न्यूयॉर्क की यादें हमेशा के लिए।” वहीं, धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता ने इसे “सबसे खास” बताया। प्रशंसकों ने भी कमेंट सेक्शन में फिल्म के प्रति अपने प्यार का इजहार किया, और कई ने इसे भारतीय सिनेमा की एक क्लासिक फिल्म करार दिया। इस पोस्ट ने न केवल फिल्म की यादों को ताजा किया, बल्कि यह भी दिखाया कि ‘कभी अलविदा ना कहना’ आज भी कितनी प्रासंगिक और प्रिय है।
‘कभी अलविदा ना कहना’ की रिलीज के समय इसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। 2006 में, जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो इसे कई आलोचकों ने इसकी बेवफाई की थीम के लिए निशाना बनाया। उस समय भारतीय समाज में वैवाहिक रिश्तों में बेवफाई को दर्शाना एक विवादास्पद विषय था, और कई आलोचकों का मानना था कि यह फिल्म भारतीय मूल्यों को नुकसान पहुंचा सकती है। करण ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनकी मां, हीरू जौहर, ने फिल्म देखने के बाद एक सप्ताह तक कोई टिप्पणी नहीं की थी। बाद में उन्होंने पूछा, “तुम्हें इतना चरमपंथी विषय क्यों चुनना पड़ा?” करण ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह उनकी अपनी मान्यता थी, और वह इस कहानी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे। उनकी मां ने यह भी कहा कि उन्हें फिल्म देखकर डर लगा, क्योंकि यह उस समय के सामाजिक ढांचे के लिए काफी उत्तेजक थी। हालांकि, समय के साथ इस फिल्म की स्वीकृति बढ़ी है। आज के दौर में, विशेष रूप से शहरी भारत में, जहां रिश्तों और विवाह को लेकर खुली बातचीत होने लगी है, ‘कभी अलविदा ना कहना’ को एक दूरदर्शी फिल्म माना जाता है। इसने न केवल वैवाहिक रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाया, बल्कि प्रेम और भावनात्मक इच्छाओं को एक नए नजरिए से प्रस्तुत किया। फिल्म की कहानी, जो दो लोगों की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है, ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि प्रेम और विवाह हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलते। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण पेश करती है, जो अपने रिश्तों में सच्चाई और आत्म-स्वीकृति की तलाश में हैं।
फिल्म का संगीत भी इसके प्रभाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। शंकर-एहसान-लॉय द्वारा रचित और जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए गीत, जैसे “मितवा”, “तुम्ही देखो ना”, “रॉक एन रोल सोनीए” और “कभी अलविदा ना कहना”, आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। इन गीतों ने फिल्म की भावनात्मक गहराई को और बढ़ाया और इसे एक अलग पहचान दी। विशेष रूप से “मितवा” और “तुम्ही देखो ना” जैसे गाने दर्शकों के बीच आज भी रोमांटिक गीतों की सूची में शीर्ष पर हैं। फिल्म का संगीत न केवल कहानी को पूरक बनाता है, बल्कि इसे एक कालातीत अपील भी देता है। ‘कभी अलविदा ना कहना’ का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया था, और इसे न्यूयॉर्क शहर में शूट किया गया था, जो उस समय भारतीय सिनेमा में एक नया प्रयोग था। न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतें, हलचल भरी सड़कें और शहरी माहौल ने फिल्म को एक वैश्विक अपील दी। करण ने सेट पर बिताए पलों को “सपनों जैसा” बताया और कहा कि इस फिल्म ने उन्हें एक निर्देशक के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी बताया कि इस फिल्म के दौरान उन्हें शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव एक “सम्मान” था।
फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन की बात करें, तो यह भारत में व्यावसायिक रूप से ज्यादा सफल नहीं रही थी। इसे उस समय की कुछ आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि दर्शक और समीक्षक इसके बोल्ड कथानक को पूरी तरह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, विदेशी बाजारों में, विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में, यह फिल्म काफी सफल रही और 2006 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी। समय के साथ, इस फिल्म ने एक कल्ट स्टेटस हासिल किया और आज इसे भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जो अपने समय से आगे थीं। करण जौहर की यह पोस्ट न केवल ‘कभी अलविदा ना कहना’ के प्रशंसकों के लिए एक उपहार थी, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य को भी दर्शाती है। आज के समय में, जब दर्शक अधिक खुले दिमाग से रिश्तों और भावनात्मक जटिलताओं को स्वीकार कर रहे हैं, यह फिल्म पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक लगती है। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने इस फिल्म की कहानी, अभिनय और संगीत की तारीफ की। एक प्रशंसक ने लिखा, “यह फिल्म मेरे लिए हमेशा खास रहेगी, क्योंकि इसने मुझे रिश्तों की सच्चाई को समझने में मदद की।” एक अन्य ने कमेंट किया, “करण जौहर ने इस फिल्म के जरिए भारतीय सिनेमा को एक नया दृष्टिकोण दिया।” करण जौहर के लिए यह फिल्म एक व्यक्तिगत और पेशेवर मील का पत्थर रही है। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि इस फिल्म को बनाते समय वे पूरी तरह से कहानी में डूब गए थे। उनके लिए यह केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसी कहानी थी, जिसमें वे विश्वास करते थे। इस फिल्म ने उन्हें एक निर्देशक के रूप में अपनी रचनात्मक सीमाओं को तोड़ने का मौका दिया और भारतीय सिनेमा में नई तरह की कहानियों को पेश करने का साहस दिया।
फिल्म के कलाकारों ने भी इसकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा। उनके किरदारों की भावनात्मक गहराई और जटिलता ने दर्शकों को उनके साथ जोड़ा। प्रीति जिंटा और अभिषेक बच्चन ने भी अपने किरदारों को जीवंत किया, जबकि अमिताभ बच्चन और किरण खेर ने फिल्म को एक मजबूत आधार प्रदान किया। करण ने अपनी पोस्ट में इन सभी कलाकारों को टैग करते हुए उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। करण की यह पोस्ट उस समय आई, जब उनकी हालिया प्रोडक्शन ‘धड़क 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसके अलावा, उनकी फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ ने हाल ही में 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में पुरस्कार जीता, जिसने उनके प्रोडक्शन हाउस, धर्मा प्रोडक्शंस, की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया। करण की यह क्षमता कि वे एक साथ नई परियोजनाओं पर काम करते हुए अपनी पुरानी फिल्मों को याद करते हैं, उनकी सिनेमा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट ने न केवल पुरानी यादों को ताजा किया, बल्कि यह भी दिखाया कि ‘कभी अलविदा ना कहना’ आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। प्रशंसकों ने फिल्म के गीतों, डायलॉग्स और दृश्यों को याद करते हुए इसे एक मास्टरपीस करार दिया। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो सिनेमा में साहसिक और भावनात्मक कहानियों की तलाश करते हैं।
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