साकेत कोर्ट में दिव्यांग कर्मचारी की आत्महत्या, सुसाइड नोट में काम के दबाव और मानसिक तनाव का दर्दनाक ज़िक्र।
दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर में एक कोर्ट स्टाफ हरीश सिंह महार ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना शुक्रवार की सुबह अदालत
दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर में एक कोर्ट स्टाफ हरीश सिंह महार ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना शुक्रवार की सुबह अदालत के कामकाजी समय के दौरान हुई, जब उन्होंने कोर्ट कॉम्प्लेक्स की ऊपरी मंज़िल से छलांग लगा दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और उन्हें मृत अवस्था में पाया, जिसके बाद शव को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू की गई।
दक्षिणी जिले के पुलिस उपायुक्त ने पुष्टि की कि मामला साउथ दिल्ली स्थित साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का है और शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना गया है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मौके से सुसाइड नोट बरामद किया और चश्मदीदों तथा सहकर्मियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।
- मृतक की पहचान और पद
पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान हरीश सिंह महार के रूप में हुई, जो साकेत जिला अदालत में कोर्ट स्टाफ के रूप में तैनात थे। कई रिपोर्टों के मुताबिक वे अदालत में ‘अह्लमद’ (रिकॉर्ड-कीपर/क्लर्क) के पद पर कार्यरत थे, जिनकी जिम्मेदारी अदालत के रिकॉर्ड और फाइलों का संधारण करना तथा न्यायिक कार्यवाही में रिकॉर्ड से संबंधित सहायता देना थी। वे दक्षिण दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट के एक जज की अदालत में तैनात थे और लंबे समय से यहीं कार्य कर रहे थे।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि हरीश सिंह महार शारीरिक रूप से दिव्यांग थे और लगभग 60 प्रतिशत शारीरिक विकलांगता के साथ सरकारी सेवा में कार्य कर रहे थे। सुसाइड नोट सहित प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिला कि शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन पर काम का बोझ अपेक्षाकृत अधिक महसूस हो रहा था।
- सुसाइड नोट की अहम बातें
घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में हरीश सिंह महार ने साफ तौर पर लिखा कि वे यह कदम ऑफिस के काम के दबाव और लंबे समय से चल रहे मानसिक तनाव के कारण उठा रहे हैं। नोट में उन्होंने उल्लेख किया कि दफ्तर का काम उनके लिए बेहद कठिन हो गया था और वे मानसिक रूप से लगातार दबाव में जी रहे थे। सुसाइड नोट में यह भी लिखा गया कि वे पिछले कई वर्षों से मानसिक दबाव झेल रहे थे और काम का बोझ बढ़ने के बाद हालात और बिगड़ गए।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सुसाइड नोट में यह भी दर्ज है कि उन्हें काफी समय से आत्महत्या के विचार आ रहे थे, जिन्हें उन्होंने किसी से साझा नहीं किया और सोचा कि खुद ही इनसे उबर जाएंगे, लेकिन अंततः वे ऐसा नहीं कर सके। नोट में हरीश सिंह महार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से यह कदम उठा रहे हैं और किसी भी व्यक्ति को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाए।
- काम का दबाव और मानसिक तनाव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरीश सिंह महार ने अपने सुसाइड नोट में दफ्तर के काम के बोझ और उससे पैदा हुए मानसिक दबाव को आत्महत्या की मुख्य वजह बताया। रिपोर्टों में यह सामने आया है कि अह्लमद के रूप में कार्य करते हुए उन्हें बड़ी संख्या में फाइलों, रिकॉर्ड और कागजी काम का प्रबंधन करना होता था, जो उन्हें उनकी शारीरिक दशा और मानसिक स्थिति के हिसाब से अत्यधिक दबावपूर्ण लग रहा था। कुछ विवरणों में यह भी बताया गया कि उन्होंने लंबे समय तक कम नींद, अधिक सोच और लगातार तनाव की स्थिति का सामना किया, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ गई।
कई रिपोर्टों के मुताबिक हरीश सिंह महार ने अपने नोट में यह भाव व्यक्त किया कि यह नौकरी उनके लिए “बहुत कठिन” हो गई थी और वे कार्य दबाव से उबरने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। यह भी उल्लेख है कि वे 60 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ इस जिम्मेदार पद पर काम कर रहे थे, जिसके कारण नियमित रूप से भारी मात्रा में फाइलों और अदालत की समयबद्ध प्रक्रियाओं को संभालना उनके लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया था।
- आत्महत्या का तरीका और मौके की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, हरीश सिंह महार ने साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स की इमारत की ऊपरी मंज़िल से छलांग लगाई। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि वे कॉम्प्लेक्स के एक ब्लॉक की ऊंची मंज़िल, जिसे छठी मंज़िल बताया गया है, से कूदे थे, जहां से गिरने पर उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना स्थल अदालत परिसर के अंदर होने के कारण तुरंत सुरक्षा कर्मी और पुलिस अधिकारी वहां पहुंचे और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने घटनास्थल से भौतिक साक्ष्य एकत्र किए और सुसाइड नोट को जब्त कर फॉरेंसिक और कानूनी जांच की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में किसी तरह की बाहरी साज़िश या हिंसक हमले के संकेत नहीं मिले हैं और मामला आत्महत्या का ही प्रतीत होता है, हालांकि विस्तृत जांच अभी जारी है।
- पुलिस जांच और आधिकारिक बयान
दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि शुक्रवार की सुबह सूचना मिलने पर पुलिस टीम तुरंत साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स पहुंची, जहां एक व्यक्ति के इमारत से कूदने की खबर दी गई थी। पुलिस ने वहां पहुंचकर देखा कि कोर्ट स्टाफ का सदस्य जमीन पर गिरा हुआ था, जिसे मृत घोषित किया गया और बाद में उसकी पहचान हरीश सिंह महार के रूप में की गई। अधिकारी ने कहा कि अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कोर्ट स्टाफ ने आत्महत्या की है और मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसके आधार पर आगे की जांच की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि मामले में इनक्वायरी शुरू कर दी गई है, सहकर्मियों और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, और सुसाइड नोट की सामग्री की कानूनी और तकनीकी जांच की जाएगी। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि फिलहाल इस संबंध में किसी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज किए जाने की सूचना नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
- न्यायिक परिसर में माहौल और अगला कदम
घटना के बाद साकेत कोर्ट परिसर में मौजूद स्टाफ और अन्य लोगों के बीच स्तब्धता और चिंता का माहौल देखा गया, क्योंकि आत्महत्या कार्यालय परिसर के अंदर दिन के समय हुई। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद कुछ समय के लिए अदालत की सामान्य कार्यवाही भी प्रभावित हुई और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पूरे परिसर में स्थिति का जायज़ा लेते रहे। अदालत प्रशासन और संबंधित अधिकारी आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि मृतक के परिवार को सूचना दे दी गई है और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इस घटना ने न्यायिक तंत्र में कार्यरत कर्मचारियों के काम के बोझ, मानसिक स्वास्थ्य और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए कार्य परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर आगे संस्थागत स्तर पर समीक्षा और चर्चा की संभावना व्यक्त की जा रही है। फिलहाल पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट की विस्तृत पड़ताल के बाद ही मामले से जुड़े अन्य प्रशासनिक निर्णय और संभावित अनुशंसाएं सामने आ सकेंगी।
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