Sitapur: डीएम के औचक निरीक्षण में सीएचसी पहला की व्यवस्थाओं की खुली पोल लापरवाही पर वेतन कटौती के निर्देश।
सीतापुर जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहला का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
रिपोर्ट- संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
सीतापुर जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहला का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं जिस पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।निरीक्षण के समय प्रभारी चिकित्साधिकारी अनिल सचान अनुपस्थित पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश कुमार को उनका एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी ने पर्चा काउंटर का निरीक्षण किया तथा मरीजों को दी जा रही दवाओं की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने स्टाफ की स्थिति की जानकारी लेते हुए एक्स-रे कक्ष का निरीक्षण किया जो बंद पाया गया। इस लापरवाही पर चिकित्सक कंचन भारती का भी एक दिन का वेतन काटने के निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिए गए। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने प्रयोगशाला कक्ष एवं टीबी यूनिट कक्ष का अवलोकन किया तथा संबंधित रजिस्टर भी देखे। टीबी मरीजों का अद्यतन डेटा प्रस्तुत न किए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
लेबर रूम पहुंचकर जिलाधिकारी ने लेबर रूम रजिस्टर की जांच की और आशा कार्यकर्ता से दूरभाष के माध्यम से गांव में किए जा रहे टीकाकरण की जानकारी प्राप्त की। प्रसव रजिस्टर के अवलोकन में 600 पंजीकृत प्रसवों के सापेक्ष केवल 150 प्रसव दर्ज पाए जाने पर बी सी पी एम मयंक का 15 दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने रेफर रजिस्टर भी देखा और रेफर किए गए मरीजों से बातचीत की। तीन दिन पूर्व रेफर किए गए एक मरीज का फीडबैक न लिए जाने पर नर्स कल्पना देवी के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि जारी करने के निर्देश दिए गए।
इस दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर किए गए मरीजों का फीडबैक नर्स द्वारा अनिवार्य रूप से लिया जाना सुनिश्चित किया जाए।मरीजों के भोजन एवं पेयजल व्यवस्था की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यदि पानी की टंकी का उपयोग पेयजल के लिए किया जा रहा है तो आरओ (RO) सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाए ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।
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