Special : मारवाड़ के लाल से सीमा के शिल्पकार तक, पढ़िए मेजर जनरल आशु सिंह राठौड़ की गौरव गाथा और AVSM सम्मानित अधिकारी की अनूठी कहानी
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. आशु सिंह राठौड़ का जीवन एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो एक साधारण राजस्थानी गांव से शुरू होकर देश की सीमाओं की रक्षा और विकास तक पहुंची। उन्होंने सीमा सड़
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. आशु सिंह राठौड़ का जीवन एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो एक साधारण राजस्थानी गांव से शुरू होकर देश की सीमाओं की रक्षा और विकास तक पहुंची। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) में तीन दशकों से अधिक समय तक दुर्गम क्षेत्रों में सामरिक महत्व की सड़कों, पुलों और सुरंगों का निर्माण किया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से नवाजा गया। यह सम्मान BRO के अधिकारियों में सर्वोच्च स्तर का माना जाता है।
नागौर जिले की लाडनू तहसील के छोटे से गांव लाछड़ी में 15 जनवरी 1964 को जन्मे आशु सिंह राठौड़ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं पूरी की। आगे की पढ़ाई उन्होंने मीठड़ी मारवाड़ और मौलासर सुजानगढ़ में प्राप्त की। अपनी लगन और प्रतिभा से उन्होंने 1988 में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री टॉप करके हासिल की। इसके बाद उन्होंने IIT दिल्ली से एम.टेक की डिग्री प्राप्त की। सेवा के दौरान उन्होंने एमबीए और पीएचडी भी पूरी कीं।
1990 में प्रथम प्रयास में ही यूपीएससी परीक्षा पास करके उन्होंने रक्षा मंत्रालय के अधीन सीमा सड़क संगठन (BRO) में अपनी सेवा शुरू की। यह संगठन देश की सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें और अन्य आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए जाना जाता है, जहां मौसम और भूगोल दोनों ही चुनौतीपूर्ण होते हैं। उनकी सेवा का अधिकांश समय लद्दाख की 12 से 18 हजार फीट ऊंची बर्फीली चोटियों, उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और यहां तक कि भूटान जैसे कठिन क्षेत्रों में बीता। उनके कुशल नेतृत्व में कई सामरिक महत्व की सड़कें, पुल, सुरंगें और ऑल-वेदर रोड परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं। सेवा के अंतिम चरण में वे BRO शिवालिक रेंज में चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात रहे।
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में उनके नेतृत्व वाली परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 2000 करोड़ रुपये की थी। इनका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में सेना की आवाजाही, आपूर्ति और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाना था। सेवा के दौरान उन्होंने एक वर्ष में सबसे अधिक सड़क निर्माण का रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी कायम है। साथ ही, पांच वर्ष तक लगातार दो बार सड़क निर्माण कंपनी के कमान अधिकारी रहने का भी रिकॉर्ड उनके नाम है। वे BRO के टेक्निकल परीक्षक भी रहे और भूटान में सेवा देने का गौरव प्राप्त किया।
सेवा के अंतिम दौर में पर्सनल विभाग के HOD के रूप में उन्होंने BRO के जवानों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं, जो एक मिसाल बन गईं। 26 जनवरी 2019 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्वारा उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया। यह घोषणा विभिन्न समाचार स्रोतों जैसे न्यूज18 हिंदी में प्रकाशित हुई, जहां उन्हें नागौर जिले के लाछड़ी गांव का निवासी बताया गया और उनके योगदान की सराहना की गई। यह BRO के सबसे प्रतिष्ठित अलंकरणों में से एक है।
इसके अलावा उन्हें कई अन्य सम्मान मिले, जैसे:
- 1998 और 2005 में भारत सरकार के कमेंडेटरी सर्टिफिकेट।
- 22 नवंबर 2021 को थल सेनाध्यक्ष प्रशस्ति पत्र।
- भारत सरकार और महानिदेशक सीमा सड़क से कई प्रशंसा पत्र।
- विभिन्न पदक: विदेश सेवा पदक, उच्चतंगता पदक, जम्मू-कश्मीर सेवा पदक, ऑपरेशन पराक्रम पदक, उत्तर-पूर्व सेवा पदक, स्वर्ण जयंती सेवा पदक, आजादी का अमृत महोत्सव सेवा पदक, तथा 10, 20 और 30 वर्ष सेवा पदक।
सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनकी विशेषज्ञता का लाभ देश उठा रहा है। केंद्र सरकार ने उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है, जहां वे BRO के इकलौते ऐसे अधिकारी हैं।
साथ ही, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर के रूप में वे ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और तकनीकी मूल्यांकन में मार्गदर्शन दे रहे हैं। परिवारिक जीवन में वे अपनी पत्नी मनीषा कंवर के साथ सुखी हैं। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। छोटी पुत्री डॉ. महक राठौड़ एक चिकित्सक हैं और राज्य स्तर पर गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं।
समाज में भी उन्हें कई सम्मान मिले हैं, जैसे राजस्थान गौरव, क्षत्रिय रत्न, वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान, मारवाड़ रत्न, प्रख्यात इंजीनियर और ग्लोबल प्राइड अवार्ड। आशु सिंह राठौड़ का व्यक्तित्व सरल, मृदुभाषी और अनुशासित है। उन्होंने फील्ड से लेकर प्रशासनिक स्तर तक काम करके साबित किया कि तकनीकी कुशलता, ईमानदारी और मजबूत नेतृत्व से कोई भी युवा राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकता है। राजपूत युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दशरथ सिंह बरड़वा ने उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
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