तापसी पन्नू ने बॉलीवुड के पीआर गेम पर खोला राज: कहा- अब पैसे खुद को आगे बढ़ाने के साथ दूसरों को नीचे धकेलने में भी लगते हैं, पिछले 1.5-2 सालों में काम धीमा किया।
तापसी पन्नू बॉलीवुड में अपनी मजबूत भूमिकाओं और चुनिंदा फिल्मों के जरिए एक अलग पहचान बना चुकी हैं। वे अब बहुत कम फिल्मों में काम
तापसी पन्नू बॉलीवुड में अपनी मजबूत भूमिकाओं और चुनिंदा फिल्मों के जरिए एक अलग पहचान बना चुकी हैं। वे अब बहुत कम फिल्मों में काम करती हैं लेकिन उनकी फिल्में दमदार कंटेंट के लिए जानी जाती हैं। इंडस्ट्री में काफी सालों से सक्रिय रहने के बाद उन्होंने हाल ही में पेड पीआर और इमेज गेम पर खुलकर बात की। एक साक्षात्कार में तापसी ने कहा कि वे पहले अपने काम में इतनी व्यस्त थीं कि बाहर की चीजों पर ध्यान नहीं देती थीं लेकिन पिछले 1.5-2 सालों से उन्होंने जानबूझकर सब कुछ थोड़ा धीमा कर दिया है। यह निर्णय सचेत रूप से लिया गया था।
तापसी ने बताया कि इस ब्रेक के दौरान उन्हें पीआर गेम के बदलाव का अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि पीआर अब बहुत अलग स्तर पर पहुंच गया है। पहले पीआर का मतलब खुद को आगे बढ़ाने के लिए पैसे खर्च करना था लेकिन अब दो तरह से पैसे लगाए जाते हैं। एक तो खुद को प्रमोट करने के लिए और दूसरा किसी और को नीचे धकेलने के लिए। तापसी ने सवाल उठाया कि कब से किसी की सफलता किसी और की असफलता पर निर्भर हो गई है। उन्होंने कहा कि लोग अब अपनी नई छवि बनाने के लिए पैसे खर्च करते हैं ताकि वे प्रासंगिक बने रहें।
तापसी ने आगे कहा कि वे अब ऐसे तरीकों से सहज नहीं हैं जहां सफलता दूसरों की कमजोरी पर टिकी हो। उन्होंने बताया कि वे अपना पैसा खुद पर और अपने करीबियों पर खर्च करना पसंद करती हैं बजाय आर्टिकल प्लांट करने के। तापसी ने पीआर की इस प्रवृत्ति पर टिप्पणी की कि लोग फिल्मों के अलावा एक मजबूत आवाज बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह आवाज उनके काम से मेल नहीं खाती। इससे असंगति पैदा होती है जहां व्यक्ति फिल्मों से अलग कुछ और दिखाने की कोशिश करता है लेकिन काम कुछ और कहता है।
यह बयान तापसी की हालिया साक्षात्कार में आया जहां उन्होंने बॉलीवुड के पीआर कल्चर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पीआर अब आक्रामक हो गया है और इसमें नकारात्मक अभियान शामिल हैं जहां एक्टर दूसरे को नीचे दिखाने के लिए पैसे खर्च करते हैं। तापसी ने अपनी धीमी गति पर जोर दिया कि यह निर्णय उन्हें इंडस्ट्री के इन बदलावों को समझने में मददगार साबित हुआ। वे अब अपनी फिल्मों पर फोकस करती हैं और चुनिंदा प्रोजेक्ट्स चुनती हैं जो उनके काम से जुड़े हों।
तापसी पन्नू की आखिरी फिल्म मुदस्सर अजीज की खेल खेल में थी जिसमें अक्षय कुमार, वाणी कपूर, अम्मी विर्क, आदित्य सील, प्रज्ञा जैस्वाल और फरदीन खान भी थे। वे अब गंधारी में नजर आएंगी जो देवाशीष मखीजा द्वारा निर्देशित एक बदला ड्रामा है। यह फिल्म कनिका ढिल्लों की कथा पिक्चर्स द्वारा समर्थित है और नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर होगी। तापसी ने अपनी फिल्मों में मजबूत महिला किरदारों को चुना है जैसे पिंक, थप्पड़, बदला, रश्मी रॉकेट और हसीन दिलरuba सीरीज। तापसी ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर के रूप में अपनी यात्रा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वे पारंपरिक प्रोजेक्ट्स चुनती थीं लेकिन बाद में समझा कि वह रास्ता उनके लिए नहीं है। उन्होंने अपनी खुद की एल्गोरिदम बनाई जहां वे केवल अपने गट फीलिंग पर भरोसा करती हैं। तापसी ने कहा कि असफलताओं और दिल टूटने की जरूरत पड़ी ताकि वे अपना सच्चा कॉलिंग ढूंढ सकें। वे अब ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनती हैं जहां उनका दिल और दिमाग पूरी तरह जुड़े हों।
पीआर पर उनकी टिप्पणी इंडस्ट्री में चल रही बहस से जुड़ी है जहां पेड प्रमोशन और नेगेटिव कैंपेन आम हो गए हैं। तापसी ने स्पष्ट किया कि वे इस तरह के गेम से दूर रहना पसंद करती हैं। उन्होंने कहा कि सफलता किसी की असफलता पर आधारित नहीं होनी चाहिए। तापसी ने अपनी पसंद को दोहराया कि पैसा खुद पर और परिवार पर लगाना बेहतर है बजाय आर्टिकल्स प्लांट करने के। तापसी पन्नू ने 2010 में तेलुगु फिल्म झुम्मंडी नादम से डेब्यू किया था। हिंदी में उन्होंने 2012 में चश्मे बद्दूर से शुरुआत की। उनकी फिल्में जैसे बेबी, नाम शबाना, मनमर्जियां, मुल्क, सांड की आंख, हसीन दिलरuba और डोबारा शामिल हैं। वे अब चुनिंदा काम करती हैं लेकिन उनकी फिल्में कंटेंट आधारित होती हैं। तापसी ने कहा कि वे अपनी आवाज और मौजूदगी को बनाए रखना चाहती हैं ताकि लंबे समय तक प्रभाव छोड़ सकें। यह बयान हाल के महीनों में तापसी की सक्रियता को दर्शाता है जहां वे इंडस्ट्री के मुद्दों पर खुलकर बोलती हैं। उन्होंने पीआर को अब अलग स्तर पर बताया जहां प्रमोशन सिर्फ खुद को ऊपर उठाने तक सीमित नहीं रह गया। तापसी ने कहा कि लोग अब दूसरों को नीचे धकेलने के लिए भी पैसे खर्च करते हैं। वे इस प्रवृत्ति से असहमत हैं और अपनी शर्तों पर काम करना पसंद करती हैं।
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