केजीएमयू धर्मांतरण कांड में बड़ा खुलासा: फरार डॉक्टर रमीज मलिक के PFI लिंक और लाखों की संदिग्ध फंडिंग सामने, यूपी से दिल्ली-उत्तराखंड तक चली छापेमारी। 

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा लगाए गए यौन शोषण, धोखे से शादी का वादा, जबरन गर्भपात और धर्मांतरण

Jan 13, 2026 - 14:49
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केजीएमयू धर्मांतरण कांड में बड़ा खुलासा: फरार डॉक्टर रमीज मलिक के PFI लिंक और लाखों की संदिग्ध फंडिंग सामने, यूपी से दिल्ली-उत्तराखंड तक चली छापेमारी। 
केजीएमयू धर्मांतरण कांड में बड़ा खुलासा: फरार डॉक्टर रमीज मलिक के PFI लिंक और लाखों की संदिग्ध फंडिंग सामने, यूपी से दिल्ली-उत्तराखंड तक चली छापेमारी। 

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा लगाए गए यौन शोषण, धोखे से शादी का वादा, जबरन गर्भपात और धर्मांतरण के दबाव के आरोपों ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। मामला दिसंबर 2025 में सामने आया जब पीड़िता ने चौक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। आरोपी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक पर आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए, गर्भपात करवाया और इस्लाम में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। पीड़िता ने दिसंबर 17 को दवा की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया और केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुई।

पुलिस ने दिसंबर 23, 2025 को भारतीय दंड संहिता की धाराओं और उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और फरवरी 2025 में एक अन्य महिला डॉक्टर को जबरन धर्मांतरण करवाकर पीलीभीत में निकाह किया था। आरोपी के पिता सलीमुद्दीन नायक और मां खदीजा को जनवरी 5, 2026 को थाकुरगंज से गिरफ्तार किया गया। दोनों पर आरोप है कि वे धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल थे और पीड़िताओं के गर्भपात में सहयोग किया।

आरोपी रमीज मलिक दिसंबर 23, 2025 से फरार था और पुलिस ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इनामी राशि 50 हजार रुपये तक बढ़ाई गई। पुलिस ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और अन्य स्थानों पर छापेमारी की। आरोपी की संपत्ति खटीमा उत्तराखंड और पीलीभीत में अटैच करने की प्रक्रिया शुरू हुई। जनवरी 9, 2026 को लखनऊ के थाकुरगंज इलाके से आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

जांच में आरोपी के मोबाइल डेटा से प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े संपर्क सामने आए। डिजिटल फोरेंसिक से कॉल रिकॉर्ड और चैट मेटाडेटा मिले जो फरारी के दौरान PFI से जुड़े व्यक्तियों से संपर्क दर्शाते हैं। फरारी के 18 दिनों में आरोपी ने लाखों रुपये की संदिग्ध फंडिंग जुटाई जो महंगे वकील और फरारी में मदद के लिए इस्तेमाल हुई। आरोपी के पिता सलीमुद्दीन पर आरोप है कि उनका PFI से पुराना संबंध था और उन्हें संगठन द्वारा दो बार सम्मानित किया गया। जांच अब PFI के वैचारिक और लॉजिस्टिकल सपोर्ट नेटवर्क पर केंद्रित है।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने मामले की जांच संभाली है। जांच में आरोपी के परिवार की पृष्ठभूमि और बड़े धर्मांतरण नेटवर्क की संभावना तलाशी जा रही है। पुलिस का दावा है कि सलीमुद्दीन ने पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से हिंदू महिलाओं को संबंधों में फंसाकर धर्मांतरण करवाया। आरोपी को उसके पिता ने ऐसे रैकेट में शामिल किया और लक्ष्य दिए। केजीएमयू प्रशासन ने दिसंबर 22, 2025 को आरोपी को सस्पेंड किया और कैंपस में प्रवेश प्रतिबंधित किया। विश्वा कमेटी ने आरोपों की जांच की और सभी आरोप सही पाए। कमेटी ने रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने डॉक्टर की सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन को भेजा। राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन से जूनियर रेजिडेंसी एडमिशन रद्द करने की अपेक्षा है।

मामले में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने केजीएमयू कुलपति पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगाया। जनवरी 9, 2026 को अपर्णा यादव और उनके समर्थकों के केजीएमयू पहुंचने पर हंगामा हुआ। उन्होंने कुलपति से मुलाकात की मांग की लेकिन मुलाकात नहीं हुई। समर्थकों ने चैंबर के दरवाजे पर धक्का दिया, सिटकनी तोड़ी और नारे लगाए। कुलपति ने आरोप निराधार बताए और कहा कि अपर्णा यादव बिना पूर्व सूचना के आईं। केजीएमयू ने मुख्य प्रॉक्टर की ओर से उत्पात मचाने की शिकायत दर्ज कराई। अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। कुलपति ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परिसर में अराजकता की शिकायत की। मामले में पीड़िताओं की संख्या दो बताई गई, एक केजीएमयू की और दूसरी आगरा मेडिकल कॉलेज की। पुलिस ने पीड़िताओं के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए। जांच में आरोपी के फोन से डेटा डिलीट मिला लेकिन पुलिस आगे की जांच कर रही है।

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